March 10, 2026

विधायक के सामने नहीं उठा डॉक्टर! कार्रवाई पर हाई कोर्ट का बड़ा फैसला

0

हरियाणा
पंजाब-हरियाणा हाई कोर्ट ने कोविड ड्यूटी पर तैनात सरकारी डॉक्टर के खिलाफ केवल इसलिए कार्रवाई किए जाने पर निराशा जताई, क्योंकि वह इमरजेंसी वार्ड में विधायक के आने पर खड़ा नहीं हुआ था। अदालत ने कहा कि यह राज्य का असंवेदनशील और बेहद चिंताजनक रवैया दिखाता है। जज अश्विनी कुमार मिश्रा और जज रोहित कपूर की पीठ ने कहा कि समर्पित चिकित्सीय पेशेवरों के साथ होने वाली ऐसी अवांछित घटनाओं पर रोक लगनी चाहिए। अदालत ने हरियाणा के अधिकारियों को निर्देश दिया कि डॉक्टर को स्नातकोत्तर चिकित्सीय पाठ्यक्रम के लिए जरूरी अनापत्ति प्रमाणपत्र तुरंत जारी किया जाए। उसने राज्य पर 50,000 रुपये का जुर्माना भी लगाया।
 
याचिकाकर्ता डॉ. मनोज हरियाणा सरकार के कैजुअल्टी मेडिकल ऑफिसर थे और कोविड-19 महामारी के दौरान सरकारी अस्पताल के आपातकालीन वार्ड में ड्यूटी पर थे। डॉक्टर की याचिका के अनुसार, एक दिन अस्पताल का निरीक्षण करने आए विधायक इस बात पर नाराज हो गए कि डॉक्टर ने उनके आने पर उठकर उनका अभिवादन नहीं किया। इसके बाद राज्य सरकार ने 2016 के हरियाणा सिविल सर्विसेज नियमों के तहत चिकित्सक को मामूली सजा देने का प्रस्ताव रखा और उन्हें कारण बताओ नोटिस जारी किया। डॉ. मनोज ने जून 2024 में अपना जवाब दिया, जिसमें उन्होंने कहा कि वह विधायक को पहचान नहीं पाए थे। इसलिए वह खड़े नहीं हुए और उन्होंने ऐसा जानबूझकर नहीं किया था।

कोर्ट ने अपने फैसले में क्या कहा
डॉक्टर के अनुसार, आज तक इस मामले में कोई अंतिम आदेश पारित नहीं किया गया है। अदालत ने कहा, ‘हमें राज्य की ओर से उठाए गए इस कदम पर आश्चर्य और निराशा है कि कोविड काल के दौरान आपातकालीन ड्यूटी पर तैनात डॉक्टर को केवल इसलिए नोटिस जारी किया गया, क्योंकि वह विधायक के आने पर खड़े नहीं हुए। किसी डॉक्टर से यह उम्मीद करना कि वह इमरजेंसी वार्ड में विधायक के आने पर खड़ा हो और ऐसा न करने पर उसके खिलाफ अनुशासनात्मक कार्रवाई करना बेहद व्यथित करने वाला है।’ पीठ ने कहा कि हमारी नजर में इस तरह के आरोप पर चिकित्सक के खिलाफ कार्रवाई करना राज्य की असंवेदनशीलता दिखाता है। उसने कहा कि चिकित्सक को एनओसी न देकर उसे उच्च शिक्षा के अधिकार से वंचित रखा पूरी तरह मनमाना रवैया है।

'ऐसी घटनाओं पर सख्ती से रोक लगे'
अदालत ने कहा, ‘हमें दुख के साथ यह कहना पड़ रहा है कि अखबारों में अक्सर समाचार आते हैं कि मरीजों के परिजन या जनप्रतिनिधि चिकित्सकों के साथ बिना किसी ठोस कारण के दुर्व्यवहार करते हैं। अब समय आ गया है कि ऐसी अवांछित घटनाओं पर सख्ती से रोक लगाई जाए और ईमानदार डॉक्टरों को पर्याप्त सम्मान दिया जाए।’ अदालत ने कहा कि राज्य सरकार चिकित्सक को तुरंत एनओसी जारी करे। उसने कहा कि याचिका स्वीकार की जाती है और राज्य सरकार को 50 हजार रुपये का जुर्माना PGIMER, चंडीगढ़ के गरीब मरीज कल्याण कोष में जमा करना होगा।

 

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *