September 29, 2026

अमेरिका के साथ ट्रेड डील पर नई बातचीत, टैरिफ विवाद के बीच सरकार ने बदला प्लान

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नई दिल्ली.
 केंद्र सरकार अमेरिका के साथ ट्रेड डील पर दोबारा विचार करने की योजना बना रही है. यूएस सुप्रीम कोर्ट द्वारा डोनाल्ड ट्रंप के मनमाने टैरिफ को अवैध बताकर खत्म किए जाने के बाद अब भारत डील रीनेगोशिएट करने के लिए मजबूत स्थिति में पहुंच गया है. मनीकंट्रोल ने एक सरकारी अधिकारी के हवाले से लिखा है कि सरकार अमेरिकी सुप्रीम कोर्ट के फैसले के हर पहलू को परख रही है इसलिए दोनों देशों के बीच अंतरिम ट्रेड फ्रेमवर्क पर बात भी टाल दी गई थी.

वरिष्ठ अधिकारी के मुताबिक, अमेरिका के टैरिफ सिस्टम में आए बदलावों के कारण मौजूदा डील के फायदे खत्म हो गए हैं, इसलिए अब भारत नई रणनीति के साथ बातचीत करने की तैयारी में है ताकि दूसरे देशों के मुकाबले बढ़त हासिल की जा सके.
सुप्रीम कोर्ट के फैसले के बाद भारत का यू टर्न

सरकारी अधिकारी ने बताया कि फिलहाल यह साफ नहीं है कि सुप्रीम कोर्ट के फैसले का बातचीत पर क्या असर पड़ेगा, लेकिन सरकार सभी पहलुओं का मूल्यांकन कर रही है. एक अन्य सूत्र के अनुसार, भारत कुछ प्रावधानों पर नए सिरे से बातचीत करना चाहता है ताकि उसे दूसरे देशों पर प्रतिस्पर्धात्मक बढ़त मिल सके. पहले 18 प्रतिशत टैरिफ रेट भारत को मामूली बढ़त देता था, लेकिन अब जब अमेरिका ने ग्लोबल टैरिफ 15 प्रतिशत कर दिया है, तो यह फायदा खत्म हो गया है. इसी वजह से सरकार उन सेक्टरों की पहचान कर रही है जहां ट्रेड डील के जरिए ज्यादा रियायत या छूट हासिल की जा सकती है.
टली भारत अमेरिका ट्रेड मीटिंग, डील पर फिर से मंथन

भारत और यूएस के अधिकारियों के बीच तीन दिन की ट्रेड मीटिंग 23 फरवरी से शुरू होने वाली थी, जिसमें अंतरिम ट्रेड डील की शर्तों को अंतिम रूप दिया जाना था. इस समझौते के तहत अमेरिका ने भारत पर लगाए गए 50 प्रतिशत टैरिफ को घटाकर 18 प्रतिशत करने पर सहमति जताई थी और दोनों देशों ने आगे व्यापक समझौते की दिशा में रोडमैप जारी किया था. लेकिन सुप्रीम कोर्ट के फैसले के बाद, जिसने ट्रंप प्रशासन के रेसिप्रोकल टैरिफ को अवैध करार दिया, भारत सरकार अब पूरी बातचीत की समीक्षा कर रही है.
18 प्रतिशत से शून्य तक का खेल

सुप्रीम कोर्ट के फैसले ने रेसिप्रोकल टैरिफ को खत्म कर दिया, जिससे 18 प्रतिशत वाला प्रस्तावित रेट भी प्रभावी रूप से शून्य हो गया. इसके बाद राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने 24 फरवरी से सभी देशों पर 10 प्रतिशत टैरिफ लागू किया, जिसे एक दिन बाद 15 प्रतिशत तक बढ़ाने की घोषणा की गई. फिलहाल भारत के लगभग 55 प्रतिशत निर्यात पर 15 प्रतिशत टैरिफ लागू है, जिसकी कुल वैल्यू करीब 48.4 अरब डॉलर है. हालांकि, स्टील और ऑटोमोबाइल जैसे सेक्टरों पर सेक्शन 232 के तहत अलग से टैरिफ लागू है, जिसकी वैल्यू 8 से 9 अरब डॉलर के बीच है.
34 अरब डॉलर के निर्यात पर छूट का प्लान

अंतरिम ट्रेड फ्रेमवर्क के तहत करीब 34 अरब डॉलर के भारतीय निर्यात को टैरिफ से छूट मिलने की संभावना है. ट्रेड एक्ट 1974 के सेक्शन 122 के तहत प्रस्तावित टैरिफ में फार्मा, इलेक्ट्रॉनिक्स और टेलीकॉम उपकरणों को छूट दी गई है और सिविल एविएशन प्रोडक्ट्स को नए कैटेगरी के रूप में जोड़ा गया है. इन छूटों पर बातचीत मार्च तक पूरी होनी थी, लेकिन अब इसे दोबारा समीक्षा के लिए खोल दिया गया है. छूट वाले सेक्टरों में फार्मा, इलेक्ट्रॉनिक्स और टेलीकॉम उपकरण, पेट्रोलियम प्रोडक्ट्स, इंजीनियरिंग गुड्स और सिविल एविएशन कंपोनेंट्स शामिल हैं.
भारत की बड़ी कमिटमेंट, अमेरिका से खरीद बढ़ाने का वादा

यूएस इंडिया अंतरिम ट्रेड फ्रेमवर्क के फैक्टशीट के अनुसार, भारत अमेरिकी इंडस्ट्रियल गुड्स और कई कृषि उत्पादों पर टैरिफ घटाने या खत्म करने की योजना बना रहा है. इनमें ड्राइड डिस्टिलर्स ग्रेन्स, रेड सोरघम, ट्री नट्स, फ्रेश और प्रोसेस्ड फ्रूट, सोयाबीन ऑयल, वाइन और अन्य कृषि उत्पाद शामिल हैं. भारत ने अमेरिका से 500 अरब डॉलर से ज्यादा एनर्जी, आईसीटी, कोयला और अन्य उत्पाद खरीदने की भी मंशा जताई है.

 

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