August 11, 2026

हिमालय से गायब हो रहे पेड़, सरकारी रिपोर्ट में खुलासा- 2 साल में 2.2% ग्रीन कवर हुआ खत्म

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 नई दिल्ली

भारतीय हिमालयी क्षेत्र के पर्यावरण को लेकर एक परेशान करने वाली रिपोर्ट सामने आई है. केंद्रीय मंत्री कीर्ति वर्धन सिंह ने राज्यसभा में जानकारी दी है कि साल 2021 से 2023 के बीच हिमालयी राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों में 'ट्री कवर' में 2.27 प्रतिशत की गिरावट दर्ज की गई है।

शुक्रवार को राज्यसभा में एक सवाल का लिखित जवाब देते हुए मंत्री ने 'इंडिया स्टेट ऑफ फॉरेस्ट रिपोर्ट' (ISFR) 2023 के आंकड़े पेश किए. रिपोर्ट के मुताबिक, 2021 में ट्री कवर 15,427.11 वर्ग किलोमीटर था, जो कि 2023 में घटकर 15,075.5 वर्ग किलोमीटर रह गया।

ये आंकड़े बताते हैं कि सिर्फ दो सालों में हिमालय की हरियाली में बड़ी कमी आई है. इस क्षेत्र में जम्मू और कश्मीर, लद्दाख, उत्तराखंड, हिमाचल प्रदेश, सिक्किम और उत्तर-पूर्वी राज्यों सहित कुल 13 राज्य और केंद्र शासित प्रदेश शामिल हैं।

कार्बन स्टॉक में मामूली बढ़ोतरी
एक तरफ जहां पेड़ों की संख्या कम हुई है, वहीं जंगलों में मौजूद कुल कार्बन स्टॉक में बहुत मामूली बढ़ोतरी देखी गई है. 2021 में ये 3,272.68 मिलियन टन था, जो 2023 में बढ़कर 3,273.10 मिलियन टन हो गया है. कार्बन स्टॉक का बढ़ना पर्यावरण के लिए अच्छा संकेत माना जाता है क्योंकि ये वातावरण से कार्बन सोखने की क्षमता को दिखाता है।

जंगलों की स्थिति पर बात करते हुए मंत्री कीर्ति वर्धन सिंह ने कहा, 'जंगलों का स्वास्थ्य सिर्फ उनकी हरियाली से नहीं मापा जाता. ये कई इकोलॉजिकल और बायोफिजिकल स्टैंडर्ड्स पर निर्भर करता है।

भारतीय वन सर्वेक्षण क्यों करता है जंगलों की स्टडी?
भारतीय वन सर्वेक्षण (FSI) जंगलों की सेहत जांचने के लिए कई तरह के आंकड़े जुटाता है. इसमें मिट्टी की गहराई, मिट्टी का कटाव, वनस्पति की विशेषताएं और जंगलों को होने वाले खतरों की स्टडी की जाती है. ये सभी कारक मिलकर ये तय करते हैं कि किसी खास समय में जंगलों की स्थिति क्या है।

हिमालयी क्षेत्र के पर्यावरण में हो रहे ये बदलाव विशेषज्ञों के लिए चिंता का विषय हैं, क्योंकि ये क्षेत्र न सिर्फ जैव विविधता बल्कि भारत की प्रमुख नदियों का भी स्रोत है।

 

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