रियासत कालीन प्राचीन हिंगलाजिन माता मूल मंदिर बेड़ा गांव में चैत्र नवरात्रि एवं भव्य प्राण प्रतिष्ठा की तैयारी पूर्ण हो चुकी है
रियासत कालीन प्राचीन हिंगलाजिन माता मूल मंदिर बेड़ा गांव में चैत्र नवरात्रि एवं भव्य प्राण प्रतिष्ठा की तैयारी पूर्ण हो चुकी है आस्था के इस महापर्व के दौरान मां भगवती शारदा भवानी मैहर वाली के प्राण प्रतिष्ठा सहित विभिन्न अनुष्ठानों के साथ मनोकामना ज्योति कलश भी प्रज्वलित किए जाएंगे ज्ञातव्य हो हिंगलाजिन माता का मूल मंदिर पाकिस्तान के बलूचिस्तान क्षेत्र में सती के 52 शक्तिपीठों में से एक के रूप में विराजित है परंतु बस्तर अंचल एवं उड़ीसा के करीब 300 से अधिक हिंगलाज मंदिरों की शाखाओं का उद्गम बेड़ा गांव स्थित इस रियासत कालीन प्राचीन मंदिर को ही माना जाता है तथा आसपास के सभी क्षेत्र विशेष एवं वर्ग के लोग पुराने समय से ही इस मंदिर के प्रति आस्था बढ़ रहे हैं यद्यपि बस्तर की आराध्य देवी मां दंतेश्वरी है तथापि सर्वाधिक मंदिरों की संख्या गांव में हिंगलाज माता की है नवरात्रि के इस पावन अवसर पर मंदिर में प्रतिदिन सत्यनारायण कथा रुद्राभिषेक सुंदरकांड चंडी पाठ चांदी जॉब होम एवं विधिवत व्यवस्था पूजा प्रतिदिन होगी जिसे विधिवत प्रशिक्षित एवं कुशल आचार्य के द्वारा संपन्न कराया जाएगा इस अवसर पर आसपास के अनेक श्रद्धालु पदयात्रा सेवादार मांझी पुजारी चालकी ,सिरहा , सरपंच एवं परंपरागत रूप से संरक्षक बैस मालगुजार परिवार की सभी सदस्य उपरोक्त कार्यक्रम को सफल बनाने के लिए निरंतर प्रयास कर रहे हैं ठाकुर अजय सिंह बैस जो वर्तमान में इस मंदिर के अध्यक्ष और संरक्षक हैं ने बताया की 300 वर्ष से अधिक इस प्राचीन मंदिर के गौरवशाली वैभव और ऐतिहासिक महत्व देखते हुए में गत वर्ष पुनशच हिंगलाजिन माता की नवप्रतिमा प्राण प्रतिष्ठा की गई तथा इस पर भी मां भगवती शारदा भवानी मैहर वाली महासरस्वती की प्राण प्रतिष्ठा विधिवत रूप से की जाएगी ताकि इस आदिवासी क्षेत्र मे बस्तर में निवासरत सभी श्रद्धालुओं को भी इसका लाभ मिल सकेगा और मां शारदा की कृपा सबको प्राप्त हो सकेगी नवरात्रि के उपरांत 28 मार्च को भव्य माता मंडई का भी आयोजन किया जावेगा जिसमें आसपास के सभी देवी,देवता, पुजारी प्रमुख़गण राजपरिवार महाराजा साहेब श्री कमल चंद्र भजदेव एवं स्थानीय नेतृत्व कर्ता आदि सम्मिलित होकर उत्सव का समापन होगा