September 25, 2026

CM पर धमकाने का आरोप, महिला पहुंची सुप्रीम कोर्ट; जज की टिप्पणी से बढ़ी चर्चा

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बेंगलुरु
कर्नाटक के मुख्यमंत्री सिद्धारमैया के खिलाफ शिकायत करने वाली महिला को सुप्रीम कोर्ट से झटका लगा है। शुक्रवार को हुई सुनवाई के दौरान शीर्ष न्यायालय ने महिला से कहा है कि अपनी लड़ाई कोर्ट में न लड़ें। साथ ही कहा है कि इस केस को उच्च न्यायालय में लेकर जाएं। महिला की तरफ से मांग की जा रही थी कि उन्हें सुरक्षा दी जाए। उन्होंने आरोप लगाए थे वह कर्नाटक से बाहर रहने के लिए मजबूर हैं।

महिला ने क्या कहा
बार एंड बेंच के अनुसार, महिला की तरफ से कोर्ट पहुंचे वकील ने कहा, 'मुझे धमकियां मिल रहीं हैं। मैं कर्नाटक में प्रवेश नहीं कर पा रहीं हूं। मेरी सुरक्षा से समझौता किया जा रहा है। मैं दिल्ली में रहने के लिए मजबूर हूं। मुझे बार-बार धमकियां मिल रहीं हैं।' उन्होंने कहा कि वह कर्नाटक में अपने ही घर में रहना चाहती हैं, लेकिन ऐसा नहीं कर पा रहीं हैं।

उन्होंने संपत्ति पर कब्जा करने की कोशिश के आरोप लगाए हैं। वकील ने कहा, 'मैं वापस जाना चाहती हूं और अपने आवास में रहना चाहती हूं। मैंने शिकायतें दर्ज कराईं हैं, अपने पक्ष में कोर्ट के आदेश भी हासिल किए हैं, लेकिन इसके बाद भी धमकियां दी जा रहीं हैं। मेरे घर पर पत्थरबाजी हुई, गुंडे आए थे और तोड़फोड़ करके गए हैं। वो मेरी संपत्ति को हथियाना चाहते हैं।'

क्या बोला कोर्ट
कोर्ट ने कहा, 'कर्नाटक के मुख्यमंत्री आपके पीछे लोगों को दिल्ली भेज रहे हैं?' कोर्ट ने कहा, 'आप भी राजनेता हैं। आप अपनी लड़ाइयां कोर्ट में न लड़ें।' इसपर वकील ने जवाब दिया, 'मैं राजनीतिक व्यक्ति नहीं हूं।' सुप्रीम कोर्ट ने महिला को हाईकोर्ट जाने के लिए कहा है। वकील ने मांग की, 'कम से कम मेरी सुरक्षा की जाए।' इसपर कोर्ट ने अगले केस को सुनवाई के लिए बुलाया।

फिल्म कहानी 2 पर भी हुई सुनवाई
सुप्रीम कोर्ट ने फिल्म 'कहानी 2' को लेकर फिल्मकार सुजॉय घोष के खिलाफ कथित कॉपीराइट उल्लंघन के एक मामले में झारखंड की एक अदालत के समक्ष लंबित कार्यवाही को शुक्रवार को रद्द कर दिया। न्यायमूर्ति पी एस नरसिम्हा और न्यायमूर्ति आलोक आराधे की पीठ ने घोष की उस याचिका को स्वीकार कर लिया, जिसमें झारखंड उच्च न्यायालय के 22 अप्रैल 2025 के आदेश को चुनौती दी गई थी। उच्च न्यायालय ने घोष के खिलाफ लंबित कार्यवाही को रद्द करने से इनकार कर दिया था। पीठ ने घोष की याचिका स्वीकार करते हुए कहा, 'मुख्य न्यायिक मजिस्ट्रेट (सीजेएम) द्वारा सात जून, 2018 को पारित समन आदेश और उच्च न्यायालय द्वारा 22 अप्रैल, 2025 को पारित आदेश को रद्द किया जाता है तथा निरस्त किया जाता है।'

 

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