June 22, 2026

अफ़ीम खेती मामले में सरकार का संरक्षण उजागर, बिना जांच रिपोर्ट आए जिम्मेदारों की बहाली

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अफीम की खेती को सरकार का संरक्षण साबित हो गया – दीपक बैज

रायपुर/04 अप्रैल 2026। दुर्ग जिले के समोदा में बहुचर्चित अवैध अफीम की खेती को मक्का बताने पर निलंबित की गई ग्रामीण कृषि विस्तार अधिकारी को जांच रिपोर्ट आए बिना ही सेवा में बहाल किए जाने के सरकार के फैसले पर सवाल उठाते हुए प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष दीपक बैज ने कहा है कि गजब सुशासन है? पहले दिन से ही यह सरकार पूरे मामले में जांच की दिशा को भटकाने का काम कर रही है। मुख्य आरोपी भाजपा नेता विनायक ताम्रकार को एफ आई आर में तीसरे नंबर पर सह आरोपी बनाया ताकि ट्रायल के दौरान संदेश का लाभ देने की गुंजाइश बनाई जा सके, उसके द्वारा रखे गए कृषि मजदूर विश्नोई को मुख्य आरोपी बता दिया गया जिस पर किसी को यकीन नहीं, कार्यवाही के तीन दिन पहले कंटेनरों में भरकर अफीम के फल कहां भेजे गए आज तक पता नहीं चल पाया, अफीम के पौधे को गेहूं और मक्का का फसल बताने वाले कृषि विस्तार अधिकारी को अब विभागीय जांच रिपोर्ट आने से पहले ही बहाल किया जाना इस सरकार की दुर्भावना को प्रमाणित करता है। पूरे मामले के सरगना भाजपा नेता विनायक ताम्रकार को इस सरकार में कृषक रत्न सम्मान मिल जाए तो आश्चर्य नहीं होना चाहिए, क्या यही मोदी की गारंटी है? साय का सुशासन है? इस सरकार की ज़ीरो टॉलरेंस नीति है?

प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष दीपक बैज ने कहा है कि कहा है कि पूरे प्रदेश में लगभग आधा दर्जन मामले अफीम की अवैध खेती के उजागर हुए, नगरी सिहावा में तो बिना मामला दर्ज किए ही सबूत ही नष्ट कर दिया गया। बलरामपुर और रायगढ़ जिले में दो-दो मामले पकड़े गए जिसमें भी भारतीय जनता पार्टी के नेताओं की संलिप्तता पाई गई, आज तक यह खुलासा नहीं हुआ कि जो अफ़ीम के फलों में चीरा लगाकर दूध निकाला गया था उसका चिट्ठा कहां-कहां तक पहुंचा? डिजिटल गिरदावली और इंच-इंच भुइंया नापने का दावा करने वाली सरकार में अफीम की फसल को कहीं पर अन्य अनाज, कहीं खरबूज या सब्जी, तो कहीं गेहूं मक्का बताया गया, जिम्मेदारों पर कार्रवाई के नाम पर मात्र एक कृषि विस्तार अधिकारी को निलंबित किया गया था, उसे भी तत्काल बहाल करना इस बात का स्पष्ट संकेत है कि यह सरकार नहीं चाहती की दोषियों पर कार्यवाही हो।

प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष दीपक बैज ने कहा है कि सरकार के रवैये से बेहद स्पष्ट है कि पूरे छत्तीसगढ़ में अवैध नशे की खेती भाजपा सरकार के संरक्षण में ही हो रहा है। अब तक ना तो भाजपा नेता विनायक ताम्रकार को पार्टी से निष्कासित किया गया है और ना ही किसी अधिकारी कर्मचारी पर कोई ठोस कार्रवाई हुई है, निलंबन कोई सजा नहीं फिर भी बहाली के लिए इतनी तत्परता क्यों? जांच रिपोर्ट का इंतजार तो किया गया होता? अब तो सरकार के रवैया से जांच की पारदर्शिता और निष्पक्षता पर भी प्रदेश की जनता को भरोसा नहीं रहा है। सरकार दोषियों को संरक्षण दे रही है, ट्रैक्टर और बुलडोजर चलवा कर सबूत नष्ट करवाए गए, पूरे मामलों को दबाने का कुत्सित प्रयास सरकार के इशारे पर किया जा रहा है।

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