BJP में शामिल हुए सांसद राजिंदर गुप्ता पर मान सरकार का एक्शन, हाईकोर्ट ने दी बड़ी राहत
चंडीगढ़
पंजाब एवं हरियाणा हाईकोर्ट ने राजिंदर गुप्ता को बड़ी राहत देते हुए उनकी कंपनी ट्राइडेंट ग्रुप के खिलाफ फिलहाल किसी भी तरह की कठोर कार्रवाई पर रोक लगा दी है. अदालत ने पंजाब प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड को निर्देश दिया कि कंपनी को पहले कथित कमियों को दूर करने का अवसर दिया जाए, उसके बाद ही आगे की कार्रवाई पर विचार किया जाए. राज्यसभा सांसद राजिंदर गुप्ता हाल ही में आम आदमी पार्टी छोड़कर भाजपा में शामिल हुए थे. ऐसे में इस मामले ने राजनीतिक रंग भी पकड़ लिया है।
मामला ट्राइडेंट ग्रुप की बरनाला स्थित यूनिट से जुड़ा है. कंपनी ने हाईकोर्ट में याचिका दाखिल कर पंजाब प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड की ओर से की गई रेड और कार्रवाई को चुनौती दी थी. कंपनी की ओर से आरोप लगाया गया कि बोर्ड ने दुर्भावनापूर्ण तरीके से और राजनीतिक द्वेष की भावना के तहत कार्रवाई की. याचिका में कहा गया कि बोर्ड ने बिना पर्याप्त आधार के कंपनी को निशाना बनाया और कार्रवाई के दौरान तय नियमों का भी पालन नहीं किया गया।
राजिंदर गुप्ता की ट्राइडेंट ग्रुप की बरनाला स्थित फैक्ट्री पर 7 दिन पहले पीपीसीबी ने रेड की थी, जिसके खिलाफ उन्होंने पंजाब एवं हरियाणा हाईकोर्ट में याचिका दायर की थी। हाईकोर्ट ने इस पूरे मामले की सुनवाई की और अब ये आदेश जारी किए हैं। राजिंदर गुप्ता की सिक्योरिटी हटाने को लेकर अभी कोर्ट ने कोई फैसला नहीं दिया है। इस पर भी आज ही कुछ देर बाद फैसला आ सकता है।
उधर, आम आदमी पार्टी से भाजपा में शामिल हुए राज्यसभा सांसद संदीप पाठक ने पंजाब एवं हरियाणा हाईकोर्ट में याचिका दायर कर पंजाब सरकार द्वारा उनके खिलाफ दर्ज केस की कॉपी मांगी है।
संदीप पाठक की याचिका पर हाईकोर्ट में आज सुनवाई होगी। पाठक ने अपनी याचिका में हाईकोर्ट से अपील की है कि उन्हें यह बताया जाए कि पंजाब सरकार ने उनके खिलाफ दो केस कहां रजिस्टर किए और उनमें कौन सी धाराएं लगाई गई।
इस मामले की सुनवाई चीफ जस्टिस और जस्टिस संजीव बेरी की खंडपीठ ने की. सुनवाई के दौरान अदालत ने PPCB से पूछा कि क्या कंपनी की ओर से ऐसा कोई गंभीर पर्यावरणीय खतरा पैदा हुआ था, जिससे तत्काल कठोर कार्रवाई जरूरी हो जाए. अदालत ने अपने आदेश में कहा कि बोर्ड यह साबित करने में असफल रहा कि ट्राइडेंट ग्रुप की गतिविधियों से किसी नाले, कुएं, जमीन या पर्यावरण को जहरीले अपशिष्टों के जरिए प्रदूषित किए जाने जैसी कोई आपात स्थिति उत्पन्न हुई थी।
हाईकोर्ट ने कहा कि अगर कंपनी में कोई छोटी खामियां या तकनीकी कमियां हैं, तो बोर्ड पहले उन्हें सुधारने के लिए 30 दिन का उचित समय दे. अदालत ने साफ किया कि सुधार का मौका दिए बिना सीधे कठोर कार्रवाई करना उचित नहीं माना जा सकता. कोर्ट ने यह भी कहा कि यदि भविष्य में कंपनी के खिलाफ कोई सख्त कदम उठाया जाता है, तो ट्राइडेंट ग्रुप को नेशनल ग्रीन ट्रिब्यूनल यानी एनजीटी जाने की पूरी स्वतंत्रता होगी. इन निर्देशों के साथ हाईकोर्ट ने मामले का निपटारा कर दिया. अदालत के इस फैसले को ट्राइडेंट ग्रुप और राजिंदर गुप्ता के लिए बड़ी कानूनी राहत माना जा रहा है।
याचिका में पाठक ने क्या कहा…
FIR कहां दर्ज हुई, इसकी जानकारी मांगीः संदीप पाठक ने याचिका में लिखा है कि पिछले कुछ दिनों मीडिया में अचानक खबरें आई कि पंजाब सरकार ने उनके खिलाफ दो FIR गैरजमानती धाराओं में दर्ज की हैं। उन्हें पंजाब सरकार व पुलिस ने अभी तक नहीं बताया कि एफआईआर कहां और किन धाराओं में दर्ज हुई हैं।
मैंने कोई गलत काम नहीं कियाः दो दिन बाद संदीप पाठक सामने आए और उन्होंने कहा कि उन्हें पता ही नहीं है कि उनके खिलाफ कहां पर पर्चा दर्ज हुआ है। पाठक ने कहा था कि उन्होंने ऐसा कोई काम नहीं किया है, जिसकी वजह से उनके खिलाफ एफआईआर हो। संदीप पाठक दिल्ली स्थित अपने घर में थे और जब उन्हें यह सूचना मिली तो वो घर के पिछले दरवाजे से निकल गए थे, ताकि पंजाब पुलिस उन्हें गिरफ्तार न कर सके।
AAP सरकार के खिलाफ खोला था मोर्चा
FIR की सूचना से भाजपा समेत तमाम विरोधी दलों ने आप सरकार के खिलाफ मोर्चा खोल दिया था। आम आदमी पार्टी के नेताओं और मुख्यमंत्री ने भी यहां तक कह दिया था कि, जिसने गलत काम किए होंगे उनके खिलाफ तो कार्रवाई होगी ही।
मुख्यमंत्री के इस तरह के बयान के बाद पाठक को लगा कि पंजाब पुलिस ने उनके खिलाफ एफआईआर दर्ज कर दी है, लेकिन पुलिस उन्हें बता नहीं रही है। इस वजह से उन्होंने अब पंजाब एवं हरियाणा हाईकोर्ट में याचिका दायर की है।