रूस से तेल खरीद पर अमेरिका फिर नरम, क्या भारत में सस्ता होगा पेट्रोल-डीजल?
नई दिल्ली
दुनियाभर में युद्ध की वजह से उपजे तेल संकट के बीच एक राहत की खबर सामने आई है। अमेरिका ने रूसी तेल की खरीद के लिए एक बार फिर छूट देने का ऐलान किया है। भारत को भी इसका फायदा मिल सकता है। इससे पहले अमेरिकी वित्त मंत्रालय ने रूसी तेल की खरीद के लिए 30 दिनों के लिए टेंपररी छूट देने का ऐलान किया है।
अमेरिकी वित्त मंत्री स्कॉट बेसेंट ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर इसकी घोषणा की। उन्होंने कहा है कि छूट सिर्फ उन रूसी तेल कार्गो पर ही लागू होगी जो पहले से ही जहाजों पर लोड हो चुके हैं और समंदर में खड़े हैं। उन्होंने कहा है कि इसके तहत रूस के साथ कोई नया तेल सौदा या नए एक्सपोर्ट की इज्जत नहीं होगी।
वहीं बेसेंट ने यह भी कहा कि इस कदम का एक उद्देश्य यह भी है कि चीन संकट का फायदा उठाकर रूस से भारी डिस्काउंट पर तेल का स्टॉक न जमा कर सके और यह तेल उन देशों तक पहुंचे जिन्हें तुरंत ऊर्जा की जरूरत है। गौरतलब है कि हालिया युद्ध के बाद यह तीसरी बार है जब अमेरिका ने जनरल लाइसेंस के जरिए समुद्र में फंसे जहाजों को रास्ता साफ करने की मोहलत दी है।
भारत को कैसे होगा फायदा?
बता दें कि भारत अपनी जरूरत का 85 फीसदी से अधिक कच्चा तेल आयात करता है। हालांकि अमेरिका और ईरान के बीच बीते फरवरी महीने में शुरू हुए युद्ध के बाद से सप्लाई चेन ठप पड़ गया है। तेल आपूर्ति के लिए अहम रास्ता, स्ट्रेट ऑफ होर्मुज से जहाजों की आवाजाही बंद है और इससे तेल और LPG जैसे ईंधन की आपूर्ति बुरी तरह प्रभावित हुई है। इसकी वजह से भारत समेत कई देशों में ईंधन संकट पैदा हुआ है और कीमतें आसमान छू रही हैं। ऐसे में अमेरिकी छूट का फायदा भारत को निश्चित रूप से होगा।
इस 30 दिनों की मोहलत के बाद भारतीय रिफाइनरियां समुद्र में फंसे उन रूसी जहाजों से बिना किसी अमेरिकी प्रतिबंध के साए में तेल आयात कर सकेंगी। इससे देश में तेल की सप्लाई चेन दुरुस्त होगी। इससे घरेलू रिफाइनरियों को वैश्विक ऊर्जा लागत में बढ़ोतरी से निपटने में भी मदद मिली। बता दें कि दुनिया का तीसरा सबसे बड़ा कच्चा तेल आयातक भारत, पहले ही कम कीमतों का लाभ उठाने के लिए रूस से तेल खरीद में तेजी से वृद्धि कर चुका है। इससे पहले मार्च 2026 में भारत ने रूस से रिकॉर्ड 22.5 लाख बैरल प्रति दिन कच्चे तेल का आयात किया था।
खरीदते रहेंगे कच्चा तेल- भारत
इससे पहले भारत ने सोमवार को स्पष्ट किया है कि वह अमेरिकी प्रतिबंधों में छूट मिले या न, रूस से तेल खरीदता रहा है और आगे भी खरीदता रहेगा। पेट्रोलियम मंत्रालय में संयुक्त सचिव सुजाता शर्मा ने एक बयान में कहा, "रूस पर अमेरिकी छूट के संबंध में मैं यह स्पष्ट करना चाहती हूं कि हम पहले भी रूस से तेल खरीदते रहे हैं। छूट से पहले भी, छूट के दौरान भी और अब भी खरीदते रहेंगे।" उन्होंने कहा कि भारत के कच्चे तेल खरीदने के फैसले मुख्य रूप से व्यावसायिक दृष्टिकोण और आपूर्ति की उपलब्धता पर आधारित होते हैं। उन्होंने यह भी कहा कि कच्चे तेल की कोई कमी नहीं है और समझौतों के तहत पर्याप्त आपूर्ति सुनिश्चित की गई है।