पंजाब निकाय चुनाव में सियासी महासंग्राम, 105 निकायों के रण से तय होगी दलों की असली ताकत
चंडीगढ़
पंजाब में 26 मई को होने वाले निकाय चुनाव सूबे में सियासी दलों की नब्ज टटोलेंगे। 105 नगर निकायों (नगर निगम, नगर परिषद व नगर पंचायत) के यह चुनाव पंजाब के कुल 117 में से 90 विधानसभा क्षेत्रों को प्रभावित करेंगे। इन हलकों के शहरी इलाकों के मतदाताओं पर किस दल की कितनी पकड़ है, चुनाव परिणाम के बाद यह तय हो जाएगा।
दरअसल, सभी राजनीतिक दल इन निकाय चुनावों को विधानसभा चुनाव से पहले सत्ता के सेमीफाइनल के तौर पर देखते हुए मैदान में उतरेंगे और जीत के लिए पूरी ताकत झोंकेंगे, क्योंकि आठ महीने बाद पंजाब में विधानसभा चुनाव होने हैं। ये चुनाव सभी दलों के लिए इसलिए अहम हैं, क्योंकि ये चुनाव सीधे तौर पर एक करोड़ से अधिक शहरी मतदाताओं और 90 हलकों की सियासत पर केंद्रित हैं।
नामांकन प्रक्रिया खत्म
चुनावी प्रक्रिया के तहत नामांकन प्रक्रिया खत्म हो चुकी है और अब दलों के जो मतदाता मैदान में हैं, उन्हें जितवाने के लिए पार्टी के रणनीतिकारों ने अपना काम शुरू कर दिया है। इस दौरान पिछले चुनावों की समीक्षा की जा रही है, तो वहीं वार्डवार मुद्दों की जमीन भी तैयार की जा रही है, क्योंकि कुछ कॉमन मुद्दों के साथ-साथ हर वार्ड के अलग-अलग मुद्दों पर चुनाव लड़ा जाना है। हालांकि भाजपा और आप अपनी केंद्र व प्रदेश स्तरीय नीतियों व एजेंडे को भी आगे रखेंगी, वहीं कांग्रेस और शिअद के निशाने पर आप सरकार रहेगी।
सूबे में शहरी मतदाता अहम क्यों
पंजाब में राजनीतिक दलों के लिए शहरी वोटर बहुत अहम माने जाते हैं, खासकर उन सियासी दलों के लिए जिनकी सियासत पंथक एजेंडे से ऊपर सूबे के विकास के इर्द-गिर्द घूमती है। भाजपा इन चुनावों को इसलिए खासा गंभीरता से ले रही है, क्योंकि अधिकतर गैर-सिख आबादी शहरों में ही बसती है, जिसे पंजाब में भाजपा अपनी ताकत मानती है। हालांकि भाजपा ने पिछले दिनों कुछ सिख व पंथक नेताओं को पार्टी में शामिल कर अपना फोकस सिख वोटरों पर भी बढ़ाया है, लेकिन पार्टी का मुख्य सियासी केंद्र गैर-सिख वोटर ही हैं। इसी तरह पंथक पार्टी शिरोमणि अकाली दल (शिअद) की स्थिति ग्रामीण सिख वोटरों के बीच ठीक है। आम आदमी पार्टी (आप) और कांग्रेस की बात करें तो ये दोनों दल शहरों और ग्रामीण इलाकों में अपनी अच्छी पैठ रखते हैं। आप इस वक्त सत्तारूढ़ है, जबकि कांग्रेस विभिन्न धड़ों में बंटी हुई है।
मतदाताओं का आशीर्वाद बढ़ाएगा मनोबल
निकाय चुनाव में यह बात तो जाहिर है कि जिस दल को मतदाता जीत का आशीर्वाद देंगे, आगामी विधानसभा चुनाव के मद्देनजर उसका मनोबल बढ़ेगा। आप के लिए परिणाम यह भी तय करेंगे कि कहीं प्रदेश में सत्ता विरोधी लहर तो नहीं है, जबकि भाजपा को यह मालूम चल जाएगा कि पंजाब जीतने के लिए उनके प्रयासों और पार्टी की रणनीति को कितनी मजबूती मिली है। कांग्रेस यदि धड़ेबाजी में बंटी रही तो यह चुनाव पार्टी को एक और सबक देंगे, जबकि शिअद को इस बात का आभास हो जाएगा कि शहरी और गैर-सिख मतदाताओं में उनकी पहुंच कितनी है।