July 10, 2026

ब्रह्मोस से आकाश तक! दुनिया में बढ़ी भारतीय हथियारों की धाक, इन स्वदेशी मिसाइलों की विदेशों में जबरदस्त मांग

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 नई दिल्ली

भारत अब डिफेंस सेक्टर में सिर्फ खरीदार नहीं बल्कि विश्व स्तर पर सप्लायर के रूप में उभर रहा है. ब्रह्मोस, अस्त्र, आकाश और आकाशतीर जैसे स्वदेशी हथियार अब विदेशी देशों की पहली पसंद बन रहे हैं. इन हथियारों का युद्धक्षेत्र में सफल प्रदर्शन, विश्वसनीयता और लागत प्रभावी होने की वजह से कई देश इनकी ओर आकर्षित हो रहे हैं. भारत का डिफेंस एक्सपोर्ट पिछले कुछ सालों में तेजी से बढ़ा है. इन हथियारों ने इसमें बहुत बड़ी भूमिका निभाई है। 

ब्रह्मोस: दुनिया की सबसे तेज सुपरसोनिक क्रूज मिसाइल
ब्रह्मोस भारत और रूस का ज्वाइंट प्रोजेक्ट है. यह विश्व की सबसे तेज सुपरसोनिक क्रूज मिसाइल है जो समुद्र, जमीन और हवा से लॉन्च की जा सकती है. फिलीपींस पहले विदेशी खरीदार के रूप में ब्रह्मोस को खरीद चुका है, जहां यह तटीय सुरक्षा के लिए तैनात है. हाल ही में वियतनाम और इंडोनेशिया ने भी ब्रह्मोस की खरीद के लिए समझौते किए हैं। 

वियतनाम के साथ सौदा करीब 700 मिलियन डॉलर का बताया जा रहा है, जबकि इंडोनेशिया ने भी सैकड़ों मिलियन डॉलर का ऑर्डर दिया है. UAE, थाईलैंड, सऊदी अरब, ब्राजील और चिली जैसे देश भी ब्रह्मोस में रुचि दिखा रहे हैं. इस मिसाइल की गति और सटीकता इसे दुश्मन के लिए खतरनाक बनाती है। 

अस्त्र: स्वदेशी बीवीआर एयर-टू-एयर मिसाइल
अस्त्र मिसाइल DRDO द्वारा विकसित की गई स्वदेशी बियॉन्ड विजुअल रेंज (BVRAAM) एयर-टू-एयर मिसाइल है. यह Su-30 MKI जैसे फाइटर जेट्स पर आसानी से फिट होती है. हाल ही में इंडोनेशिया ने अस्त्र मिसाइल खरीदने का फैसला किया है, जो भारत के लिए बड़ा ब्रेकथ्रू है। 

ब्राजील अपने ग्रिपेन फाइटर जेट्स के लिए और आर्मेनिया Su-30 के लिए अस्त्र में दिलचस्पी दिखा चुका है. वियतनाम, मलेशिया, अल्जीरिया और अन्य कई देश भी इस मिसाइल को खरीदने पर विचार कर रहे हैं. अस्त्र की लंबी रेंज, आधुनिक सर्च और ट्रैक रडार तथा इलेक्ट्रॉनिक काउंटरमेजर्स से लैस होने के कारण यह विदेशी बाजार में लोकप्रिय हो रही है। 

आकाश: सतह से हवा में मार करने वाली मिसाइल सिस्टम
आकाश सर्फेस-टू-एयर मिसाइल सिस्टम (SAM) भारतीय सेना की एयर डिफेंस का मजबूत स्तंभ है. यह 25 किलोमीटर तक दुश्मन के विमान, हेलीकॉप्टर और ड्रोन को मार गिराने में सक्षम है. आर्मेनिया पहले ही आकाश सिस्टम खरीद चुका है, जो भारत का सफल एक्सपोर्ट ऑर्डर है। 

फिलीपींस भी 200 मिलियन डॉलर से ज्यादा के सौदे के लिए बातचीत कर रहा है. वियतनाम, UAE, मलेशिया और मिस्र जैसे देश आकाश में गहरी रुचि दिखा रहे हैं. इसकी मोबाइल क्षमता, रडार सिस्टम और बहु-टारगेट एंगेजमेंट की क्षमता इसे आकर्षक बनाती है। 

आकाशतीर: एयर डिफेंस का कमांड और कंट्रोल सिस्टम
आकाशतीर (Akashteer) भारत का स्वदेशी AI आधारित एयर डिफेंस कमांड एंड कंट्रोल सिस्टम है. यह BEL द्वारा विकसित किया गया है. कई रडार तथा हथियारों को जोड़कर एकीकृत एयर डिफेंस बनाता है। 

UAE समेत कई देश इस सिस्टम में रुचि दिखा रहे हैं क्योंकि यह आधुनिक खतरों (ड्रोन, मिसाइल स्वार्म) से निपटने में बेहद प्रभावी है. हाल के ऑपरेशन सिंदूर ने आकाशतीर की साख और बढ़ा दी है। 

विदेशी देशों में बढ़ती मांग के कारण
भारत के इन हथियारों की मांग बढ़ने के कई कारण हैं. सबसे बड़ा कारण इनका युद्ध में सिद्ध प्रदर्शन है. साथ ही ये हथियार विश्वसनीय, लागत प्रभावी और आसानी से मेंटेनेंस किए जा सकते हैं।  

कई देश रूस और पश्चिमी हथियारों पर निर्भरता कम करना चाहते हैं. भारत उन्हें विश्वसनीय विकल्प दे रहा है. भारत की आत्मनिर्भर भारत पहल और मजबूत डिप्लोमेसी ने भी इन एक्सपोर्ट्स को बढ़ावा दिया है। 

विशेषज्ञों का मानना है कि आने वाले वर्षों में भारत का डिफेंस एक्सपोर्ट और बढ़ेगा. ब्रह्मोस, अस्त्र, आकाश और आकाशतीर जैसे सिस्टम न सिर्फ राजस्व बढ़ाएंगे बल्कि भारत को वैश्विक डिफेंस प्लेयर के रूप में स्थापित करेंगे. इंडोनेशिया, वियतनाम और फिलीपींस जैसे देशों के साथ मजबूत साझेदारी भारत की इंडो-पैसिफिक रणनीति को भी मजबूत करेगी। 

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