July 14, 2026

पंजाब में फीस रेगुलेशन ऑर्डिनेंस-2026 लागू, निजी स्कूलों की मनमानी पर सरकार की सख्ती

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चंडीगढ़ 
पंजाब सरकार ने निजी स्कूलों की मनमानी फीस वृद्धि पर रोक लगाने के लिए पंजाब गैर सहायता प्राप्त शैक्षणिक संस्थानों की फीस विनियमन (संशोधन) अध्यादेश, 2026 लागू कर दिया है। मंत्रिमंडल की मंजूरी के बाद राज्यपाल ने अध्यादेश को स्वीकृति दे दी है। इसके साथ ही शिक्षा विभाग ने एक ऑनलाइन पोर्टल भी शुरू कर दिया है, जिस पर सभी निजी स्कूलों को पिछले चार वर्षों की फीस का पूरा ब्योरा अपलोड करना होगा।

सरकार के अनुसार, यदि किसी स्कूल ने निर्धारित सीमा से अधिक फीस बढ़ाई है तो उसकी समीक्षा की जाएगी। पिछले तीन वर्षों में पांच प्रतिशत से अधिक वार्षिक या कुल 15 प्रतिशत से अधिक फीस वृद्धि करने वाले स्कूलों को अतिरिक्त वसूली गई राशि एक महीने के भीतर अभिभावकों को लौटानी होगी। मुख्यमंत्री ने कहा कि शिक्षा को किसी भी कीमत पर व्यवसाय नहीं बनने दिया जाएगा। फीस वृदि्ध की शिकायतों की जांच संबंधित जिले के डीसी की ओर से की जाएगी।  

32 लाख छात्रों को मिलेगी राहत
सीएम भगवंत मान ने बताया कि पंजाब के
7,800 निजी स्कूलों में पढ़ने वाले 32 लाख से अधिक विद्यार्थियों को बड़ी राहत मिलेगी। सभी निजी स्कूलों को अगले 10 दिनों के भीतर पोर्टल पर पिछले 4 वर्षों की फीस का विवरण अपलोड करना होगा। छात्रों से वसूले जाने वाले ट्रांसपोर्टेशन, बिल्डिंग और अन्य सभी शुल्क ट्यूशन फीस का हिस्सा माने जाएंगे। नियमों का उल्लंघन करने वाले स्कूलों को पहली बार 50,000 रुपये, दूसरी बार 1 लाख रुपये जुर्माना और तीसरी बार मान्यता रद्द होगी। उपायुक्त की अध्यक्षता वाली रेगुलेटरी कमेटी फीस वृद्धि की जांच करेगी।

स्कूलों को लौटानी होगी एक्स्ट्रा फीस
प्रेस कॉन्फ्रेंस के दौरान मुख्यमंत्री भगवंत सिंह मान ने राज्य सरकार द्वारा लाए गए इस ऑर्डिनेंस को अपनी स्वीकृति देने के लिए राज्यपाल का धन्यवाद किया और कहा कि यह आज से ही लागू हो गया है। आज से हर निजी शैक्षणिक संस्थान को पिछले चार वर्षों के दौरान एकत्रित की गई फीस का पूरा विवरण 10 दिनों के भीतर पोर्टल पर अपलोड करना होगा। उन्होंने कहा कि जैसे ही यह अवधि समाप्त होगी, यदि कोई संस्थान विद्यार्थियों से अतिरिक्त फीस वसूलने में शामिल पाया गया तो उसे वसूली गई अतिरिक्त राशि अभिभावकों को वापस करनी होगी।

स्कूलों की होगी फोरेंसिक ऑडिट
सीएम मान ने कहा कि पिछली सरकारों ने निजी शैक्षणिक संस्थानों को विद्यार्थियों और अभिभावकों पर अनावश्यक फीस थोपने की छूट दी हुई थी, जिससे शिक्षा प्रणाली को भारी नुकसान पहुंचा। सुप्रीम कोर्ट के दिशा-निर्देशों का हवाला देते हुए उन्होंने कहा कि शैक्षणिक संस्थान विभिन्न खातों के माध्यम से फीस एकत्र करके शिक्षा के नाम पर मुनाफा नहीं कमा सकते। उन्होंने कहा कि इन संस्थानों द्वारा किसी भी माध्यम से एकत्रित की गई वास्तविक फीस का पता लगाने के लिए एक फोरेंसिक ऑडिट करवाया जाएगा। निजी अन-एडेड स्कूलों द्वारा फीस में मनमाने ढंग से की जाने वाली बढ़ोतरी पर पूरी तरह रोक लगाने के लिए पंजाब सरकार ने 'पंजाब रेगुलेशन ऑफ फीस ऑफ अन-एडेड एजुकेशनल इंस्टीट्यूशंस (संशोधन) ऑर्डिनेंस, 2026' अधिसूचित किया है।

5 फीसदी ज्यादा बढ़ोतरी संभव नहीं
ऑर्डिनेंस के मुख्य प्रावधानों पर प्रकाश डालते हुए मुख्यमंत्री भगवंत सिंह मान ने कहा कि अब वार्षिक फीस वृद्धि की सीमा 5 प्रतिशत निर्धारित की गई है और इस सीमा से अधिक वृद्धि करने के लिए रेगुलेटरी प्राधिकरण से पहले अनुमति लेनी होगी। उन्होंने कहा कि जिन निजी स्कूलों ने पिछले 3 वर्षों के दौरान कुल मिलाकर अपनी फीस में 15 प्रतिशत से अधिक की बढ़ोतरी की है, उन्हें अभिभावकों से वसूली गई अतिरिक्त राशि वापस करनी होगी। यह फैसला जहां निजी स्कूलों की फीस को नियंत्रित करेगा वहीं पारदर्शिता और जवाबदेही को लागू करके 32 लाख से अधिक विद्यार्थियों और उनके परिवारों को अनुचित वित्तीय बोझ से बचाएगा।

इस कदम को एक ऐतिहासिक सुधार करार देते हुए मुख्यमंत्री ने कहा कि यह पंजाब सरकार द्वारा शिक्षा क्षेत्र में मुनाफाखोरी को रोकने और यह सुनिश्चित करने के लिए एक निर्णायक कदम है कि निजी स्कूल व्यावसायिक लाभ के बजाय विद्यार्थियों और अभिभावकों के हित में काम करें। उन्होंने कहा कि शिक्षा एक नेक और पवित्र कार्य है। यह एक जनकल्याण का साधन है, न कि मुनाफे के लिए इस्तेमाल किया जाने वाला कोई व्यावसायिक उद्यम। पंजाब के हर विद्यार्थी के लिए मानक शिक्षा तक पहुंच सुनिश्चित करना हमारी सरकार की सबसे प्रमुख प्राथमिकता है।

अभी पंजाब में लगभग 7,800 निजी स्कूलों में 32 लाख से अधिक विद्यार्थी पढ़ रहे हैं और यह ऑर्डिनेंस खासकर उन विद्यार्थियों के हितों की रक्षा के लिए तैयार किया गया है। यह ऑर्डिनेंस निजी शैक्षणिक संस्थानों के कामकाज में पूरी पारदर्शिता सुनिश्चित करने के साथ-साथ विद्यार्थियों और उनके परिवारों को फीस में मनमानी बढ़ोतरी के खिलाफ मजबूत सुरक्षा प्रदान करता है। हमारी सरकार के सुहृद प्रयासों के कारण पंजाब शिक्षा क्षेत्र में केरल से भी आगे निकल गया है।

भगवंत मान, सीएम, पंजाब

नियम तोड़न वाले स्कूलों पर जुर्माना
इस नियम को लागू करने की प्रक्रिया के बारे में बताते हुए मुख्यमंत्री ने कहा कि ऑर्डिनेंस की पूरी पालना सुनिश्चित करने के लिए कड़े दंड शामिल किए गए हैं। ऑर्डिनेंस के नियमों का उल्लंघन करने वाले किसी भी निजी स्कूल को पहली उल्लंघन के लिए 50,000 रुपये और दूसरी उल्लंघन के लिए 1 लाख रुपये जुर्माना देना होगा। तीसरी बार उल्लंघन करने पर विद्यार्थियों के हितों की रक्षा के लिए और कड़ी कार्रवाई के साथ-साथ स्कूल की मान्यता रद्द कर दी जाएगी। उन्होंने आगे स्पष्ट किया कि अभिभावकों से वसूली जाने वाली हर राशि को रेगुलेशन के उद्देश्य के लिए फीस का हिस्सा ही माना जाएगा। उन्होंने बताया कि अभिभावकों से लिया गया कोई भी पैसा, चाहे उसका विवरण कुछ भी हो, उसे फीस ही माना जाएगा और निजी स्कूलों द्वारा पिछले तीन वर्षों के दौरान वसूली गई कोई भी अतिरिक्त फीस अभिभावकों को वापस करनी होगी।

छात्रों से सारी वसूली फीस में ही शामिल
शिक्षा क्षेत्र में सुधार के लिए अपनी सरकार की प्रतिबद्धता को दोहराते हुए मुख्यमंत्री ने कहा कि पंजाब सरकार ने प्रदेश में चल रहे हर अपवित्र गठजोड़ को पहले ही समाप्त कर दिया है और शिक्षा माफिया को भी किसी भी कीमत पर पनपने नहीं दिया जाएगा। उन्होंने कहा कि विद्यार्थियों से वसूले जाने वाले सभी शुल्क, जिसमें ट्रांसपोर्टेशन शुल्क, बिल्डिंग फंड और अन्य फुटकर फीस शामिल हैं, को रेगुलेटरी उद्देश्यों के लिए ट्यूशन फीस का हिस्सा माना जाएगा। सीएम भगवंत सिंह मान ने कहा कि पंजाब सरकार शिक्षा को कभी भी व्यावसायिक उद्यम नहीं बनने देगी। उन्होंने आगे कहा कि उपायुक्त की अध्यक्षता वाली जिला रेगुलेटरी कमेटी फीस वृद्धि के सभी प्रस्तावों की जांच और नियंत्रण करेगी।

निजी स्कूलों की मनमानी रुकेगी : कंग
आम आदमी पार्टी के सांसद मालविंदर सिंह कंग ने कहा कि द पंजाब रेगुलेशन ऑफ फीस ऑफ अनएडेड एजुकेशनल इंस्टीट्यूशन्स (अमेंडमेंट) ऑर्डिनेंस-2026 से निजी स्कूलों की मनमानी फीस बढ़ोतरी पर रोक लगेगी। उन्होंने इसे अभिभावकों और विद्यार्थियों की बड़ी जीत बताया। कंग ने कहा कि वर्षों से गैर सहायता प्राप्त निजी स्कूल मनमाने ढंग से फीस बढ़ाकर शिक्षा को कारोबार बना रहे थे और अभिभावकों का शोषण कर रहे थे। अब इस पर प्रभावी रोक लगेगी।   

फीस बढ़ाने नए नियम क्या हैं

    नए कानून के तहत अब हर प्राइवेट स्कूल के लिए फीस तय करने का एक साफ और स्पष्ट नियम होगा.
    कोई भी स्कूल अपनी मर्जी से फीस नहीं वसूल कर सकेगा.
    अब कोई भी प्राइवेट स्कूल सालभर में 5% से ज्यादा फीस नहीं बढ़ा पाएगा.
    सभी स्कूलों को अपने पिछले 4 साल की फीस का पूरा रिकॉर्ड अगले 10 दिनों के भीतर शिक्षा विभाग के आधिकारिक पोर्टल पर अपलोड करना होगा.
    वहीं, जिन स्कूलों ने पिछले 3 साल में कुल मिलाकर 15% से ज्यादा फीस वसूली है, उन्हें वह एक्स्ट्रा पैसा  अभिभावकों को वापस लौटाना होगा.

डीसी करेंगे निगरानी
प्राइवेट स्कूलों की मनमानी को रोकने और इस नियम को सख्ती से लागू करने के लिए जिला स्तर पर निगरानी रखी जाएगी. जिला कलेक्टर यानी DC की अध्यक्षता में बनी रेगुलेटरी कमेटी स्कूलों द्वारा की जाने वाली फीस वृद्धि की बारीकी से जांच करेगी। 

अभिभावकों को लौटाने होंगे पैसे- सीएम मान
मुख्यमंत्री भगवंत मान ने राज्य सरकार द्वारा लाए गए इस ऑर्डिनेंस को अपनी स्वीकृति देने के लिए राज्यपाल का धन्यवाद किया और कहा कि यह आज से ही लागू हो गया है. "आज से हर निजी शैक्षणिक संस्थान को पिछले चार वर्षों के दौरान एकत्रित की गई फीस का पूरा विवरण 10 दिनों के भीतर पोर्टल पर अपलोड करना होगा. उन्होंने कहा कि जैसे ही यह अवधि समाप्त होगी, यदि कोई संस्थान विद्यार्थियों से अतिरिक्त फीस वसूलने में शामिल पाया गया तो उसे वसूली गई अतिरिक्त राशि अभिभावकों को वापस करनी होगी। 

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