July 16, 2026

जगन्नाथ रथ यात्रा 2026: रस्सी खींचने से जुड़ी धार्मिक मान्यताएं और महत्व

0
38-15.jpg

 भगवान जगन्नाथ की विश्व प्रसिद्ध रथ यात्रा 16 जुलाई 2026 से आरंभ होकर 24 जुलाई 2026 को बहुदा यात्रा (घर वापसी) के साथ संपन्न हो रही है. भगवान जगन्नाथ की रथ यात्रा केवल एक धार्मिक आयोजन नहीं, बल्कि आस्था, समर्पण और भक्ति का एक महासागर है.  हर साल आषाढ़ मास के शुक्ल पक्ष की द्वितीया तिथि को ओडिशा के पुरी में निकलने वाली यह यात्रा विश्व भर के श्रद्धालुओं को अपनी ओर आकर्षित करती है. इस यात्रा में शामिल होने और भगवान के रथ की रस्सियों को खींचने का अपना एक विशिष्ट आध्यात्मिक और धार्मिक महत्व है.

क्यों शुभ माना जाता है रथ की रस्सी खींचना?
धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, भगवान जगन्नाथ के रथ को खींचने वाली रस्सी को शंखचूड़ का प्रतीक माना जाता है.  पुराणों में इस बात का जिक्र मिलता है कि जो भी श्रद्धालु रथ की रस्सी को छूता है या उसे खींचता है, उसके जीवन के समस्त पाप नष्ट हो जाते हैं.  इसे साक्षात् मोक्ष का द्वार माना गया है.  ऐसी मान्यता है कि रथ को खींचने वाला व्यक्ति सीधे प्रभु के चरणों में स्थान पाता है और जन्म-मरण के चक्र से मुक्ति की ओर अग्रसर होता है.

आध्यात्मिक महत्व और पौराणिक कथाएं
रथ यात्रा के पीछे कई कथाएं जुड़ी हैं. कहा जाता है कि भगवान जगन्नाथ, अपने भाई बलभद्र और बहन सुभद्रा के साथ अपनी मौसी के घर (गुंडिचा मंदिर) जाते हैं.  इस यात्रा के दौरान भगवान स्वयं भक्तों के बीच आते हैं, ताकि जो लोग मंदिर के गर्भगृह तक नहीं पहुंच पाते, वे भी प्रभु के दर्शन का लाभ उठा सकें. रथ की रस्सी को खींचना एक तरह से स्वयं को प्रभु के रथ का सारथी बनाने जैसा है.  जिस तरह अर्जुन का सारथी स्वयं श्रीकृष्ण बने थे, उसी प्रकार रथ खींचने वाले श्रद्धालु इस प्रक्रिया के माध्यम से प्रभु से सीधा जुड़ाव महसूस करते हैं.

क्या है रस्सी खींचने की महिमा?
पापों का नाश: रथ खींचना केवल एक शारीरिक क्रिया नहीं है, बल्कि यह अहंकार के परित्याग का प्रतीक है. रस्सी पकड़ते ही भक्त का सारा अहंकार प्रभु के चरणों में समर्पित हो जाता है, जिससे उसके पिछले जन्मों के पाप धुल जाते हैं.

मोक्ष की प्राप्ति: मान्यता है कि जो व्यक्ति रथ की रस्सी को स्पर्श करता है या उसे खींचता है, वह वैकुंठ लोक का अधिकारी बनता है.

समानता का भाव: जगन्नाथ पुरी की रथ यात्रा जाति-पाति और ऊंच-नीच के भेदों को मिटाती है. यहां राजा हो या रंक, सभी एक ही रस्सी को थामकर अपने आराध्य को खींचते हैं.  यह प्रेम और समरसता का सबसे बड़ा उदाहरण है.

भक्ति का महाकुंभ
रथ यात्रा के दौरान जय जगन्नाथ  के उद्घोष से पूरा वातावरण गूंज उठता है.  जब विशाल रथ को लाखों हाथ एक साथ खींचते हैं, तो वह दृश्य अलौकिक होता है.  यह श्रद्धा का वह अद्भुत क्षण है जहाँ भक्त और भगवान के बीच कोई दूरी नहीं रहती. अंत में, यह यात्रा हमें संदेश देती है कि जीवन रूपी रथ की डोर यदि प्रभु के हाथों में हो, तो संसार का हर कठिन रास्ता सुगम हो जाता है.

इस साल भी जगन्नाथ रथ यात्रा की भव्यता और रस्सियों को खींचने का सौभाग्य प्राप्त करने के लिए लाखों श्रद्धालु पुरी की ओर रुख करेंगे, जो उनके प्रति अटूट विश्वास का प्रमाण है.

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *