सिर्फ 1-2 किमी जमीन बनी रुकावट! पंजाब में 35 हाईवे प्रोजेक्ट अटके, करोड़ों की सड़क योजनाएं लटकीं
चंडीगढ़
पंजाब में राष्ट्रीय राजमार्गों और एक्सप्रेस-वे का नेटवर्क मजबूत करने की केंद्र सरकार की महत्वाकांक्षी योजना छोटे-छोटे अवरोधों में उलझ गई है। कई परियोजनाओं में अधिकांश निर्माण कार्य पूरा होने के बावजूद एक-दो किलोमीटर भूमि अधिग्रहण, किसानों के विरोध, वन मंजूरी और उपयोगिता सेवाओं के स्थानांतरण जैसी बाधाओं के कारण पूरा प्रोजेक्ट लटक गया है।
यही वजह है कि राज्य में चल रही 35 राष्ट्रीय राजमार्ग एवं एक्सप्रेस-वे परियोजनाएं निर्धारित समयसीमा से पीछे चल रही हैं। यह जानकारी केंद्रीय सड़क परिवहन एवं राजमार्ग मंत्री नितिन गडकरी ने राज्यसभा में सांसद तरुण चुग के सवाल के लिखित जवाब में दी।
केंद्रीय मंत्री ने स्वीकार किया कि पंजाब में सड़क परियोजनाओं की धीमी रफ्तार के पीछे सबसे बड़ी वजह भूमि अधिग्रहण से जुड़े विवाद हैं। कई स्थानों पर किसानों के विरोध, मुआवजे को लेकर असहमति, वन विभाग की मंजूरियों में देरी और बिजली, पानी व दूरसंचार जैसी उपयोगिता सेवाओं को दूसरी जगह स्थानांतरित करने का काम समय पर पूरा नहीं हो पाया। इसका सीधा असर परियोजनाओं की समयसीमा पर पड़ा है।
परियोजनाओं में रुकावट से पहुंचा नुकसान
सबसे अहम बात यह है कि कई परियोजनाओं में अधिकांश हिस्से का निर्माण पूरा होने के बावजूद छोटे-छोटे हिस्सों में जमीन उपलब्ध नहीं होने से पूरा कॉरिडोर शुरू नहीं किया जा सका। सड़क परियोजनाओं में निर्माण की निरंतरता जरूरी होती है। यदि बीच में एक-दो किलोमीटर का हिस्सा भी अधूरा रह जाए तो पूरी सड़क का संचालन संभव नहीं हो पाता।
यही कारण है कि सीमित दूरी की बाधा पूरे प्रोजेक्ट को महीनों, बल्कि कई मामलों में वर्षों तक पीछे धकेल देती है। मंत्रालय के अनुसार प्रभावित परियोजनाओं में दिल्ली-कटरा एक्सप्रेस-वे और जामनगर-अमृतसर इकोनॉमिक कॉरिडोर जैसी राष्ट्रीय महत्व की परियोजनाएं भी शामिल हैं। इन परियोजनाओं के पूरा होने से पंजाब की देश के प्रमुख औद्योगिक और आर्थिक गलियारों से बेहतर कनेक्टिविटी होगी।
परियोजनाओं के समाधान के प्रयास
इससे माल ढुलाई की लागत कम होगी और यात्रा का समय भी घटेगा। लेकिन लंबित भूमि अधिग्रहण और स्थानीय स्तर की बाधाओं ने इन परियोजनाओं की रफ्तार पर असर डाला है।
राज्यसभा में दिए जवाब के अनुसार मंत्रालय परियोजना-वार निगरानी कर रहा है। इसमें भूमि अधिग्रहण की स्थिति, स्थानीय और वन मंजूरियां, उपयोगिता सेवाओं के स्थानांतरण, स्वीकृत लागत, जारी धनराशि, अब तक हुए व्यय और निर्माण की भौतिक प्रगति की नियमित समीक्षा की जा रही है। जिन परियोजनाओं में बाधाएं हैं, वहां संबंधित एजेंसियों और राज्य सरकार के साथ समन्वय बनाकर समाधान निकालने का प्रयास किया जा रहा है।
पंजाब की तरक्की का नया रास्ता खुलेगा
विशेषज्ञों का मानना है कि किसी भी ग्रीनफील्ड एक्सप्रेस-वे या राष्ट्रीय राजमार्ग परियोजना में अंतिम कुछ किलोमीटर का काम अटकने से पूरे प्रोजेक्ट की उपयोगिता प्रभावित हो जाती है। इससे निर्माण लागत बढ़ती है, ठेकेदारों पर अतिरिक्त वित्तीय बोझ पड़ता है और लोगों को परियोजना का लाभ मिलने में भी देरी होती है।
अब निगाह इस बात पर है कि केंद्र और राज्य सरकार मिलकर भूमि अधिग्रहण, स्थानीय विवाद और अन्य प्रशासनिक अड़चनों को कितनी तेजी से दूर कर पाते हैं। क्योंकि इन 35 परियोजनाओं के पूरा होने पर पंजाब की सड़क संपर्क व्यवस्था में बड़ा बदलाव आने के साथ उद्योग, व्यापार और निवेश को भी नई गति मिलने की उम्मीद है।
