August 1, 2026

ED का शिकंजा: हरियाणा के रहेजा डेवलपर्स की ₹782 करोड़ की संपत्ति अटैच

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गुरुग्राम.

प्रवर्तन निदेशालय (ईडी) ने धन शोधन मामले में बड़ी कार्रवाई करते हुए रियल एस्टेट कंपनी रहेजा डेवलपर्स लिमिटेड की करीब 782.36 करोड़ रुपये की अचल संपत्तियों को अस्थायी रूप से कुर्क किया है। इस कार्रवाई के साथ ही इस मामले में अब तक कुर्क की गई संपत्तियों का कुल मूल्य बढ़कर करीब 2399.65 करोड़ रुपये हो गया है।

इसे देश में होमबायर्स के पैसे के कथित दुरुपयोग से जुड़े सबसे बड़े मामलों में से एक माना जा रहा है। ईडी की दिल्ली जोनल ऑफिस ने यह कार्रवाई धन शोधन अधिनियम (पीएमएलए) के तहत की है। जांच रहेजा डेवलपर्स लिमिटेड, उसके निदेशक नवीन एम रहेजा और अन्य संबंधित लोगों के विरुद्ध की जा रही है।

एफआईआर के आधार पर जांच शुरू
यह जांच आर्थिक अपराध शाखा में दर्ज कई एफआईआर के आधार पर शुरू हुई थी। ये शिकायतें उन होमबायर्स ने दर्ज कराई थीं जिन्होंने कंपनी की विभिन्न आवासीय परियोजनाओं में निवेश किया था।

हजारों खरीदारों को घर मिलने का इंतजार
ईडी के अनुसार, रहेजा डेवलपर्स ने अपनी विभिन्न हाउसिंग परियोजनाओं के लिए करीब 4600 खरीदारों से लगभग 2425.99 करोड़ रुपये जुटाए थे। जांच एजेंसी का आरोप है कि इन पैसों का बड़ा हिस्सा परियोजनाओं के निर्माण और उन्हें पूरा करने में खर्च करने के बजाय दूसरी जगह इस्तेमाल किया गया। इसके कारण हजारों खरीदार आज भी अपने घर मिलने का इंतजार कर रहे हैं।

कुल 2399.65 करोड़ की संपत्ति कुर्क
इस साल इस मामले में यह ईडी की तीसरी बड़ी अटैचमेंट है। इससे पहले अप्रैल में एजेंसी ने 1113.81 करोड़ रुपये और जून में 503.48 करोड़ रुपये की संपत्तियां कुर्क की थीं। अब 782.36 करोड़ रुपये की नई कार्रवाई के बाद कुल कुर्क संपत्तियों का मूल्य करीब 2399.65 करोड़ रुपये पहुंच गया है। ईडी ने फिलहाल यह जानकारी नहीं दी है कि इस बार किन संपत्तियों को कुर्क किया गया है और वे कहां स्थित हैं। पीएमएलए के तहत इस तरह की अस्थायी कुर्की का उद्देश्य जांच पूरी होने तक उन संपत्तियों की बिक्री या हस्तांतरण को रोकना होता है, जिन्हें अपराध से अर्जित आय से जुड़ा माना जाता है।

न्याय की मांग कर रहे लोग
एनसीआर के रियल एस्टेट सेक्टर में होमबायर्स के धन के कथित दुरुपयोग से जुड़े मामलों में यह जांच सबसे महत्वपूर्ण मानी जा रही है। लंबे समय से परियोजनाएं पूरी नहीं होने के कारण हजारों खरीदार कानूनी और नियामकीय मंचों पर न्याय की मांग कर रहे हैं।

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