ईज ऑफ डुईंग बिजनेस: निवेशकर्ताओं के लिए छत्तीसगढ़ की ऐतिहासिक पहल : विशेष आलेख : दीपेंद्र दीवान, संपादक
ईज ऑफ डुईंग बिजनेस: निवेशकर्ताओं के लिए छत्तीसगढ़ की ऐतिहासिक पहल
विशेष आलेख : दीपेंद्र दीवान,संपादक
सरल प्रक्रियाएं, त्वरित अनुमतियां और डिजिटल पारदर्शिता से बनता नया औद्योगिक छत्तीसगढ़
छत्तीसगढ़ की पहचान लंबे समय से देश के प्रमुख खनिज और औद्योगिक राज्यों में रही है। कोयला, लौह अयस्क, बिजली, वन एवं कृषि आधारित संसाधनों की प्रचुरता ने राज्य को औद्योगिक विकास की मजबूत आधारभूमि दी है। अब छत्तीसगढ़ इसी प्राकृतिक और औद्योगिक क्षमता को निवेश के अनुकूल वातावरण, सुशासन और ईज ऑफ डुईंग बिजनेस से नई गति देने की दिशा में आगे बढ़ रहा है।
ईज़ ऑफ डूइंग बिज़नेस को सर्वाेच्च प्राथमिकता
मुख्यमंत्री विष्णु देव साय की सरकार ने ईज़ ऑफ डूइंग बिज़नेस को सर्वाेच्च प्राथमिकता दी है। 150 से अधिक सेवाओं वाला नया सिंगल विंडो सिस्टम, निवेशकों के लिए एआई आधारित वाणी प्रणाली, 500 से अधिक प्रशासनिक सुधार तथा प्रक्रियाओं का सरलीकरण निवेशकों के लिए बेहतर माहौल तैयार कर रहा है। औद्योगिक विकास का लाभ प्रदेश के प्रत्येक क्षेत्र तक पहुंचे, इसके लिए राज्य में 23 नए औद्योगिक क्षेत्र विकसित किए गए तथा 15 जिलों में 26 नए औद्योगिक कार्य स्वीकृत किए गए हैं। सरोरा में प्लास्टिक पार्क और नवा रायपुर में टेक्सटाइल, फार्मा एवं रेडीमेड गारमेंट पार्क जैसे प्रयास औद्योगिक आधार को और मजबूत बना रहे हैं।
सरकार का लक्ष्य अधिक से अधिक रोजगार सृजित करना और निवेश को तेजी से धरातल पर उतारना
हाल ही में विजन 2047 औद्योगिक विकास की संभावनाएं विषयक चर्चा में उद्योगमंत्री लखन लाल देवांगन ने स्पष्ट किया कि सरकार का लक्ष्य अधिक से अधिक रोजगार सृजित करना और निवेश को तेजी से धरातल पर उतारना है, ताकि स्थानीय युवाओं को अधिकतम अवसर मिल सकें। आने वाले वर्षों के लिए सरकार निर्यात नीति, स्टार्टअप एवं नवाचार नीति, कौशल विकास, इंटर्नशिप, एमएसएमई सशक्तिकरण और बस्तर-सरगुजा जैसे क्षेत्रों में औद्योगिक विस्तार पर विशेष ध्यान दे रही है। राज्य सरकार का उद्देश्य स्पष्ट है, प्रदेश के युवाओं को रोजगार मांगने वाला नहीं, बल्कि रोजगार देने वाला उद्यमी बनाना है।
छत्तीसगढ़ के इंडस्ट्रियल इकोसिस्टम और बिज़नेस-फ्रेंडली माहौल में निवेशकों के बढ़ते भरोसे
राज्य में नई औद्योगिक नीति लागू होने के बाद पिछले 18 महीनों में 8 लाख करोड़ रुपए से ज्यादा के निवेश का वादा मिला है, जिससे अलग-अलग सेक्टर में 1.6 लाख से ज़्यादा रोज़गार के अवसर पैदा होने की संभावना है। टेक्सटाइल और कपड़ों के अलावा, राज्य ने डेटा सेंटर, आईटी, फार्मास्यूटिकल्स, सेमीकंडक्टर और इलेक्ट्रिकल व इलेक्ट्रॉनिक्स मैन्युफैक्चरिंग में भी बड़े निवेश आकर्षित किए हैं। यह छत्तीसगढ़ के इंडस्ट्रियल इकोसिस्टम और बिज़नेस-फ्रेंडली माहौल में निवेशकों के बढ़ते भरोसे को दिखाता है।
नवा रायपुर में आधुनिक टेक्सटाइल पार्क की स्थापना
राज्य में वस्त्र एवं परिधान उद्योग को प्रोत्साहित करने नवा रायपुर में आधुनिक टेक्सटाइल पार्क की स्थापना की जा रही है। इसके 81 एकड़ क्षेत्र में 2758 वर्गमीटर से लेकर 38 हजार 180 वर्गमीटर आकार के भूखंड उपलब्ध हैं। टेक्सटाइल, गारमेंट एवं परिधान उद्योग, तकनीकी वस्त्र तथा इनके सहायक एवं पूरक उद्योगों की स्थापना के लिए निवेशकों को यहां सुविधाएं उपलब्ध कराई जा रही हैं।
प्रदेश आज उद्योगों की नई उड़ान भरने के लिए पूरी तरह तैयार
विजन 2047 की दिशा में छत्तीसगढ़ का यह औद्योगिक अभियान केवल आर्थिक विकास की कहानी नहीं, बल्कि एक ऐसे भविष्य का निर्माण है जहां निवेश, नवाचार, रोजगार और समावेशी विकास मिलकर आत्मनिर्भर, विकसित और समृद्ध छत्तीसगढ़ की मजबूत नींव रख रहे हैं। मुख्यमंत्री विष्णु देव साय के नेतृत्व और उद्योग मंत्री श्री लखन लाल देवांगन के प्रयासों से प्रदेश आज उद्योगों की नई उड़ान भरने के लिए पूरी तरह तैयार है।
औद्योगिक विकास नीति 2024-30 में निवेश-अनुकूल वातावरण तैयार करना, प्रशासनिक प्रक्रियाओं को सरल बनाना, ऑनलाइन अनुमतियों को बढ़ावा देना और राज्य को निवेश का आकर्षक केंद्र बनाना प्रमुख उद्देश्यों में शामिल किया गया है। यह नीति 1 नवंबर 2024 से 31 मार्च 2030 तक प्रभावी है।
कागजी प्रक्रियाओं से डिजिटल व्यवस्था की ओर
किसी भी निवेशक के लिए उद्योग स्थापित करने की प्रक्रिया में समय, अनुमतियां और विभिन्न विभागों से समन्वय महत्वपूर्ण विषय होते हैं। छत्तीसगढ़ ने इन प्रक्रियाओं को सरल बनाने के लिए OneClick Single Window System को विकसित किया है। इसके माध्यम से पंजीयन, अनुमतियां, भूमि आवंटन, प्रोत्साहन, आवेदन की स्थिति और प्रमाण-पत्र जैसी सेवाओं को एकीकृत डिजिटल मंच पर उपलब्ध कराया गया है।
राज्य के OneClick पोर्टल पर 10 विभागों से संबंधित 132 अनुमतियों तक पहुंच उपलब्ध कराई गई है। इसका उद्देश्य निवेशक को अलग-अलग कार्यालयों के चक्कर लगाने के बजाय एकीकृत प्रणाली के माध्यम से आवश्यक सेवाएं उपलब्ध कराना है।
यह बदलाव केवल तकनीकी सुविधा नहीं है, बल्कि शासन की कार्यप्रणाली में परिवर्तन का संकेत है—जहां निवेशक का समय और व्यवसाय की गति दोनों महत्वपूर्ण माने जा रहे हैं।
समयबद्ध सेवाओं से बढ़ा भरोसा
ईज ऑफ डुईंग बिजनेस की वास्तविक कसौटी केवल ऑनलाइन पोर्टल नहीं, बल्कि सेवाओं की समयबद्धता है। छत्तीसगढ़ में औद्योगिक भूमि आवंटन के लिए 45 दिन की समय-सीमा निर्धारित है। औद्योगिक क्षेत्रों में जल कनेक्शन के लिए 14 दिन की समय-सीमा का प्रावधान है। बिजली कनेक्शन की प्रक्रिया को भी ऑनलाइन किया गया है और निर्धारित परिस्थितियों में कनेक्शन जारी करने की समय-सीमा सात दिन तक रखी गई है।
ऐसी व्यवस्थाएं निवेशक के लिए परियोजना की समय-सीमा को अधिक स्पष्ट बनाती हैं। उद्योग जगत के लिए समय ही पूंजी है और किसी परियोजना की शुरुआत में होने वाली देरी सीधे उसकी लागत और प्रतिस्पर्धात्मकता को प्रभावित कर सकती है।
निरीक्षण व्यवस्था में पारदर्शिता
उद्योगों के लिए नियामकीय निरीक्षण आवश्यक हैं, लेकिन अनावश्यक और दोहराव वाले निरीक्षण व्यवसाय की लागत तथा समय दोनों बढ़ा सकते हैं। इसे ध्यान में रखते हुए राज्य में Central Inspection System, जोखिम आधारित निरीक्षण और निरीक्षकों के रैंडम आवंटन जैसी व्यवस्थाएं लागू की गई हैं।
निरीक्षण रिपोर्ट प्रस्तुत करने के लिए 48 घंटे की समय-सीमा तथा डिजिटल निगरानी जैसी व्यवस्थाएं प्रशासनिक पारदर्शिता को बढ़ाने की दिशा में महत्वपूर्ण कदम हैं।
भूमि से लेकर पर्यावरण तक सरल प्रक्रियाएं
निवेश की शुरुआत में भूमि और आवश्यक अनुमतियां सबसे महत्वपूर्ण विषयों में से हैं। छत्तीसगढ़ ने GIS आधारित भूमि आवंटन प्रणाली को औद्योगिक भूमि प्रबंधन से जोड़ा है। डिजिटल भूमि अभिलेख और ऑनलाइन सेवाओं के माध्यम से निवेशकों के लिए प्रक्रिया को अधिक सुविधाजनक बनाया जा रहा है।
पर्यावरणीय अनुमतियों में भी ऑनलाइन Consent Management System, जोखिम आधारित व्यवस्थाएं तथा कुछ श्रेणियों में स्व-प्रमाणीकरण और ऑटो-रिन्यूअल जैसी व्यवस्थाएं लागू की गई हैं। इससे नियामकीय अनुपालन और उद्योग संचालन के बीच बेहतर संतुलन बनाने का प्रयास दिखाई देता है।
निवेश के लिए नई औद्योगिक नीति का आधार
छत्तीसगढ़ औद्योगिक विकास नीति 2024-30 केवल पारंपरिक उद्योगों तक सीमित नहीं है। इसमें कृषि एवं खाद्य प्रसंस्करण, फार्मास्यूटिकल्स, टेक्सटाइल, इलेक्ट्रॉनिक्स, आईटी, एआई एवं रोबोटिक्स, रक्षा, ऑटोमोबाइल एवं इंजीनियरिंग जैसे उभरते क्षेत्रों पर भी ध्यान दिया गया है।
इसका महत्व इसलिए भी बढ़ जाता है क्योंकि छत्तीसगढ़ की औद्योगिक अर्थव्यवस्था अब केवल खनिज आधारित उद्योगों तक सीमित रहने के बजाय वैल्यू एडिशन और विविधीकरण की ओर बढ़ रही है।
राज्य की निवेश नीति में सूक्ष्म, लघु एवं मध्यम उद्यमों के साथ-साथ बड़े उद्योगों के लिए भी अलग-अलग प्रोत्साहन प्रावधान हैं। नए उद्योगों के साथ विस्तार, विविधीकरण, आधुनिकीकरण और तकनीकी उन्नयन करने वाली मौजूदा इकाइयों को भी औद्योगिक निवेश प्रोत्साहन देने का प्रावधान किया गया है।
नए क्षेत्रों की ओर बढ़ता छत्तीसगढ़
छत्तीसगढ़ के पास खनिज संसाधनों की ताकत तो पहले से है, लेकिन भविष्य का औद्योगिक विकास केवल पारंपरिक क्षेत्रों से संभव नहीं होगा। इसी दृष्टि से राज्य ने फार्मा एवं मेडिकल डिवाइस, एग्रो एवं फूड प्रोसेसिंग, आईटी-आईटीईएस एवं डेटा सेंटर, एआई एवं रोबोटिक्स, टेक्सटाइल, इलेक्ट्रिकल एवं इलेक्ट्रॉनिक्स, रक्षा एवं एयरोस्पेस, ग्लोबल कैपेबिलिटी सेंटर, ऑटोमोबाइल एवं इंजीनियरिंग तथा पर्यटन जैसे क्षेत्रों को फोकस सेक्टर के रूप में सामने रखा है।
इससे निवेशकों के लिए राज्य में अवसरों का दायरा व्यापक होता है और स्थानीय संसाधनों के साथ आधुनिक तकनीक एवं नई अर्थव्यवस्था के क्षेत्रों को जोड़ने की संभावनाएं मजबूत होती हैं।
रोजगार और स्थानीय अर्थव्यवस्था को मिलेगा लाभ
किसी भी निवेश नीति की सफलता केवल निवेश राशि से नहीं मापी जाती। वास्तविक सफलता तब होती है जब निवेश से स्थानीय स्तर पर रोजगार, कौशल विकास, सहायक उद्योग, सेवाओं और व्यापार के नए अवसर पैदा हों।
औद्योगिक विकास नीति में स्थानीय रोजगार, कौशल विकास और समावेशी औद्योगिक विकास पर भी जोर दिया गया है। पिछड़े क्षेत्रों में औद्योगिक गतिविधियों को प्रोत्साहित करने तथा विकासखंडों में संतुलित औद्योगिक विस्तार की दिशा में प्रावधान किए गए हैं।
यानी लक्ष्य केवल बड़े निवेश को आकर्षित करना नहीं, बल्कि निवेश का लाभ प्रदेश के अलग-अलग क्षेत्रों और समाज के व्यापक वर्गों तक पहुंचाना भी है।
‘बिजनेस मेड ईजी’ से ‘ग्रोथ मेड ईजी’ की ओर
छत्तीसगढ़ की ईज ऑफ डुईंग बिजनेस पहल का सबसे महत्वपूर्ण पक्ष यह है कि इसे केवल सरकारी प्रक्रिया सुधार के रूप में नहीं देखा जा रहा। OneClick, डिजिटल भूमि प्रबंधन, ऑनलाइन अनुमतियां, समयबद्ध सेवाएं, निवेश प्रोत्साहन और क्षेत्र-विशिष्ट औद्योगिक नीतियां मिलकर एक व्यापक कारोबारी पारिस्थितिकी तंत्र तैयार कर रही हैं।
आज निवेशक के लिए सवाल केवल यह नहीं है कि किसी राज्य में संसाधन कितने हैं, बल्कि यह भी है कि वहां व्यवसाय शुरू करना कितना आसान है, निर्णय कितनी तेजी से होते हैं, अनुमतियां कितनी पारदर्शी हैं और सरकार निवेश के बाद कितनी सहजता से साथ खड़ी रहती है।
इसी सोच के साथ छत्तीसगढ़ की नई औद्योगिक दिशा महत्वपूर्ण हो जाती है।
भविष्य की संभावनाएं
छत्तीसगढ़ के पास प्राकृतिक संसाधन, ऊर्जा, औद्योगिक आधार, भौगोलिक स्थिति और बड़ी कार्यशील आबादी जैसी महत्वपूर्ण ताकतें हैं। अब इन ताकतों को डिजिटल शासन, बेहतर लॉजिस्टिक्स, कौशल विकास, आधुनिक तकनीक और निवेश-अनुकूल नीतियों से जोड़ने की जरूरत है।
राज्य की औद्योगिक विकास नीति 2024-30 इसी व्यापक परिवर्तन का एक महत्वपूर्ण आधार है। आने वाले वर्षों में यदि नीति का प्रभावी क्रियान्वयन, अधोसंरचना का विस्तार और विभागीय समन्वय इसी गति से आगे बढ़ता है, तो छत्तीसगढ़ देश के उन राज्यों में अपनी स्थिति और मजबूत कर सकता है जहां निवेश करना, उद्योग स्थापित करना और व्यवसाय को आगे बढ़ाना अपेक्षाकृत सरल और पारदर्शी हो।
ईज ऑफ डुईंग बिजनेस छत्तीसगढ़ के लिए केवल एक प्रशासनिक सुधार नहीं, बल्कि आर्थिक परिवर्तन की आधारशिला बनता दिखाई दे रहा है। खनिज संपदा से समृद्ध राज्य अब निवेश, नवाचार, तकनीक और उद्यमिता की नई पहचान गढ़ने की दिशा में आगे बढ़ रहा है। यही बदलाव आने वाले समय में छत्तीसगढ़ को एक ऐसे औद्योगिक गंतव्य के रूप में स्थापित कर सकता है, जहां निवेशक को केवल अवसर ही नहीं, बल्कि सरल व्यवस्था, पारदर्शी शासन और विकास का भरोसा भी मिले।

