हरियाणा में 3 चुनावी हार के बाद कांग्रेस का मास्टर प्लान तैयार, 6 महीने में बदलेगी रणनीति
चंडीगढ़
हरियाणा में लगातार तीसरी बार सत्ता से बाहर रहने के बाद कांग्रेस संगठन में नई जान फूंकने के लिए पार्टी प्रभारी संजय सतीशचंद्र दत्त ने अगले छह महीने का रोडमैप तैयार कर लिया है।
रणनीति साफ है—पहले संगठन को सक्रिय करना, फिर कार्यकर्ताओं को प्रशिक्षित करना और इसके बाद सरकार बनाने के लक्ष्य के साथ मैदान में उतरना। इसके लिए हर ब्लाक और जिले में अधिवेशन होंगे और उसके बाद तीन महीने तक प्रशिक्षण कार्यक्रम चलाए जाएंगे।
संजय दत्त अब तक हरियाणा के तीन चरणों में दौरे कर चुके हैं और चौथे चरण का दौरा 17 से 21 अगस्त तक प्रस्तावित है। इस दौरान वे पंचकूला में हरियाणा कौशल रोजगार निगम को बंद करने की मांग को लेकर होने वाले धरने में शामिल होंगे।
इसके साथ ही एसआइआर अभियान में कथित अनियमितताओं को लेकर मुख्य निर्वाचन अधिकारी ए. श्रीनिवास से चंडीगढ़ में मुलाकात करेंगे। इसी दिन कांग्रेस की राज्य स्तरीय एसआइआर निगरानी समिति की बैठक होगी।
संजय दत्त ने अब तक के दौरों की रिपोर्ट हाईकमान को भेज दी है। उनकी रिपोर्ट का निष्कर्ष है कि कांग्रेस कार्यकर्ताओं में सरकार बनाने की इच्छा और उत्साह मौजूद है, लेकिन उन कार्यकर्ताओं में फिर से ऊर्जा भरने की जरूरत है जिनमें इच्छा शक्ति कमजोर हुई है और सक्रियता में कमी आई है।
उनकी रिपोर्ट का सार ही यह है कि कुछ कार्यकर्ताओं में इच्छा है तो शक्ति नहीं है और कुछ में शक्ति है तो इच्छा नहीं है। ऐसे में इन दोनों के बीच संतुलन बैठाना होगा।
गुटबाजी के बीच दो बार नेताओं को एक मंच पर लाकर दिखाया असर
हरियाणा कांग्रेस की सबसे बड़ी चुनौती लंबे समय से चली आ रही गुटबाजी रही है। संजय दत्त अब तक पार्टी के अलग-अलग खेमों के नेताओं को दो बार एक मंच पर ला चुके हैं। 16 राज्यों में अलग-अलग भूमिकाओं में संगठनात्मक काम कर चुके दत्त के सामने अब चुनौती इस एकजुटता को स्थायी संगठनात्मक ताकत में बदलने की है।
हाईकमान द्वारा नियुक्त चार पर्यवेक्षक डॉ. रघुवीरा रेड्डी, यशोमति ठाकुर, उमंग सिंगर और अजय कुमार लल्लू भी संगठनात्मक जिलों की समीक्षा करेंगे।
संजय दत्त ने स्पष्ट किया है कि पर्यवेक्षक किसी जिलाध्यक्ष को हटाने या नियुक्त करने के लिए नहीं, बल्कि सभी जिलों के संगठनात्मक कामकाज की समीक्षा के लिए आ रहे हैं। नगर निगम और नगर परिषद वाले जिलों में दो-दो जिलाध्यक्ष बनाए जाने से संगठनात्मक जिलों की संख्या बढ़ सकती है।
अधिवेशन के बाद प्रशिक्षण से चुनावी तैयारी को धार
कांग्रेस अगस्त के अंत तक सभी जिलाध्यक्षों और 90 विधानसभा क्षेत्रों की बैठकों की प्रक्रिया पूरी करने की तैयारी में है। इसके बाद सितंबर में सभी 180 ब्लाकों में अधिवेशन होंगे। अक्टूबर में जिला अधिवेशन आयोजित किए जाएंगे। नवंबर से लगातार तीन महीने प्रशिक्षण शिविर चलेंगे।
इनमें ब्लाक, जिला और विधानसभा स्तर के फीडबैक के आधार पर संगठन को मजबूत करने की रणनीति तैयार होगी। कांग्रेस के पहली पंक्ति के सभी नेताओं से कहा गया है कि वे अपनी सुविधा अनुसार अधिवेशनों में शामिल होने की तारीख दे दें।
छह महीने में कांग्रेस का संगठनात्मक कैलेंडर
अगस्त: सभी जिलाध्यक्षों और 90 विधानसभा क्षेत्रों की बैठकों की प्रक्रिया पूरी
सितंबर: 180 ब्लाकों में अधिवेशन
अक्टूबर: जिला अधिवेशन
नवंबर से: तीन माह के प्रशिक्षण शिविर
लक्ष्य: कार्यकर्ताओं में इच्छा और शक्ति पैदा कर सत्ता वापसी के लिए संगठन को तैयार करना।
