पंजाब में कैमरों का खौफ भी बेअसर! 41 लाख से ज्यादा चालान, फिर भी नहीं सुधरे वाहन चालक
चंडीगढ़
पंजाब में यातायात नियमों का उल्लंघन रोकने के लिए पुलिस की सख्ती लगातार बढ़ रही है। सड़कों पर निगरानी के लिए कैमरे लगाए गए हैं, ई-चालान व्यवस्था को मजबूत किया गया है और नियम तोड़ने वालों पर कार्रवाई की जा रही है। इसके बावजूद वाहन चालकों की आदत बदलती नजर नहीं आ रही।
जितनी सख्ती बढ़ी, उतनी ही तेजी से चालान भी बढ़ते गए। वर्ष 2026 में छह अगस्त तक प्रदेश में 41,37,775 ई-चालान जारी हो चुके हैं। यह वर्ष 2025 में पूरे साल हुए 20.46 लाख चालानों के दोगुने से भी ज्यादा हैं।
आंकड़े बताते हैं कि पंजाब की सड़कों पर पुलिस की नजर जरूर तेज हुई है, लेकिन लोगों में ट्रैफिक नियमों के प्रति जिम्मेदारी की भावना उस रफ्तार से नहीं बढ़ी। सवाल अब यह है कि जब चालान का डर भी वाहन चालकों की आदत नहीं बदल पा रहा तो आखिर वे कब सुधरेंगे?
कैमरे बढ़े तो कार्रवाई भी कई गुना बढ़ी
पंजाब में ई-चालान और कैमरा आधारित निगरानी का दायरा बढ़ने के साथ नियम तोड़ने वालों की पहचान आसान हुई है। बीते सालों में हुए चालानों की गिनती-
वर्ष 2021 में प्रदेश में 53,973 चालान जारी हुए थे।
2022 में 51,870 और 2023 में 72,790 चालान हुए।
वर्ष 2024 में यह संख्या बढ़कर करीब 3.98 लाख हो गई।
2025 में इसमें बड़ा उछाल आया और पूरे साल में 20.46 लाख चालान जारी किए गए।
2026 में छह अगस्त तक ही 41.38 लाख चालान काटे जा चुके हैं। यानी सात माह से भी कम समय में पिछले पूरे साल के मुकाबले दोगुने से अधिक कार्रवाई हो चुकी है।
चालान का डर खत्म!
चालान की बढ़ती संख्या का एक पहलू यह भी है कि तकनीक ने पुलिस की पकड़ मजबूत कर दी है। पहले सड़क पर पुलिसकर्मी की मौजूदगी ही कार्रवाई का मुख्य माध्यम थी, लेकिन अब कैमरे नियम तोड़ने वाले वाहन की पहचान कर लेते हैं। इसके बावजूद उल्लंघन जारी रहना बताता है कि कई वाहन चालक नियमों को गंभीरता से नहीं ले रहे।
लालबत्ती पार करना, निर्धारित गति से अधिक रफ्तार, गलत पार्किंग और अन्य नियमों की अनदेखी जैसे मामलों में चालान लगातार हो रहे हैं। इससे साफ है कि समस्या केवल निगरानी की नहीं, बल्कि व्यवहार में बदलाव की भी है।
चालान बढ़े, खजाने में पैसा घटा
दिलचस्प पहलू यह है कि चालान की संख्या बढ़ने के बावजूद सरकार को मिलने वाला राजस्व उसी अनुपात में नहीं बढ़ा। वर्ष 2025 में 20.46 लाख चालानों से 123.04 करोड़ रुपये मिले थे। इसके विपरीत 2026 में छह अगस्त तक 41.38 लाख चालान जारी होने के बावजूद सरकार को सिर्फ 49.02 करोड़ रुपये मिले हैं।
प्रति चालान औसत राजस्व भी लगातार घटा है। वर्ष 2024 में यह करीब 1370 रुपये, 2025 में 601 रुपये और 2026 में अब तक सिर्फ 118 रुपये रह गया है। इससे बड़ी संख्या में चालानों के लंबित रहने या उनकी वसूली न होने की स्थिति सामने आती है।
असली मकसद राजस्व नहीं, सड़क सुरक्षा
ट्रैफिक चालान का उद्देश्य सरकार की कमाई बढ़ाना नहीं, बल्कि वाहन चालकों को नियमों का पालन करने के लिए बाध्य करना और सड़क हादसों को रोकना है। इसलिए 41 लाख से ज्यादा चालान अपने आप में उपलब्धि नहीं माने जा सकते, यदि इसके बावजूद लोग बार-बार वही गलतियां दोहराते रहें।
अब जरूरत सिर्फ चालान काटने की संख्या बढ़ाने की नहीं, बल्कि बार-बार नियम तोड़ने वालों पर प्रभावी कार्रवाई और लोगों के व्यवहार में बदलाव लाने की है।
