रांची में खाद्य पदार्थों की गुणवत्ता पर सवाल, 14 में 9 सैंपल मानक से फेल
रांची
राजधानी में लोगों की थाली और गिलास तक पहुंच रहे खाद्य पदार्थों की गुणवत्ता पर गंभीर सवाल खड़े हो गए हैं। पिछले पांच माह में जिले के विभिन्न होटल, रेस्टोरेंट और दुकानों से लिए गए खाद्य पदार्थों के नमूनों की जांच में 54 में से नौ नमूने खाद्य सुरक्षा के निर्धारित मानकों पर खरे नहीं उतरे।
जांच में मुख्य रूप से डेयरी उत्पाद पनीर, खोवा, मिठाई और घी समेत अन्य खाद्य पदार्थ मानक में सही नहीं पाए गए हैं। होटलों से लिए गए पेयजल के नमूनों की गुणवत्ता को लेकर भी विभाग की ओर से जांच की जा रही है। इन सैंपलों में अधिकतर सैंपल खुले रूप से बिना ब्रांडेड पैकेट के बिकने वाले खाद्य सामग्री थे।
खाद्य सुरक्षा पदाधिकारी डा. पवन कुमार के अनुसार, पिछले पांच माह के दौरान जिले के अलग-अलग इलाकों में खाद्य प्रतिष्ठानों से नमूने लिए गए थे। इन्हें जांच के लिए राज्य खाद्य जांच प्रयोगशाला भेजा गया।
अब तक प्राप्त 14 जांच रिपोर्ट में नौ खाद्य उत्पाद सब-स्टैंडर्ड श्रेणी में पाए गए हैं। खाद्य सुरक्षा पदाधिकारी पवन कुमार ने बताया कि जिन खाद्य कारोबारियों के उत्पाद मानक के अनुरूप नहीं मिले हैं, उनके खिलाफ नियमानुसार कार्रवाई की जा रही है।
जिन स्थानों से सैंपल लिए गए उनमें राजधानी के धुर्वा, डोरंडा, रातू रोड, ओरमांझी, बूटी मोड़ जगह प्रमुख है, इसके अलावा जिले के विभिन्न क्षेत्रों में बुंडू तमाड़ आदि जगह शामिल है। इन जगहों के छोटे-बड़े होटलों से खाद्य पदार्थ व पानी के सैंपल जांच कि लिए लिए गए थे।
डेयरी उत्पादों पर सबसे बड़ा सवाल
जांच रिपोर्ट में मुख्य रूप से डेयरी उत्पादों के मानकों पर खरा नहीं उतरने की बात सामने आई है। पनीर, खोवा और घी जैसे खाद्य पदार्थ सीधे तौर पर रोजाना बड़ी संख्या में लोगों की थाली तक पहुंचते हैं।
ऐसे में इनकी गुणवत्ता में कमी मिलना खाद्य सुरक्षा व्यवस्था के लिए गंभीर मामला है। हालांकि, सब-स्टैंडर्ड पाए जाने का अर्थ स्वत यह नहीं है कि संबंधित खाद्य पदार्थ जहरीला है लेकिन यह स्वास्थ्य के लिए नुकसान सिद्ध हुआ है।
इसका मतलब है कि उत्पाद निर्धारित गुणवत्ता मानकों पर खरा नहीं उतरा। किसी खाद्य पदार्थ को असुरक्षित घोषित करने के लिए जांच में स्वास्थ्य पर प्रतिकूल प्रभाव डालने वाले तत्वों या अन्य निर्धारित मानकों के उल्लंघन का प्रमाण आवश्यक होता है।
क्या है सब-स्टैंडर्ड खाद्य पदार्थ, क्या है दंड
खाद्य सुरक्षा एवं मानक अधिनियम, 2006 के तहत निर्धारित गुणवत्ता मानकों को पूरा नहीं करने वाले खाद्य पदार्थ को सब-स्टैंडर्ड माना जाता है। अधिनियम की धारा 51 के तहत ऐसे खाद्य पदार्थ का निर्माण, भंडारण, बिक्री या वितरण करने पर पांच लाख रुपये तक का जुर्माना लगाया जा सकता है। मामले में कार्रवाई जांच रिपोर्ट के आधार पर होती है।
खाद्य सुरक्षा अधिकारी की ओर से रिपोर्ट मिलने के बाद सक्षम अधिकारी तय करता है कि मामला केवल आर्थिक दंड वाला है या उसमें अभियोजन की जरूरत है।
आर्थिक दंड वाले मामलों में खाद्य सुरक्षा अधिकारी की रिपोर्ट के आधार पर न्याय निर्णायक अधिकारी के समक्ष कार्रवाई की जाती है। संबंधित कारोबारी को अपना पक्ष रखने का अवसर भी दिया जाता है।
कार्रवाई केवल जुर्माने तक सीमित नहीं
खाद्य पदार्थ की प्रकृति और उल्लंघन के आधार पर कार्रवाई का स्वरूप अलग हो सकता है। गलत लेबलिंग के मामले में अधिनियम की धारा 52 के तहत तीन लाख रुपये तक का जुर्माना हो सकता है।
खाद्य सुरक्षा पदाधिकारी पवन कुमार ने बताया कि वहीं खाद्य पदार्थ की गुणवत्ता या प्रकृति उपभोक्ता की मांग के अनुरूप नहीं होने पर धारा 50 के तहत पांच लाख रुपये तक का जुर्माना लगाया जा सकता है।
यदि जांच में खाद्य पदार्थ असुरक्षित पाया जाता है और मामला गंभीर प्रकृति का है, तो अधिनियम के तहत इससे कहीं अधिक कड़ी कार्रवाई और सजा का प्रावधान है। इसलिए सब-स्टैंडर्ड और अनसेफ को एक ही श्रेणी मानना सही नहीं है।
14 में नौ रिपोर्ट खराब, अब आगे की कार्रवाई अहम
विभाग के अनुसार पांच माह में प्राप्त 14 रिपोर्ट में नौ नमूनों का मानक से नीचे मिलना खाद्य प्रतिष्ठानों की निगरानी बढ़ाने की जरूरत को सामने लाता है। खासकर डेयरी उत्पादों की बिक्री करने वाले प्रतिष्ठानों, होटल-रेस्टोरेंट और खाद्य दुकानों में नियमित नमूना संग्रह और जांच जरूरी है।
खाद्य सुरक्षा पदाधिकारी पवन कुमार ने बताया कि जिन कारोबारियों के खाद्य उत्पाद सब-स्टैंडर्ड पाए गए हैं, उनके खिलाफ कार्रवाई की प्रक्रिया शुरू कर दी गई है। अब यह देखना महत्वपूर्ण होगा कि संबंधित मामलों में कितने कारोबारियों पर जुर्माना लगाया जाता है और कितने मामलों में आगे की कानूनी कार्रवाई होती है।
उपभोक्ताओं के लिए भी सवाल
खाद्य पदार्थों की गुणवत्ता जांच की यह कार्रवाई केवल विभागीय आंकड़ा नहीं है। रांची में बड़ी संख्या में लोग होटल, रेस्टोरेंट और दुकानों से पनीर, मिठाई, खोवा, घी तथा अन्य तैयार खाद्य पदार्थ खरीदते हैं। ऐसे में खाद्य प्रतिष्ठानों की नियमित जांच और जांच रिपोर्ट के आधार पर त्वरित कार्रवाई उपभोक्ताओं के स्वास्थ्य की सुरक्षा के लिए जरूरी है।
क्या है चुनौती
खाद्य सुरक्षा एवं मानक प्राधिकरण के नियमों में खाद्य कारोबारियों के लाइसेंस, नमूना जांच, खाद्य मानक, प्रयोगशाला परीक्षण और कार्रवाई के लिए अलग-अलग प्रावधान हैं
अब विभाग के सामने चुनौती केवल नमूने लेने तक सीमित नहीं, बल्कि जांच में मानक से नीचे पाए गए उत्पादों के कारोबारियों पर प्रभावी कार्रवाई सुनिश्चित करने की भी है।
स्ट्रीट फूड वेंडर्स को दिया जाता रहा है खाद्य सुरक्षा का प्रशिक्षण
शहर के स्ट्रीट फूड वेंडर्स को सुरक्षित एवं गुणवत्तापूर्ण खाद्य सामग्री उपलब्ध कराने के उद्देश्य से दो दिवसीय खाद्य सुरक्षा प्रशिक्षण कार्यक्रम आयोजित किया जाता रहा है। प्रशिक्षण के दौरान स्वच्छता, भोजन तैयार करने और परोसने की सुरक्षित प्रक्रिया, खाद्य सामग्री का सही भंडारण, साफ पानी का उपयोग तथा व्यक्तिगत स्वच्छता के बारे में बताया जाता है।
वेंडर्स को एप्रन, ग्लव्स और हेयर गियर के अनिवार्य इस्तेमाल के प्रति भी जागरूक किया जाता है। अधिकारियों ने बताया कि असुरक्षित खाद्य पदार्थों से कई संक्रामक बीमारियां हो सकती हैं। इसलिए खाद्य कारोबारियों को निर्धारित मानकों का पालन करते हुए उपभोक्ताओं को सुरक्षित भोजन उपलब्ध कराने के लिए प्रशिक्षित किया जा रहा है।
