September 1, 2026

मोहन सरकार आज लेगी ₹3,600 करोड़ का नया कर्ज, राज्य पर कुल कर्ज ₹5.40 लाख करोड़ के पार

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भोपाल 

राज्य सरकार विकास और उत्पादक योजनाओं एवं परियोजनाओं के नाम पर आज एक बार फिर कुल ₹3,600 करोड़ का कर्ज लेने जा रही है। इसके लिए सरकार 1 सितंबर को भारतीय रिजर्व बैंक (RBI), मुंबई कार्यालय के माध्यम से दो अलग-अलग सरकारी सिक्योरिटी की नीलामी करेगी।

अब कर्ज का कुल आंकड़ा चालू वित्त वर्ष में 51400 करोड़ रुपए हो जाएगा। वहीं नए कर्ज के बाद राज्य सरकार पर कुल कर्ज बढ़कर 5 लाख 40 हजार 114 करोड़ रुपए हो जाएगा।

राज्य सरकार की ओर से अधिसूचना जारी कर दोनों कर्ज की अवधि, राशि, नीलामी और भुगतान की प्रक्रिया स्पष्ट की गई है। पहला कर्ज ₹1,600 करोड़ 18 साल के लिए होगा। नीलामी प्लेटफॉर्म RBI का Core Banking Solution (E-Kuber) होगा। इस राशि की ब्याज के साथ अदायगी सरकार जुलाई 2044 तक 7.61 प्रतिशत सालाना

ब्याज पर करेगी। ब्याज का हर साल भुगतान 8 जनवरी और 8 जुलाई को किया जाएगा।

दूसरा कर्ज ₹ 2,000 करोड़ रुपए का 30 साल के लिए लिया जा रहा है। इसकी मूलधन वापसी सितंबर 2056 तक नीलामी में तय होने वाली कट-ऑफ यील्ड ब्याज के जरिये की जाएगी। हर साल 2 मार्च और 2 सितंबर को ब्याज राशि का भुगतान होगा।

दोनों कर्ज की पूरी शर्तें
सरकार ने कर्ज की अवधि और ब्याज दर से जुड़ी जानकारी साफ कर दी है। पहला कर्ज 1600 करोड़ रुपए का होगा। यह कर्ज 18 साल के लिए लिया जाएगा। इसकी नीलामी RBI के कोर बैंकिंग सिस्टम यानी E-Kuber (Electronic Kuber) प्लेटफॉर्म से होगी।

सरकार इस राशि पर जुलाई 2044 तक 7.61 प्रतिशत सालाना ब्याज चुकाएगी। ब्याज का भुगतान हर साल 8 जनवरी और 8 जुलाई को किया जाएगा। दूसरा कर्ज 2000 करोड़ रुपए का होगा। यह कर्ज 30 साल के लिए लिया जा रहा है।

इसकी मूलधन वापसी सितंबर 2056 तक होगी। इस कर्ज पर ब्याज दर नीलामी में तय होने वाली कट-ऑफ यील्ड से तय होगी। इसका भुगतान हर साल 2 मार्च और 2 सितंबर को किया जाएगा।

किन लोगों से जुटाया जाएगा पैसा
सरकारी सिक्योरिटी की इस नीलामी में बैंक और वित्तीय संस्थान बोली लगा सकेंगे। इसके अलावा पात्र निवेशक भी इसमें हिस्सा ले सकते हैं। सरकार ने आम निवेशकों के लिए भी रास्ता खुला रखा है। इसके लिए नॉन-कॉम्पिटिटिव बिडिंग की व्यवस्था की गई है।

इस श्रेणी में पात्र लोगों और संस्थाओं को कुल राशि का 10 प्रतिशत तक सिक्योरिटी दी जा सकती है। हालांकि एक बोलीदाता को अधिकतम 1 प्रतिशत हिस्सा ही मिल सकेगा। सरकार को इस कर्ज की पूरी राशि का भुगतान 2 सितंबर 2026 को करना होगा।

इस साल अब तक कितना कर्ज लिया गया
यह इस वित्त वर्ष में सरकार का नया कर्ज नहीं है। इससे पहले भी सरकार कई बार कर्ज ले चुकी है। 18 अगस्त को सरकार ने दो अलग कर्ज लिए थे। इनमें 1400 करोड़ रुपए का कर्ज 7.58 प्रतिशत ब्याज पर लिया गया था। वहीं 1000 करोड़ रुपए का कर्ज 7.39 प्रतिशत ब्याज पर लिया गया था। इन दोनों कर्ज की अवधि क्रमशः 12 साल और 8 साल है।

इससे पहले 4 अगस्त को भी सरकार ने कर्ज लिया था। उस दिन 1600 करोड़ और 2000 करोड़ रुपए के दो कर्ज लिए गए थे। यानी अगस्त महीने में ही सरकार ने कई बार कर्ज उठाया है। आज होने वाली नीलामी के बाद इस वित्त वर्ष में लिए गए कुल कर्ज का आंकड़ा 51 हजार 400 करोड़ रुपए हो जाएगा।

कितना बढ़ जाएगा राज्य पर कुल कर्ज
राज्य सरकार पर पहले से भी भारी कर्ज है। 31 मार्च 2026 की स्थिति में सरकार पर चार लाख 88 हजार 714 करोड़ रुपए का कर्ज था। अब नए 3600 करोड़ रुपए के कर्ज के बाद यह आंकड़ा और बढ़ जाएगा। नए कर्ज के बाद राज्य सरकार पर कुल कर्ज पांच लाख 40 हजार 114 करोड़ रुपए हो जाएगा।

यह आंकड़ा दिखाता है कि सरकार पर कर्ज का बोझ लगातार बढ़ रहा है। हर महीने नई नीलामी के जरिए सरकार बाजार से पैसा जुटा रही है। यह पैसा विकास कार्यों और सरकारी योजनाओं में खर्च किया जाता है।

यह खबर क्यों जरूरी है
यह खबर आम जनता के लिए बेहद जरूरी है क्योंकि सरकारी कर्ज का सीधा असर राज्य की आर्थिक स्थिति पर पड़ता है। जब सरकार बार बार कर्ज लेती है तो जनता को इसकी जानकारी होना जरूरी है। संविधान हर नागरिक को सूचना का अधिकार देता है, इसलिए सरकारी खर्च और कर्ज से जुड़े आंकड़े पारदर्शी तरीके से सामने आने चाहिए।

कर्ज का बढ़ता आंकड़ा भविष्य में सरकारी योजनाओं और विकास कार्यों को प्रभावित कर सकता है। इसलिए वित्तीय पारदर्शिता और जवाबदेही लोकतंत्र के लिए जरूरी मानी जाती है। यह खबर पाठकों को राज्य की आर्थिक सेहत समझने में मदद करती है।

किससे लिया जाएगा कर्ज
यह कर्ज किसी एक बैंक से सीधे नहीं लिया जा रहा है। प्रदेश सरकार सरकारी सिक्योरिटीज बेचकर निवेशकों से पैसा जुटाएगी। इनकी नीलामी RBI के मुंबई कार्यालय से होगी। इसमें बैंक, वित्तीय संस्थान और पात्र निवेशक बोली लगा सकेंगे। इसके अलावा नॉन-कॉम्पिटिटिव बिडर्स के लिए भी सरकारी प्रतिभूतियों में हिस्सा लेने की व्यवस्था रखी गई है।

नॉन-कॉम्पिटिटिव श्रेणी में पात्र व्यक्तियों और संस्थाओं को कुल नोटिफाइड राशि के 10% तक सिक्योरिटीज आवंटित की जा सकती हैं, जबकि एकल बोलीदाता के लिए अधिकतम सीमा नोटिफाइड राशि की 1% रखी गई है। सरकार को कर्ज की राशि का भुगतान 2 सितंबर 2026 को भुगतान करना होगा।

18 अगस्त को लिया था 2400 करोड़ का कर्ज
इसके पहले मोहन सरकार ने 18 अगस्त को सिक्योरिटी की नीलामी के बाद 7.58% और 7.39% ब्याज दर पर 1,400 करोड़ और 1,000 करोड़ रुपए के दो कर्ज उठाए हैं। इन दोनों कर्ज की राशि पर सरकार जनवरी और जुलाई में छमाही आधार पर ब्याज का भुगतान करेगी।

दोनों कर्ज की अवधि क्रमशः 12 साल और 8 साल है। अगस्त महीने में ही 4 अगस्त को 1,600 करोड़ और 2,000 करोड़ रुपए के कुल 3,600 करोड़ रुपए कर्ज लिए गए थे। 31 मार्च 2026 की स्थिति में राज्य सरकार पर 4 लाख 88 हजार 714 करोड़ रुपए का कर्ज था। एक सितम्बर को होने वाली नीलामी के बाद लिए गए कर्ज का कुल आंकड़ा चालू वित्त वर्ष में 51400 करोड़ रुपए हो जाएगा।

नए कर्ज के बाद राज्य सरकार पर कुल कर्ज बढ़कर 5 लाख 40 हजार 114 करोड़ रुपए हो जाएगा।

 

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