September 3, 2026

GDP विवाद में World Bank की एंट्री, अधिकारी बोले- कम FDI का रोना बेकार, ग्रोथ में नहीं कोई गड़बड़ी

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 नई दिल्ली

भारत की अर्थव्यवस्था की ग्रोथ को लेकर बहस तेज हो गई है. वित्त वर्ष 2026-27 की पहली तिमाही में देश की GDP ग्रोथ 7.8% रही है. सरकार जहां इसे अर्थव्यवस्था की मजबूत स्थिति का संकेत बता रही है, वहीं पूर्व वित्त सचिव सुभाष चंद्र गर्ग ने GDP के आंकड़ों और इसकी गणना के तरीके पर सवाल उठाए हैं. इस बीच वर्ल्ड बैंक के एग्जीक्यूटिव डायरेक्टर नीलकंठ मिश्रा ने GDP पर उठ रहे सवालों को खारिज करते हुए तीखी टिप्पणी की है। 

विवाद की बड़ी वजह GDP की नई सीरीज है. फरवरी 2026 में सरकार ने GDP की नई सीरीज जारी की थी, जिसमें बेस ईयर 2011-12 से बदलकर 2022-23 कर दिया गया. इसके साथ आंकड़े जुटाने और उनकी गणना के तरीके में भी बदलाव किया गया. पूर्व वित्त सचिव सुभाष चंद्र गर्ग का कहना है कि नई सीरीज में पिछली तिमाहियों के आंकड़ों में बड़ा बदलाव आया है। 

उन्होंने खास तौर पर जून 2025 की तिमाही के मौजूदा कीमतों वाले GDP आंकड़े में करीब 6 लाख करोड़ रुपये की कमी का मुद्दा उठाया है. सुभाष चंद्र गर्ग का तर्क है कि अगर पुराने आंकड़ों को आधार बनाया जाए तो जून 2026 की ग्रोथ का आंकड़ा काफी अलग दिखाई देगा और यह 2.6% के आसपास ठहरेगा. उनका यह दावा सरकार के 7.8% ग्रोथ के दावे के एकदम विपरीत है। 

कांग्रेस भी सरकार पर उठा रही सवाल
कांग्रेस भी GDP के आंकड़ों को लेकर सरकार पर निशाना साध रही है. पार्टी का आरोप है कि नई GDP सीरीज और आंकड़ों में बदलाव के जरिए अर्थव्यवस्था की तस्वीर को जरूरत से ज्यादा मजबूत दिखाया जा रहा है. कांग्रेस का कहना है कि सिर्फ GDP ग्रोथ बढ़ने से आम लोगों की आर्थिक स्थिति बेहतर नहीं हो जाती. रोजगार, कमाई, खपत और लोगों की जेब में बचने वाली रकम जैसे मुद्दों को भी देखना जरूरी है। 

नीलकंठ मिश्रा ने दावों को बताया 'अल्पज्ञान'
इस पूरे विवाद के बीच वर्ल्ड बैंक के एग्जीक्यूटिव डायरेक्टर नीलकंठ मिश्रा ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म X पर GDP के आंकड़ों का बचाव किया. उन्होंने GDP की नई सीरीज पर सवाल उठाने वालों पर निशाना साधते हुए कहा कि उन्हें 'अल्पज्ञानी और बेहद गलत दावों' को देखकर हैरानी होती है. उन्होंने किसी का नाम नहीं लिया, लेकिन उनका इशारा पूर्व वित्त सचिव सुभाष चंद्र गर्ग और कांग्रेस पार्टी की ओर माना जा रहा है। 

नीलकंठ मिश्रा ने कहा कि GDP के आंकड़ों में हुए बदलाव को समझे बिना पुराने और नए आंकड़ों की तुलना करना सही नहीं है. उनके मुताबिक, नई सीरीज में आंकड़े जुटाने और अर्थव्यवस्था की वास्तविक गतिविधियों को मापने का तरीका बेहतर किया गया है. उन्होंने यह भी कहा कि गलत जानकारी कई बार सही जानकारी से ज्यादा तेजी से फैलती है. इसलिए सही तथ्यों को बार-बार सामने रखना जरूरी है। 

सिर्फ GDP नहीं, ये आंकड़े भी सकारात्मक
नीलकंठ मिश्रा ने कहा कि भारतीय अर्थव्यवस्था की स्थिति समझने के लिए सिर्फ GDP का आंकड़ा देखना पर्याप्त नहीं है. उन्होंने अगस्त के कई आंकड़ों का हवाला दिया. उनके मुताबिक, कार और SUV की बिक्री में करीब 35% की बढ़ोतरी हुई है. दोपहिया वाहनों की बिक्री भी 20% से ज्यादा बढ़ी है. निर्यात में करीब 9% की बढ़ोतरी हुई है. कमर्शियल वाहनों की बिक्री में तो करीब 40% की तेजी देखने को मिली है. वर्ल्ड बैंक के एग्जीक्यूटिव डायरेक्टर नीलकंठ मिश्रा के मुताबिक, यह कारोबार और निर्माण गतिविधियों में मजबूती का संकेत है। 

कर्ज और निवेश में भी दिख रहा सुधार
नीलकंठ मिश्रा ने कहा कि बैंक लेंडिंग की ग्रोथ भी उम्मीद से बेहतर रही है. उनके मुताबिक, पहले कर्ज की धीमी रफ्तार की एक बड़ी वजह बैंकों की तरफ से कर्ज देने में कमजोरी थी, लेकिन अब इसमें सुधार दिखाई दे रहा है. टैक्स कलेक्शन में सुधार और निर्माण क्षेत्र से जुड़े आंकड़ों का हवाला देते हुए उन्होंने कहा कि देश में निवेश की गतिविधियां भी जारी हैं. निर्माण क्षेत्र के सभी संकेतक बेहद मजबूत हैं. उनका मानना है कि अब उन लोगों की संख्या बेहद कम हो जानी चाहिए जो लगातार निजी क्षेत्र के निवेश के कमजोर होने का रोना रोते हैं, क्योंकि देश में निवेश के स्पष्ट और पुख्ता प्रमाण मौजूद हैं। 

आम आदमी की कमाई अब भी चुनौती
हालांकि, नीलकंठ मिश्रा ने यह भी माना कि अर्थव्यवस्था में अभी कुछ 'स्लैक' यानी कमियां मौजूद हैं. इसका मतलब है कि अर्थव्यवस्था अभी अपनी पूरी क्षमता से काम नहीं कर रही है. उन्होंने वास्तविक वेतन यानी महंगाई को हटाने के बाद बचने वाली कमाई में धीमी बढ़ोतरी को इसका एक संकेत बताया. उनके मुताबिक, इस स्थिति को पूरी तरह बदलने में कुछ तिमाहियां लग सकती हैं. उन्होंने कहा कि इन कमियों को पूरी तरह से दूर करने और लेबर मार्केट को मजबूत करने के लिए देश को लगातार कई तिमाहियों तक औसत से अधिक की आर्थिक विकास दर बनाए रखनी होगी, ताकि मार्केट पूरी तरह से चुस्त हो सके और भविष्य में महंगाई के दबावों को नियंत्रित रखा जा सके। 

7.5% तक पहुंच सकती है भारत की ग्रोथ
भविष्य की अर्थव्यवस्था को लेकर वर्ल्ड बैंक के एग्जीक्यूटिव डायरेक्टर नीलकंठ मिश्रा ने काफी सकारात्मक रुख दिखाया है. उनका कहना है कि देश पर बजट का दबाव अब कम हो रहा है और मौद्रिक नीतियां भी अर्थव्यवस्था के लिए अनुकूल बन रही हैं. इसका असर GDP ग्रोथ पर भी दिख रहा है. उनके मुताबिक, आने वाले समय में भारत की औसत GDP ग्रोथ 7% से ऊपर रह सकती है. यहां तक कि अगर सरकार की बजट और मौद्रिक नीतियां सामान्य यानी तटस्थ भी रहती हैं, तब भी भारतीय अर्थव्यवस्था करीब 7.5% की ग्रोथ हासिल कर सकती है. हालांकि, उन्होंने चेतावनी दी कि आने वाले समय में महंगाई का दबाव फिर बढ़ सकता है। 

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