सतत एवं सघन मॉनिटरिंग प्रभावी सार्वजनिक स्वास्थ्य व्यवस्था की आधारशिला : प्रमुख सचिव सुखवीर सिंह
भोपाल
प्रमुख सचिव लोक स्वास्थ्य एवं चिकित्सा शिक्षा सुखवीर सिंह ने मंत्रालय में वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के माध्यम से प्रदेश में विभिन्न बीमारियों की रिपोर्टिंग व्यवस्था और स्वास्थ्य योजनाओं के क्रियान्वयन की विस्तृत समीक्षा की। उन्होंने मीजल्स, डायरिया, मलेरिया, डेंगू, सीवियर एक्यूट मालन्यूट्रिशन (सैम), स्नेक बाइट सहित विभिन्न रोगों एवं असामान्य स्वास्थ्य घटनाओं की समयबद्ध रिपोर्टिंग, निगरानी, उपचार एवं नियंत्रण की कार्यवाही की समीक्षा की। प्रमुख सचिव सिंह ने कहा कि सघन और समयबद्ध रिपोर्टिंग प्रभावी सार्वजनिक स्वास्थ्य व्यवस्था की आधारशिला है। सही समय पर प्राप्त होने वाली स्वास्थ्य संबंधी जानकारी के आधार पर आवश्यक चिकित्सकीय सेवाओं, मानव संसाधन, दवाओं एवं अन्य संसाधनों का योजनाबद्ध तरीके से सुदृढ़ीकरण किया जा सकता है एवं किसी बीमारी अथवा प्रकोप की स्थिति को प्रारंभिक स्तर पर ही नियंत्रित किया जा सकता है।
प्रमुख सचिव सिंह ने निर्देश दिए कि प्रदेश में किसी भी असामान्य स्वास्थ्य घटना, रोग क्लस्टर, मृत्यु अथवा मामलों में असामान्य वृद्धि की शीघ्र पहचान सुनिश्चित की जाए। सूचना प्राप्त होते ही समयबद्ध रिपोर्टिंग, वैज्ञानिक तरीके से आउटब्रेक इन्वेस्टिगेशन तथा त्वरित उपचार, नियंत्रण एवं रोकथाम की गतिविधियां समानांतर रूप से प्रारंभ की जाएं। प्रमुख सचिव ने स्पष्ट निर्देश दिए कि स्वास्थ्य संबंधी सूचना को किसी भी स्तर पर रोका नहीं जाए। यदि किसी असामान्य घटना अथवा मामलों में क्षेत्र विशेष में अचानक वृद्धि की जानकारी प्राप्त होती है तो इसकी सूचना तत्काल जिला सर्विलांस इकाई को दी जाए। उन्होंने कहा कि पोर्टल पर एंट्री पूर्ण होने की प्रतीक्षा में सूचना देने में विलंब नहीं होना चाहिए। आवश्यकता होने पर फोन अथवा संदेश के माध्यम से तत्काल सूचना दी जाए तथा इसके बाद पोर्टल पर आवश्यक प्रविष्टि पूर्ण की जाए। गंभीर असामान्य स्वास्थ्य घटना की स्थिति में सत्यापन की कार्यवाही के साथ-साथ स्टेट सर्विलांस यूनिट, आयुक्त कार्यालय एवं जिला प्रशासन को भी तत्काल सूचित किया जाए।
प्रमुख सचिव सिंह ने असामान्य स्वास्थ्य घटना अथवा संभावित प्रकोप की स्थिति में पहले 24 घंटे की कार्रवाई को अत्यंत महत्वपूर्ण बताते हुए समयबद्ध कार्ययोजना के अनुरूप कार्रवाई सुनिश्चित करने के निर्देश दिए। 0–2 घंटे: क्लिनिकल स्टेबिलाइजेशन, तत्काल सूचना एवं प्रारंभिक लाइन-लिस्ट तैयार करना। 2–6 घंटे: रैपिड रिस्पॉन्स टीम (आरआरटी) को क्षेत्र में सक्रिय करना, ऐक्टिव केस सर्च, सैंपल कलेक्शन तथा एक्सपोज़र की जानकारी एकत्र करना। 6–12 घंटे: टाइम-प्लेस-पर्सन एनालिसिस, संभावित कारणों की पहचान तथा कंट्रोल मेजर्स प्रारंभ करना। 12–24 घंटे: अपडेटेड लाइन-लिस्ट, लेबोरेटरी स्टेटस की समीक्षा, प्रीलिमिनरी रिपोर्ट तैयार करना एवं आगामी 72 घंटे की कार्ययोजना निर्धारित करना। उन्होंने कहा कि प्रत्येक मामले में "पहचान–सूचना–जांच–नियंत्रण" की प्रक्रिया पहले दिन से ही प्रारंभ होनी चाहिए।
बैठक में रोग निगरानी एवं रिपोर्टिंग व्यवस्था में विभिन्न स्तरों की जिम्मेदारियां भी स्पष्ट की गईं। जिला स्तर पर कलेक्टर के मार्गदर्शन में सीएमएचओ/डीएसओ द्वारा समग्र निगरानी, विभागीय समन्वय, आरआरटी को सक्रिय करने तथा दैनिक समीक्षा की जाएगी। ब्लॉक स्तर पर बीएमओ द्वारा केस सत्यापन, लाइन-लिस्टिंग, ऐक्टिव केस सर्च, सैंपल कलेक्शन, ट्रीटमेंट/रेफरल तथा आवश्यक लॉजिस्टिक्स की उपलब्धता सुनिश्चित की जाएगी। स्वास्थ्य संस्थाओं में संस्था प्रभारी/नोडल अधिकारी द्वारा केस आइडेंटिफिकेशन, ट्रीटमेंट, आइसोलेशन, पोर्टल एंट्री, सैंपलिंग एवं रेफरल की कार्यवाही सुनिश्चित की जाएगी। मैदानी स्तर पर एएनएम, सीएचओ, एमपीडब्लू, आशा एवं एएमडब्ल्यू द्वारा घर-घर निगरानी, रिस्क आइडेंटिफिकेशन, हेल्थ एजुकेशन एवं फॉलो-अप की गतिविधियां की जाएंगी।
जननी सुरक्षा एवं प्रसूति सहायता योजनाओं की समीक्षा
प्रमुख सचिव सिंह ने बैठक में जननी सुरक्षा योजना एवं प्रसूति सहायता योजना के क्रियान्वयन की भी समीक्षा की। उन्होंने कहा कि इन योजनाओं का उद्देश्य मातृ एवं शिशु स्वास्थ्य को सुदृढ़ करना है और पात्र हितग्राहियों को समय पर आर्थिक सहायता उपलब्ध कराना इसका महत्वपूर्ण पक्ष है। उन्होंने कहा कि त्वरित हितलाभ अंतरण इन योजनाओं की मूल भावना है। ये योजनाएं सीधे सार्वजनिक स्वास्थ्य एवं मातृ-शिशु स्वास्थ्य से जुड़ी हैं, इसलिए इनके क्रियान्वयन में पूर्ण संवेदनशीलता और प्राथमिकता के साथ कार्य किया जाए।प्रमुख सचिव ने निर्देश दिए कि सभी पात्र हितग्राहियों को समय पर हितलाभ अंतरण सुनिश्चित किया जाए। पेंडिंग प्रेग्नेंसी एंट्री के प्रकरणों पर अप्रसन्नता व्यक्त करते हुए उन्होंने इन्हें प्राथमिकता से पूर्ण करने के निर्देश दिए। उन्होंने कहा कि प्रत्येक लंबित प्रकरण की समीक्षा की जाए, लंबित रहने के कारणों की पहचान कर उसका शीघ्र निराकरण सुनिश्चित किया जाए तथा पात्र हितग्राहियों को समय पर भुगतान मिले। उन्होंने अधिकारियों को योजनाओं के क्रियान्वयन की नियमित समीक्षा करने के निर्देश भी दिए।
सभी स्वास्थ्य संस्थानों में पानी की गुणवत्ता की करें जांच
प्रमुख सचिव सिंह ने प्रदेश के समस्त स्वास्थ्य संस्थानों में एक सप्ताह के भीतर पानी की गुणवत्ता की जांच कराने के निर्देश दिए। उन्होंने कहा कि स्वास्थ्य संस्थानों में स्वच्छ एवं सुरक्षित पेयजल की उपलब्धता अत्यंत महत्वपूर्ण है। उन्होंने निर्देश दिए कि जिन स्वास्थ्य संस्थानों में पानी की गुणवत्ता अथवा संबंधित व्यवस्था में किसी प्रकार की कमी पाई जाती है, वहां उसका तत्काल निराकरण प्राथमिकता से कराया जाए। जांच एवं सुधारात्मक कार्रवाई की नियमित मॉनिटरिंग सुनिश्चित की जाए। प्रमुख सचिव ने स्वास्थ्य संस्थानों में कार्यरत आउटसोर्स कर्मचारियों के भुगतान की भी समीक्षा की। उन्होंने निर्देश दिए कि आउटसोर्स कर्मचारियों को समय पर भुगतान सुनिश्चित किया जाए और भुगतान से संबंधित किसी भी लंबित प्रकरण का शीघ्र निराकरण किया जाए। उन्होंने अधिकारियों को निर्देशित किया कि प्रशासनिक एवं वित्तीय स्तर पर आवश्यक समन्वय करते हुए भुगतान प्रक्रिया में अनावश्यक विलंब न हो। बैठक में आयुक्त लोक स्वास्थ्य एवं चिकित्सा शिक्षा धनराजू एस, एमडी एनएचएम डॉ. सलोनी सिडाना, मेडिकल कॉलेजों के डीन, अधीक्षक, क्षेत्रीय संचालक, मुख्य चिकित्सा एवं स्वास्थ्य अधिकारी तथा संबंधित विभागीय अधिकारी वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के माध्यम से उपस्थित रहे।
