“बनारस और मुंबई के बीच साहित्य और संस्कृति का यह सेतु मेरे लिए बेहद विशेष अनुभव रहा” — श्वेता पड्डा
मुंबई में आयोजित बनारस लिटरेचर फेस्टिवल की श्रृंखला ‘वातायन’, जो नवभारत निर्माण समिति के तत्वावधान में आयोजित हुई, में अभिनेत्री, लेखिका, प्रोफेसर एवं संचार प्रशिक्षक श्वेता पड्डा को विशेष रूप से अतिथि वक्ता एवं कार्यक्रम की होस्ट के रूप में आमंत्रित किया गया।
श्वेता पड्डा ने “साहित्य, सिनेमा — नज़र और नज़रिया, मुंबई और बनारस” विषय पर अपने विचार साझा किए। उन्होंने साहित्य, सिनेमा, संस्कृति और समाज के आपसी संबंधों पर चर्चा करते हुए कहा कि मुंबई और बनारस भले ही भौगोलिक रूप से अलग हों, लेकिन दोनों शहरों की सांस्कृतिक चेतना, रचनात्मकता और जीवन-दृष्टि उन्हें एक अद्भुत सूत्र में जोड़ती है।
अपने आमंत्रण पर आभार व्यक्त करते हुए श्वेता पड्डा ने बृजेश जी, बनारस लिटरेचर फेस्टिवल एवं नवभारत निर्माण समिति का हृदय से धन्यवाद किया। उन्होंने कहा कि उनके लिए यह केवल एक साहित्यिक आयोजन का हिस्सा बनना नहीं, बल्कि मुंबई में बनारस की साहित्यिक विरासत, तहज़ीब और सांस्कृतिक आत्मा को अनुभव करने और उसे आगे बढ़ाने का अवसर था।
श्वेता पड्डा के बहुआयामी कार्यक्षेत्र—अभिनय, साहित्य, शिक्षा, संचार, कहानी कहने और सांस्कृतिक मंचों पर सक्रिय योगदान—को देखते हुए उन्हें इस विशेष सत्र के लिए आमंत्रित किया गया। वे Bazm-e-Dastaan के माध्यम से भी कहानी, कविता, संगीत और भारतीय संस्कृति को एक मंच पर पिरोने का निरंतर प्रयास कर रही हैं।
इस अवसर पर साहित्य, कला, संस्कृति, राजनीति और सामाजिक क्षेत्र की अनेक प्रतिष्ठित हस्तियों की गरिमामयी उपस्थिति रही। इनमें वरिष्ठ नेता प्रेम शुक्ला जी, प्रसिद्ध अभिनेता राजेंद्र गुप्ता जी, पद्मश्री डॉ. सोमा घोष, सौरभ तिवारी जी, सचिव, भारत सरकार, डिपार्टमेंट ऑफ बायोटेक्नोलॉजी (DBT), योगेश दुबे जी, तथा रमेश रेड्डी साहब सहित साहित्य और मुशायरे से जुड़े अनेक गणमान्य व्यक्तित्व शामिल रहे।
श्वेता पड्डा ने कहा कि ऐसे आयोजन केवल साहित्यिक संवाद के मंच नहीं होते, बल्कि साहित्य, सिनेमा और संस्कृति के माध्यम से समाज को देखने, समझने और उस पर नए नज़रिए से विचार करने का अवसर भी प्रदान करते हैं।
उन्होंने आयोजन की सफलता के लिए नवभारत निर्माण समिति, बनारस लिटरेचर फेस्टिवल, ‘वातायन’ की पूरी टीम तथा विशेष रूप से बृजेश जी का आभार व्यक्त करते हुए कहा कि मुंबई में बनारस की आत्मा को इस तरह जीवंत करना अपने आप में एक सुंदर सांस्कृतिक पहल है।
हर हर महादेव।

