गोरखपुर विकास प्राधिकरण ने बैंकों को सख्त निर्देश दिए हैं, बिना मानचित्र स्वीकृति के नहीं मिलेगा होम लोन
गोरखपुर
अब सिर्फ भू-प्रयोग सही होने के आधार पर घर बनाने के लिए के लिए होम लोन पास नहीं किया जा सकेगा। उत्तर प्रदेश के गोरखपुर विकास प्राधिकरण ने बैंकों को सख्त निर्देश दिए हैं कि भवन का मानचित्र स्वीकृत होने या मानचित्र स्वीकृति के लिए आवेदन किए जाने के बाद ही होम लोन की स्वीकृति की प्रक्रिया आगे बढ़ाई जाए। इससे बिना मानचित्र स्वीकृति के भवन निर्माण के लिए लोन मिलने की संभावना पर रोक लगेगी। अवैध निर्माण पर भी अंकुश लगाने में मदद मिलेगी।
गोरखपुर के एनेक्सी भवन में सोमवार को प्राधिकरण और विभिन्न बैंकों के अधिकारियों की बैठक में गृह ऋण प्रक्रिया को लेकर यह महत्वपूर्ण निर्णय लिया गया। बैठक की अध्यक्षता जीडीए उपाध्यक्ष अभिनव गोपाल ने की। उन्होंने बैंकों और प्राधिकरण के बीच बेहतर समन्वय के साथ ऐसी व्यवस्था बनाने पर जोर दिया, जिससे ऋण प्रक्रिया सरल भी हो और भवन निर्माण के नियमों का पालन भी सुनिश्चित हो। प्राधिकरण उपाध्यक्ष ने आश्वस्त किया कि प्राधिकरण की ओर से अपने एलटीपी (लाइसेंस्ड टाउन प्लानर) का पूरा डेटा संबंधित बैंकों को उपलब्ध कराया जाएगा। बैंकों को निर्देश दिया कि जनसामान्य की सुविधा और जागरूकता के लिए इस डेटा के साथ संबंधित मोबाइल नंबर अपनी शाखाओं में प्रमुखता से प्रदर्शित करें। इससे भवन मानचित्र से जुड़ी जानकारी लेने वाले आवेदकों को सही संपर्क उपलब्ध हो सकेगा। प्रक्रिया में अनावश्यक भ्रम कम होगा।
इस बैठक में यह भी तय हुआ कि बैंक गृह ऋण से संबंधित प्राप्त आवेदनों का आवश्यक डेटा नियमित रूप से प्राधिकरण को उपलब्ध कराएंगे। इससे प्राधिकरण अवगत हो सकेगा कि किन क्षेत्रों और भवनों के लिए गृह ऋण के आवेदन मिल रहे हैं। इसके आधार पर मानचित्र स्वीकृति की प्रक्रिया में भी बेहतर समन्वय स्थापित होगा।
एनबीएफसी और लीड बैंक मैनेजर संग बैठक जल्द
बैंक अधिकारियों ने बताया कि गृह ऋण केवल पारंपरिक बैंकों के माध्यम से ही नहीं, बल्कि एनबीएफसी के जरिये भी मिलता है। एसबीआइ और पीएनबी के शाखा प्रबंधकों ने प्रक्रिया में लीड बैंक मैनेजर (एलडीएम) को भी शामिल करने का सुझाव दिया। जीडीए उपाध्यक्ष ने सहमति जताते हुए एनबीएफसी और एलडीएम के साथ शीघ्र अलग बैठक करने का आश्वासन दिया।
एक प्लेटफॉर्म पर मिलेंगी जीडीए की सुविधाएं
गोरखपुर विकास प्राधिकरण अपनी आंतरिक कार्यप्रणाली को और अधिक पारदर्शी, जवाबदेह और तेज बनाने की तैयारी में है। इसके लिए प्राधिकरण में इंटीग्रेटेड ईआरपी (एंटरप्राइज रिसोर्स प्लानिंग) एवं सिटीजन सर्विसेज प्लेटफॉर्म लागू करेगा। इसके जरिए प्राधिकरण के विभिन्न अनुभागों की कार्यप्रणाली को एकीकृत करने के साथ नागरिक सेवाओं को भी डिजिटल प्लेटफॉर्म पर लाया जाएगा। प्रस्तावित सिटीजन सर्विसेज पोर्टल पर ही नागरिकों को ऑनलाइन आवेदन, भुगतान, शिकायत निवारण, नीलामी और आवेदन की स्थिति की ट्रैकिंग जैसी सुविधाएं मिल सकेंगी।
डिजिटल होगी फाइलों की आवाजाही
ईआरपी में वर्कफ्लो ऑटोमेशन की व्यवस्था होगी। इसके तहत डिजिटल अनुमोदन, फाइल ट्रैकिंग और अधिकारियों-कर्मचारियों को सूचनाएं भेजने की सुविधा रहेगी। प्रत्येक प्रक्रिया का ऑडिट ट्रेल उपलब्ध होने से यह भी पता लगाया जा सकेगा कि फाइल किस स्तर पर और कितने समय से लंबित है। ई-ऑफिस की कार्यक्षमता को भी इसी व्यवस्था से जोड़ा जाएगा।
रियल टाइम डैशबोर्ड से होगी निगरानी
प्राधिकरण रियल टाइम एमआईएस और डैशबोर्ड विकसित करेगा। इसके जरिए प्राधिकरण की परियोजनाओं, वित्तीय स्थिति, नागरिक सेवाओं की डिलीवरी और संगठनात्मक प्रदर्शन की निगरानी की जा सकेगी। प्रस्तावित प्रणाली में पेमेंट गेटवे, ओबीपीएएस-फास्टपास, आधार सत्यापन और डॉक्यूमेंट मैनेजमेंट सिस्टम (डीएमएस) के एकीकरण की व्यवस्था होगी। भूमिका आधारित एक्सेस कंट्रोल से अधिकारियों और कर्मचारियों को उनके कार्यक्षेत्र के अनुसार सिस्टम तक पहुंच दी जाएगी। प्राधिकरण का मानना है कि इससे आंतरिक कार्यप्रणाली मजबूत होने के साथ फास्टर पब्लिक डिलीवरी और कार्यों में तेजी आएगी।
बोर्ड की मंजूरी के बाद टेंडर की प्रक्रिया शुरू
प्राधिकरण की ओर से इस प्रस्ताव का उद्देश्य अधिकारियों-कर्मचारियों की जवाबदेही तय करने, आंतरिक कार्यप्रणाली को मजबूत करने और नागरिक सेवाओं की डिलीवरी में तेजी लाना है। बोर्ड से सैद्धांतिक सहमति मिलने के बाद इसके क्रियान्वयन की दिशा में आगे की प्रक्रिया शुरू की जा सकेगी।
