September 17, 2026

नंदीग्राम में ममता बनर्जी की राह मुश्किल? BJP के दांव से बदला सियासी समीकरण

0
Mamata_Banerjee111_2.jpg

कोलकाता
 पश्चिम बंगाल की हाई प्रोफाइल नंदीग्राम सीट पर होने वाले उपचुनाव ने सियासी पारा चढ़ा दिया है. बीजेपी ने पूर्व पीए स्वर्गीय चंद्रनाथ रथ की मां हासीरानी रथ को टिकट देकर बड़ा इमोशनल दांव चला है. टीएमसी में बगावत, कांग्रेस के अलग लड़ने और हुमायूं कबीर के तेवरों से ममता बनर्जी की मुश्किलें बढ़ गई हैं. वहीं शुभेंदु अधिकारी ने 2 करोड़ की सुपारी के आरोप लगाकर नया बवंडर खड़ा कर दिया है. पश्चिम बंगाल में दो विधानसभा सीटों पर होने वाले उपचुनाव ने सियासी पारे को सातवें आसमान पर पहुंचा दिया है. इस पूरे सियासी घमासान में सबसे ज्यादा चर्चा हाई प्रोफाइल नंदीग्राम सीट की हो रही है. इस सीट को लेकर पश्चिम बंगाल की पूर्व मुख्यमंत्री ममता बनर्जी की टेंशन अलग ही लेवल पर पहुंच चुकी है। 

भवानीपुर सीट अपने पास रखने के बाद नंदीग्राम सीट खाली हुई थी. अब इसी सीट पर बीजेपी ने एक ऐसा चौंकाने वाला नाम सामने रख दिया है, जिसने तृणमूल कांग्रेस के खेमे में खलबली मचा दी है. पार्टी के लिए अब इस सीट को बचाना एक बहुत बड़ी राजनीतिक चुनौती बन चुका है। 

नंदीग्राम में बीजेपी ने किस इमोशनल कार्ड से बढ़ाई ममता की बेचैनी?
बीजेपी ने नंदीग्राम उपचुनाव के लिए हासीरानी रथ को अपना उम्मीदवार बनाया है. हासीरानी रथ खुद एक सक्रिय बीजेपी कार्यकर्ता हैं. वे शुभेंदु अधिकारी के पूर्व पीए रहे स्वर्गीय चंद्रनाथ रथ की मां हैं. 6 मई 2026 को विधानसभा चुनाव के नतीजे सामने आने के बाद उत्तर 24 परगना में चंद्रनाथ रथ की गोली मारकर हत्या कर दी गई थी। 

बीजेपी ने हासीरानी रथ को टिकट देकर साफ संदेश दिया है कि पार्टी अपने हर एक कार्यकर्ता के साथ मजबूती से खड़ी है. इससे पहले आरजी कर केस के दौरान भी बीजेपी ने पीड़ित महिला डॉक्टर की मां को चुनावी मैदान में उतारा था। 

जनता ने उस भावुक अपील पर मुहर लगाई और उन्होंने जीत दर्ज की. अब पार्टी ने उसी रणनीति और इमोशन के साथ हासीरानी रथ को नंदीग्राम के रण में उतारा है. हासीरानी रथ के नामांकन के दौरान खुद शुभेंदु अधिकारी मौजूद रहे। 

क्या टीएमसी की आपसी फूट ने नंदीग्राम में मुकाबला त्रिकोणीय बना दिया है?

    नंदीग्राम में इस बार राजनीतिक समीकरण पूरी तरह बदल चुके हैं. मुकाबला सिर्फ बीजेपी और टीएमसी के बीच सीमित नहीं रह गया है. इस बार जमीनी स्तर पर टीएमसी बनाम टीएमसी की जंग देखने को मिल रही है.
    पार्टी दो गुटों में बंट चुकी है और दोनों ही खेमों ने अपने प्रत्याशी मैदान में उतार दिए हैं. टीएमसी ने संचिता प्रधान को अधिकृत उम्मीदवार बनाया है। 

हीं बागी धड़े ने मोहम्मद एतेशामुल हक के नाम का ऐलान कर दिया है.
    वोटों के इसी संभावित बंटवारे को देखते हुए शायद ममता बनर्जी खुद इस बार नंदीग्राम से नहीं उतरीं. हालांकि बागी गुट के नेता ऋतब्रत बनर्जी ने यह पेशकश की थी कि अगर ममता खुद चुनाव लड़ेंगी तो वे अपना उम्मीदवार वापस ले लेंगे. ममता के चुनाव न लड़ने से 15 साल में पहली बार ऐसा होगा जब वे विधानसभा में मौजूद नहीं रहेंगी। 

शुभेंदु अधिकारी का कितना बड़ा फैक्टर रहेगा इस उपचुनाव में?
नंदीग्राम सीट पर बीजेपी की स्थिति लगातार मजबूत मानी जा रही है. साल 2021 के मुकाबले 2026 के आम चुनाव में जीत का अंतर काफी बड़ा रहा था. उपचुनाव में सत्ता पक्ष का दबदबा रहने के बावजूद शुभेंदु अधिकारी की मजबूत पकड़ यहां गेमचेंजर साबित हो सकती है। 

शुभेंदु अधिकारी का पूरा समर्थन और संगठन की ताकत हासीरानी रथ के पीछे खड़ी है. शुभेंदु अधिकारी ने दावा किया है कि इस बार बीजेपी यहां 50 हजार से ज्यादा के बड़े अंतर से जीत दर्ज करेगी. इसके साथ ही हासीरानी रथ को मिलने वाले सहानुभूति के वोट ममता बनर्जी के लिए बड़ी मुसीबत बन सकते हैं। 

कांग्रेस ने कैसे फेरा ममता बनर्जी की चुनावी उम्मीदों पर पानी?

नंदीग्राम की मुश्किलों के बीच ममता बनर्जी को कांग्रेस से भी कोई राहत नहीं मिली है. सूत्रों के मुताबिक उपचुनाव को लेकर टीएमसी ने कांग्रेस को एक खास फॉर्मूले की पेशकश की थी. प्रस्ताव यह था कि कांग्रेस नंदीग्राम से लड़े और रेजीनगर की सीट टीएमसी के लिए छोड़ दे। 

कांग्रेस हाईकमान ने इस फॉर्मूले को सीधे तौर पर ठुकरा दिया. राहुल गांधी की पार्टी ने दोनों ही सीटों पर अपने उम्मीदवार उतारने का फैसला किया है. वामदलों की मौजूदगी के साथ कांग्रेस के अलग लड़ने से पूरा मुकाबला मल्टी-कॉर्नर हो चुका है. इसका सीधा नुकसान सत्ताधारी पार्टी को उठाना पड़ सकता है। 

रेजीनगर में हुमायूं कबीर ने दीदी के लिए क्या नया चक्रव्यूह रचा है?

उपचुनाव की दूसरी सीट रेजीनगर भी ममता बनर्जी के लिए आसान नहीं रहने वाली है. यह सीट हुमायूं कबीर के इस्तीफे के बाद खाली हुई थी. यहां भी टीएमसी के बागी गुट ने अपना अलग उम्मीदवार मैदान में उतार दिया है। 

हुमायूं कबीर ने अपने बेटे को निर्दलीय मैदान में उतारकर मुकाबले को बेहद पेचीदा बना दिया है. रेजीनगर में हुमायूं कबीर का अपना मजबूत जनाधार है. ऐसे में टीएमसी के लिए अपने परंपरागत वोटों को एकजुट रखना बहुत मुश्किल नजर आ रहा है। 

2 करोड़ की सुपारी वाले आरोप से बंगाल की सियासत में कैसे आया उबाल?

चुनावी माहौल के बीच चंद्रनाथ रथ की हत्या को लेकर शुभेंदु अधिकारी ने एक बहुत बड़ा और सनसनीखेज खुलासा किया है. शुभेंदु अधिकारी ने दावा किया कि उनके पूर्व पीए की हत्या कोई सामान्य वारदात नहीं थी. इसके लिए बाकायदा 2 करोड़ रुपये की सुपारी दी गई थी। 

शुभेंदु अधिकारी ने सीधे तौर पर निशाना साधते हुए कहा कि यह रकम भाईपो गैंग की तरफ से दी गई थी. शुभेंदु ने कहा, ‘मैं जितना जानता हूं, ये पैसा विपुल को दो करोड़ रुपये देने के लिए दिया गया है, संद्रा को खत्म करने के लिए. इसमें आपके भतीजे का गैंग जुड़ा हुआ है. इसका CBI इन्वेस्टिगेशन करे, ये मेरा विश्वास है. लेकिन CBI अब तक बहुत दूर है। 

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *