September 17, 2026

100% अमेरिकी टैरिफ के दांव पर भारत का रुख साफ, ऊर्जा सुरक्षा से नहीं करेगा समझौता

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नई दिल्ली
अमेरिकी संसद के निचले सदन (हाउस ऑफ रिप्रेजेंटेटिव्स) में ‘सेंक्शनिंग रूस एंड ईरान एक्ट’ पारित होने के बाद भारत ने वाशिंगटन को दो टूक शब्दों में कड़ा कूटनीतिक संदेश दे दिया है. विदेश मंत्रालय (MEA) ने स्पष्ट किया है कि भारत अपनी 1.4 अरब आबादी की ऊर्जा सुरक्षा सुनिश्चित करने के लिए पूरी तरह प्रतिबद्ध है और वैश्विक बाजार की परिस्थितियों के हिसाब से अलग-अलग स्रोतों से तेल और गैस की खरीद जारी रखेगा. 16 सितंबर 2026 को पारित इस अमेरिकी विधेयक में रूस से ऊर्जा आयात करने वाले मुल्कों पर कड़े अतिरिक्त टैरिफ लगाने का प्रावधान है, जिसका सीधा असर भारत जैसी उभरती अर्थव्यवस्थाओं पर पड़ सकता है। 

नई दिल्ली ने साफ कर दिया है कि वह अपने राष्ट्रीय, व्यापारिक और आर्थिक हितों की रक्षा के लिए हर जरूरी कदम उठाने को तैयार है. विदेश मंत्रालय के अनुसार, पिछले कुछ महीनों में इस संवेदनशील मसले पर अमेरिकी अधिकारियों के साथ उच्च स्तर पर कई दौर की बेबाक बातचीत हो चुकी है. भारत ने अमेरिका को स्पष्ट समझा दिया है कि ऐसे एकतरफा फैसलों का असर न केवल द्विपक्षीय व्यापारिक रिश्तों पर पड़ेगा, बल्कि अंतरराष्ट्रीय ऊर्जा बाजार में भी भारी उथल-पुथल मच सकती है. सरकार ने उद्योग जगत और व्यापारिक संगठनों के साथ मिलकर इस कानून से पैदा होने वाली चुनौतियों से निपटने की रणनीति पर काम शुरू कर दिया है। 

MEA के मुताबिक, भारत बदलती बाजार परिस्थितियों के अनुरूप ऊर्जा के विविध स्रोतों से खरीद जारी रखेगा. मंत्रालय ने कहा कि पिछले कुछ महीनों में इस मुद्दे पर विभिन्न अमेरिकी अधिकारियों के साथ उच्च स्तर पर चर्चा हुई है. भारतीय पक्ष ने द्विपक्षीय संबंधों के साथ-साथ अंतरराष्ट्रीय ऊर्जा बाजार पर इसके संभावित प्रभावों को भी स्पष्ट रूप से अमेरिका के सामने रखा है। 

भारत ने यह भी स्पष्ट किया है कि वह अपने व्यापार और आर्थिक हितों की रक्षा के लिए सभी आवश्यक कदम उठाने के लिए प्रतिबद्ध है. सरकार इन घटनाक्रमों के प्रभावों से निपटने के लिए भारतीय व्यापार और उद्योग संगठनों के साथ मिलकर काम करेगी। 

विदेश मंत्रालय ने कहा कि भारत सरकार ने अमेरिकी कांग्रेस में Sanctioning Russia and Iran Act के पारित होने का संज्ञान लिया है. भारत इस मामले में आगे होने वाले घटनाक्रम पर नजर रख रहा है. अमेरिकी कानून में रूस से ऊर्जा खरीदने वाले देशों पर अतिरिक्त टैरिफ लगाने का प्रावधान शामिल है और इससे भारत समेत अन्य देशों पर असर पड़ सकता है। 

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