कविता के विविध रंगों से सजा मुक्ताकाशी मंच, सेवा संकल्प अभियान में देश-प्रदेश के रचनाकारों ने बांधा समां
गीत, हास्य, वीर और श्रृंगार रस की प्रस्तुतियों ने साहित्यप्रेमियों को दिया समृद्ध काव्य अनुभव
रायपुर, 18 सितंबर 2026। संस्कृति विभाग, छत्तीसगढ़ शासन के तत्वावधान में सेवा संकल्प अभियान के अंतर्गत रायपुर स्थित मुक्ताकाशी मंच, महंत घासीदास संग्रहालय परिसर में भव्य काव्य संध्या का आयोजन किया गया। साहित्य एवं संस्कृति प्रेमियों से जुड़े इस आयोजन में छत्तीसगढ़ के विभिन्न जिलों के साथ देश के अलग-अलग शहरों से आए कवि-कवयित्रियों ने अपनी रचनाओं का पाठ कर श्रोताओं को कविता के विविध रंगों से रूबरू कराया।
काव्य संध्या में गीत, हास्य, वीर और श्रृंगार रस की प्रस्तुतियों ने पूरे वातावरण को साहित्यिक और भावनात्मक रंगों से भर दिया। रचनाकारों ने अपनी कविताओं के माध्यम से जीवन, समाज, संवेदना, प्रेम, हास्य, शौर्य और राष्ट्रभावना जैसे विषयों को प्रभावी ढंग से अभिव्यक्त किया।
कार्यक्रम का संचालन बिलाईगढ़ के हास्य कवि श्री बंशीधर मिश्रा ने किया। सहज संवाद, हास्य-विनोद और प्रभावी मंच संचालन के माध्यम से उन्होंने पूरे आयोजन को जीवंत बनाए रखा।
रायपुर के गीतकार श्री रमेश विश्वहार ने अपने मधुर गीतों की प्रस्तुति दी। उनकी रचनाओं में जीवन और मानवीय भावनाओं के विभिन्न पक्षों की अभिव्यक्ति देखने को मिली। वहीं रायपुर की हास्य कवयित्री श्रीमती शशि दुबे ने हास्य कविताओं के माध्यम से दैनिक जीवन और सामाजिक परिस्थितियों से जुड़े प्रसंगों को रोचक अंदाज में प्रस्तुत किया।
मुंगेली के श्री देवेंद्र सिंह परिहार ने वीर रस की ओजपूर्ण कविताओं का पाठ किया। उनकी रचनाओं में साहस, शौर्य, राष्ट्रप्रेम और उत्साह के भाव प्रमुख रहे। इसी क्रम में दुर्ग के नंदकट्टी से आए श्री ईशान शर्मा विद्युत ने भी वीर रस की कविताओं के माध्यम से श्रोताओं में ओज और उत्साह का संचार किया।
लखनऊ की कवयित्री श्रीमती सोनी मिश्रा ने श्रृंगार रस की कविताएं प्रस्तुत कीं। उनकी रचनाओं में प्रेम, सौंदर्य, संवेदना और मानवीय भावनाओं की अभिव्यक्ति रही। मध्यप्रदेश के जबलपुर से आए इंजीनियर श्री विनोद नयन ने गीतों की प्रस्तुति देकर कार्यक्रम में गीत विधा के विविध रंग जोड़े।
रायपुर की श्रीमती शकुंतला तरार ने भी गीतों की प्रस्तुति दी। वहीं बेमेतरा के श्री रामानंद त्रिपाठी और भिलाई के श्री आलोक शर्मा ने हास्य कविताओं के माध्यम से श्रोताओं का मनोरंजन किया। दोनों रचनाकारों ने आम जीवन, सामाजिक परिस्थितियों और रोजमर्रा के अनुभवों को हास्य के माध्यम से प्रभावी ढंग से प्रस्तुत किया।
सचिव संस्कृति एवं पर्यटन डॉ. भारती दासन ने अपने उद्बोधन में कहा कि काव्य केवल मनोरंजन का माध्यम नहीं, बल्कि समाज की भावनाओं, अनुभवों, विचारों और संवेदनाओं को व्यक्त करने का सशक्त माध्यम भी है। कविता के माध्यम से सामाजिक सरोकार, मानवीय संबंध, देशप्रेम, जीवन मूल्य और समसामयिक परिस्थितियां प्रभावी ढंग से आमजन तक पहुंचती हैं। सेवा संकल्प अभियान के अंतर्गत आयोजित इस काव्य संध्या में भी साहित्य के माध्यम से सामाजिक चेतना और सकारात्मक सोच का संदेश देखने को मिला।
कार्यक्रम में सचिव संस्कृति एवं पर्यटन डॉ. भारती दासन, संचालक संस्कृति एवं पुरातत्व डॉ. संजय कन्नौजे, उपसंचालक श्री उमेश मिश्रा, साहित्यकार एवं नाटककार श्री विजय मिश्रा, वरिष्ठ पत्रकार एवं छायाकार श्री दीपेंद्र दीवान तथा सामाजिक कार्यकर्ता श्री उदयभान चौहान विशेष रूप से उपस्थित रहे।
मुक्ताकाशी मंच पर आयोजित इस काव्य संध्या में गीतों की मधुरता, हास्य की सहजता, श्रृंगार की भावनात्मक अभिव्यक्ति और वीर रस की ओजपूर्ण प्रस्तुतियों ने साहित्यप्रेमियों को समृद्ध काव्य अनुभव प्रदान किया। संस्कृति विभाग द्वारा आयोजित यह आयोजन साहित्य, कला और सांस्कृतिक चेतना को आमजन से जोड़ने की दिशा में एक महत्वपूर्ण पहल के रूप में सामने आया।

