September 21, 2026

बिहार में सोलर विलेज की होगी रैंकिंग, सबसे आगे रहने वाले गांवों को मिलेगा इंसेंटिव

0
170-1.jpg

पटना
 बिजली कंपनी अब सोलर विलेज योजना को आगे लाने की तैयारी में है। किसी गांव में कितनी संख्या मे सोलर सिस्टम काम रहे उनकी संख्या के आधार पर गांवों की रैंकिंग की जाएगी।

रैकिंग के आधार पर सोलर विलेज यानी सौर ग्राम तय होंगे। शीर्ष के सोलर विलेज को बिजली कंपनी के स्तर से इंसेंटिव यानी प्रोत्साहन राशि प्रदान की जाएगी।

सोलर सिस्टम की होगी गणना
इस संबंध में मिली जानकारी के अनुसार गांवों में स्थित स्कूल, घर की छतों और अगर स्वास्थ्य केंद्र है तो वहां लगे सोलर सिस्टम की गिनती सोलर विलेज तय किए जाने को लेकर होगी।

प्रधानमंत्री मुफ्त बिजली सूर्य घर योजना के तहत ग्रामीण क्षेत्रों में भी घर की छतों पर सोलर सिस्टम लगने शुरू हुए हैं। इनकी गिनती सोलर विलेज तय करने में महत्वपूर्ण होगी। सभी सिस्टम अब ग्रिड कनेक्टेड हैं।

वर्तमान में प्राय: सभी गांवों में सोलर स्ट्रीट लाइट काम कर रहे हैं इसलिए सोलर विलेज योजना में इसकी गणना नहीं होगी।

अधिक से अधिक लगे सोलर सिस्टम
बिजली कंपनी के संबंधित अधिकारी ने बताया कि किसी गांव को पूरी तरह से सोलर विलेज के रूप में विकसित करना संभव नहीं है। पर यह कोशिश है कि गांव में अधिक से अधिक सोलर सिस्टम लगे। अब जो भी सिस्टम लग रहा वह ग्रिड कनेक्टेड लग रहा।

धरनई गांव को बनाया गया था पहला सोलर विलेज
वर्ष 2014 में बिहार के एक गांव को सोलर विलेज के रूप में विकसित किए जाने का प्रयोग किया गया था। उस समय लोग सौर ऊर्जा को नकली बिजली कहते थे।

जहानाबाद जिले के धरनई गांव में कुछ संस्थाओं के माध्यम से सोलर माइक्रो ग्रिड की स्थापना की गयी थी। पर बाद के सालों में रख रखाव के अभाव में यह प्रोजेक्ट बंद हो गया
इसके अलावा हाल ही में नालंदा जिले के नूरसराय प्रखंड स्थित डोईया गांव को साेलर माडल गांव के रूप में विकसित किया गया है।

गुजरात में है देश का पहला सोलर विलेज
गुजरात का मोढेरा गांव देश का पहला सोलर विलेज है। यहां 24 घंटे सौर ऊर्जा से बिजली की आपूर्ति होती है। सोलर इनर्जी की तकनीक ग्राउंड माउंटेड सोलर पावर प्लांट और बैट्री इनर्जी स्टोरेज सिस्टम यहां लगा है। सभी घरों की छत पर सोलर पैनल लगे हुए हैं।

 

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *