September 22, 2026

न्यूयॉर्क में सेमाफोर के ‘द नेक्स्ट 3 बिलियन’ सम्मेलन में गुरुदेव श्री श्री रवि शंकर: “शांति नहीं होगी तो समृद्धि भी नहीं हो सकती

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सम्मेलन के वक्ताओं में केन्या के राष्ट्रपति विलियम रुटो और कांगो लोकतांत्रिक गणराज्य की प्रधानमंत्री जूडिथ सुमिनवा भी शामिल

न्यूयॉर्क, 22 सितंबर 2026: आर्ट ऑफ लिविंग के संस्थापक गुरुदेव श्री श्री रवि शंकर ने मंगलवार को न्यूयॉर्क में आयोजित सेमाफोर के ‘द नेक्स्ट 3 बिलियन’ सम्मेलन को संबोधित किया। सम्मेलन में राष्ट्राध्यक्षों और शासनाध्यक्षों, वैश्विक संस्थानों तथा कारोबारी जगत के नेताओं ने हिस्सा लिया। इसमें इस बात पर चर्चा की गई कि किस प्रकार प्रौद्योगिकी और डिजिटल समावेशन के माध्यम से आर्थिक अवसरों का विस्तार किया जा सकता है।

सम्मेलन के वक्ताओं में केन्या के राष्ट्रपति महामहिम विलियम सामोई रुटो, कांगो लोकतांत्रिक गणराज्य की प्रधानमंत्री महामहिम जूडिथ सुमिनवा, विश्व व्यापार संगठन की महानिदेशक डॉ. न्गोजी ओकोंजो-इवेला और अंतरराष्ट्रीय मुद्रा कोष की प्रबंध निदेशक क्रिस्टालिना जॉर्जीवा शामिल थीं।

सेमाफोर के सह-संस्थापक एवं मुख्य कार्यकारी अधिकारी जस्टिन बी. स्मिथ के साथ संवाद में गुरुदेव ने कहा कि आर्थिक विकास को आंतरिक कल्याण से अलग करके नहीं देखा जा सकता। अंतरराष्ट्रीय शांति दिवस के एक दिन बाद उन्होंने कहा, “समृद्धि शांति के साथ आती है। यदि शांति नहीं होगी, तो समृद्धि भी नहीं हो सकती।”

उन्होंने कहा कि संपन्न और वंचित वर्गों के बीच की खाई लगभग हर देश में मौजूद है, जिसमें अमेरिका भी शामिल है, और इसे पाटने के लिए दोनों पक्षों को प्रयास करने होंगे। उनके अनुसार, लोगों को “पीड़ित मानसिकता” से बाहर निकलकर अपने विकास की जिम्मेदारी स्वयं उठानी होगी, वहीं जिनके पास पर्याप्त संसाधन हैं, उन्हें सहानुभूति और साझा करने के महत्व को फिर से समझना होगा। उन्होंने भ्रष्टाचार को भी एक बड़ी वजह बताया, जिसके कारण वैश्विक दक्षिण के कई देशों में संसाधन जमीनी स्तर तक नहीं पहुंच पाते।

गुरुदेव ने भारत के एक ग्रामीण क्षेत्र में आर्ट ऑफ लिविंग केंद्र के आसपास रहने वाले 500 बेरोजगार युवाओं का उदाहरण साझा किया। उन्होंने बताया कि सरकार की ओर से दिए गए 200 परियोजना प्रस्तावों को इन युवाओं ने यह मानकर ठुकरा दिया था कि कुछ भी काम नहीं करेगा। दो महीने के एक कार्यक्रम के माध्यम से उनमें उद्यमिता की भावना विकसित करने पर उनकी सोच में बदलाव आया। उन्होंने बताया कि इसी मॉडल को बाद में केन्या, घाना, नाइजीरिया, बोत्सवाना, दक्षिण अफ्रीका और अफ्रीका के अन्य देशों में भी अपनाया गया।

कार्यस्थल से जुड़े मुद्दों पर बात करते हुए गुरुदेव ने कहा कि तनाव संवाद की प्रक्रिया को बाधित करता है और इसका असर कारोबारी संस्थानों पर भी पड़ता है। उन्होंने कहा कि अनिश्चितता के दौर में बेहतर ढंग से आगे बढ़ने के लिए लोगों को अपनेपन और सुरक्षा की भावना की आवश्यकता होती है।

जब जस्टिन बी. स्मिथ ने गुरुदेव से कृत्रिम बुद्धिमत्ता (AI) को लेकर उनकी राय पूछी, तो उन्होंने हल्के-फुल्के अंदाज में कहा, “इंटेलिजेंस की अनुपस्थिति, आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस और एब्सोल्यूट इंटेलिजेंस—ये तीन अवस्थाएँ हैं।”

सत्र के समापन पर स्मिथ ने कहा कि यदि उन्हें इन तीनों में से किसी एक को चुनना हो, तो वे तीसरे विकल्प को चुनेंगे।

गुरुदेव ने चेतना के क्षेत्र में वैज्ञानिक अनुसंधान को आगे बढ़ाने के उद्देश्य से ‘इंस्टीट्यूट ऑफ एब्सोल्यूट इंटेलिजेंस’ की भी स्थापना की है।

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