बच्चों का पढ़ाई में लगेगा मन! वास्तु के अनुसार स्टडी रूम में रखें ये खास बातें
बच्चे का मन पढ़ाई में लगे और उसकी एकाग्रता बनी रहे, इसके लिए घर में पढ़ाई का सही वातावरण होना बेहद जरूरी है. वास्तु शास्त्र के अनुसार, स्टडी रूम में रखी चीजें और पढ़ाई करते समय बैठने की दिशा मानसिक क्षमता, याददाश्त और पढ़ाई के परिणामों को प्रभावित कर सकती है. कड़ी मेहनत के बावजूद अगर बच्चों को सही परिणाम नहीं मिलते हैं, तो इसका एक कारण पढ़ाई के कमरे का वास्तु दोष भी हो सकता है.
स्टडी टेबल को कमरे की किस दिशा में रखना चाहिए?
वास्तु शास्त्र के अनुसार, स्टडी टेबल को दक्षिण-पश्चिम या उत्तर-पूर्व दिशा में रखना शुभ माना जाता है. उत्तर-पूर्व दिशा को ज्ञान और एकाग्रता से जुड़ी दिशा माना जाता है, जबकि दक्षिण-पश्चिम दिशा को स्थिरता से संबंधित माना जाता है.
पढ़ाई करते समय किस दिशा में मुंह होना चाहिए?
वास्तु शास्त्र के अनुसार, स्टडी टेबल को कमरे में ऐसी स्थिति में रखना चाहिए, ताकि पढ़ते समय बच्चे का मुख उत्तर या पूर्व दिशा की ओर हो. उत्तर दिशा को बुध ग्रह से संबंधित माना जाता है. बुध को ज्ञान, बुद्धि और वाणी का कारक माना जाता है. वास्तु मान्यताओं के अनुसार, उत्तर या पूर्व दिशा की ओर मुख करके पढ़ने से एकाग्रता बनाए रखने और पढ़ाई में मन लगाने में मदद मिल सकती है.
कुर्सी और बैठने की व्यवस्था कैसी होनी चाहिए?
कुर्सी के पीछे हो ठोस दीवार: पढ़ाई करते समय बच्चे की कुर्सी के पीछे खिड़की या दरवाजा नहीं होना चाहिए. वास्तु के अनुसार, कुर्सी के पीछे ठोस दीवार होने से स्थिरता और आत्मविश्वास का वातावरण बना रहता है.
टेबल को दीवार से सटाकर न रखें: वास्तु मान्यताओं के अनुसार, स्टडी टेबल और दीवार के बीच थोड़ी जगह रखना बेहतर माना जाता है. इससे कमरे में खुलापन बना रहता है और पढ़ाई के लिए आरामदायक माहौल बनता है.
कमरे का रंग
स्टडी रूम में हल्के रंगों का इस्तेमाल करना चाहिए. आप कमरे में हरा, हल्का नीला, क्रीम या हल्का पीला रंग करवा सकते हैं. वास्तु के अनुसार, इन रंगों को शुभ माना जाता है. मान्यता है कि इन रंगों से कमरे में शांत और सकारात्मक वातावरण बना रहता है.
टेबल पर सामान
स्टडी टेबल पर केवल जरूरी किताबें और पढ़ाई से जुड़ी चीजें रखें. टेबल पर अनावश्यक सामान जमा न करें और इसे हमेशा साफ व व्यवस्थित रखें. इससे पढ़ाई के दौरान ध्यान भटकने की संभावना कम हो सकती है.
