कोटा में वंदे भारत का 180 KM प्रति घंटे की रफ्तार से हाईस्पीड ट्रायल सफल, सुरक्षा मानकों की हुई जांच
कोटा
भारतीय रेलवे ने स्वदेशी रेल तकनीक के क्षेत्र में एक और महत्वपूर्ण उपलब्धि हासिल की है। पंजाब के कपूरथला स्थित रेल कोच फैक्ट्री (आरसीएफ) में निर्मित 16 कोच वाली नई वंदे भारत चेयर कार ट्रेन का पश्चिम मध्य रेलवे के कोटा मंडल में 180 किलोमीटर प्रति घंटे की रफ्तार पर सफल हाईस्पीड परीक्षण किया गया। मुख्य रेल संरक्षा आयुक्त (सीसीआरएस) की निगरानी में गुरुवार को मथुरा से कोटा होते हुए नागदा रेलमार्ग पर यह परीक्षण किया गया। इस दौरान उच्च गति पर ट्रेन की कार्यक्षमता, परिचालन दक्षता और संरक्षा से जुड़े तकनीकी मानकों का आकलन किया गया। यह परीक्षण आधुनिक, तेज रफ्तार और स्वदेशी तकनीक से निर्मित ट्रेनों के विकास की दिशा में महत्वपूर्ण कदम माना जा रहा है।
कोटा रेल मंडल के सीनियर डीसीएम सौरभ जैन ने बताया कि 16 कोच वाली वंदे भारत चेयर कार ट्रेन आधुनिक प्रोपल्शन सिस्टम से लैस है। परीक्षण के दौरान तेज गति पर ट्रेन के प्रदर्शन और परिचालन से जुड़े विभिन्न पहलुओं की जांच की गई। मुख्य रेल संरक्षा आयुक्त की निगरानी में हुए इस ट्रायल का उद्देश्य उच्च गति पर ट्रेन की तकनीकी क्षमता और सुरक्षा मानकों का आकलन करना था। कोटा मंडल में हुआ यह परीक्षण हाईस्पीड ट्रायल के लिए इस रेलखंड की महत्वपूर्ण भूमिका को भी दर्शाता है।
कपूरथला फैक्ट्री ने बनाया उत्पादन रिकॉर्ड
रेल कोच फैक्ट्री, कपूरथला आधुनिक रेल कोच निर्माण के प्रमुख केंद्रों में शामिल है। यहां वंदे भारत और अमृत भारत जैसी आधुनिक ट्रेनों के कोच और ट्रेनसेट तैयार किए जा रहे हैं। फैक्ट्री में निर्मित रेल कोच एशिया और अफ्रीका के कई देशों में निर्यात भी किए जा चुके हैं। इससे अंतरराष्ट्रीय रेल निर्माण बाजार में भारत की पहचान को मजबूती मिली है।
एक वर्ष में बनाए 2,383 रेल कोच
फैक्ट्री ने वित्त वर्ष 2025-26 में रिकॉर्ड 2,383 रेल कोच का निर्माण किया। इसे फैक्ट्री का अब तक का सर्वाधिक वार्षिक उत्पादन बताया गया है। यह उपलब्धि उसकी उत्पादन क्षमता और आधुनिक रेल निर्माण के क्षेत्र में बढ़ती भूमिका को रेखांकित करती है।
स्वदेशी रेल तकनीक को मिलेगा बढ़ावा
वंदे भारत ट्रेन का 180 किलोमीटर प्रति घंटे की रफ्तार पर सफल परीक्षण आधुनिक रेल तकनीक, संरक्षा मानकों और स्वदेशी निर्माण क्षमता को आगे बढ़ाने की दिशा में अहम उपलब्धि है। यह केंद्र सरकार के ‘मेक इन इंडिया, मेक फॉर द वर्ल्ड’ अभियान के अनुरूप देश में आधुनिक रेल उपकरणों और ट्रेनों के निर्माण को प्रोत्साहित करने के प्रयासों को भी मजबूती देगा।
