October 11, 2026

भारत को रूस का बड़ा डिफेंस ऑफर! 114 राफेल के साथ 140 पांचवीं पीढ़ी के फाइटर जेट पर नजर

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बेंगलुरु
 
रूस-यूक्रेन और ईरान जंग ने ग्‍लोबल लेवल पर उथल-पुथल मचा रखी है. सामरिक हालात में व्‍यापक परिवर्तन आ चुके हैं. हर देश खुद को सुरक्षित करने के लिए अपनी क्षमता के अनुसार आर्म्‍ड फोर्सेज को अपडेट कर रहा है. इससे दुनियाभर में हथियारों की होड़ बढ़ गई है. नई टेक्‍नोलॉजी की वजह से डिफेंस सेक्‍टर में नए-नए बदलाव हो रहे हैं. मिसाइल और ड्रोन हमले को देखते हुए तमाम देश एयर डिफेंस सिस्‍टम पर लाखों करोड़ रुपये खर्च कर रहे हैं. वहीं, ताकतवर देश ऐसी टेक्‍नोलॉजी का इस्‍तेमाल कर रहे हैं, जो रडार और एयर डिफेंस सिस्टम को भी मात दे दे. बदले हालात में भारत भी किसी से पीछे नहीं रहना चाहता है. यही वजह है कि एयर फायर-पावर को बढ़ाने के लिए भारत की ओर से लगातार कदम उठाए जा रहे हैं। 

 114 राफेल फाइटर जेट की डील को हरी झंडी मिल चुकी है और अब एक मुकम्‍मल 5th जेनरेशन फाइटर जेट की तलाश चल रही है. यह तलाश इसलिए भी जरूरी हो गया है, क्‍योंकि चीन और पाकिस्‍तान के बीच पांचवीं पीढ़ी के लड़ाकू विमान को लेकर डील होने की संभावना है. इन सबको ध्‍यान में रखते हुए रूस ने भारत के सामने पांचवीं पीढ़ी के 140 Su-57E लड़ाकू विमान का प्रस्‍ताव रखा है. बताया जा रहा है कि इसमें डोमेस्टिक प्रोडक्‍शन के साथ ही टेक्‍नोलॉजी ट्रांसफर का भी ऑफर है। 

दरअसल, रूस भारत को अपने पांचवीं पीढ़ी के स्टील्थ लड़ाकू विमान Su-57E के कम से कम 140 विमानों की खरीद के लिए तैयार करने में जुटा है. इस प्रस्ताव के तहत हिंदुस्तान एयरोनॉटिक्स लिमिटेड (एचएएल) के नासिक प्‍लांट को Su-57E के स्थानीय उत्पादन केंद्र में बदलने की पेशकश की गई है. रूसी पक्ष का मानना है कि इतने बड़े ऑर्डर से उत्पादन लाइन में बदलाव, जरूरी उपकरणों और तकनीक हस्तांतरण पर होने वाले निवेश की लागत की भरपाई संभव हो सकेगी. हालांकि, यह प्रस्ताव अभी बातचीत के स्तर पर है और भारत की ओर से 140 विमानों की खरीद पर अंतिम फैसला होने की पुष्टि नहीं हुई है। 

रिपोर्ट के अनुसार, रूस चाहता है कि भारत पहले 40 Su-57E विमानों की खरीद के बाद स्थानीय उत्पादन के लिए अतिरिक्त 100 विमानों का ऑर्डर देने पर प्रतिबद्धता जताए. शुरुआती 40 विमानों की खरीद सरकार-से-सरकार (G2G) समझौते के तहत होने की संभावना बताई गई है. इस शुरुआती प्रस्ताव में केवल एक सीट वाले लड़ाकू विमानों को शामिल करने की बात कही गई है। 

नासिक प्‍लांट में करना होगा बदलाव
प्रस्ताव के मुताबिक, एचएएल के नासिक संयंत्र में मौजूदा Su-30MKI उत्पादन लाइन को Su-57E के निर्माण के लिए इस्तेमाल किया जा सकता है. हालांकि, इसके लिए बड़े पैमाने पर बदलाव करने होंगे. रिपोर्ट के अनुसार, उत्पादन लाइन को नए विमान के अनुकूल बनाने के लिए करीब 50 से 60 प्रतिशत नए टूलिंग उपकरणों की जरूरत पड़ सकती है. Su-30MKI के लिए खरीदे गए 12 अतिरिक्त विमानों की आपूर्ति पूरी होने और मौजूदा उत्पादन लाइन बंद होने के बाद इस प्‍लांट को नए कार्यक्रम के लिए तैयार करने का विकल्प सामने आया है. रूस स्थानीय उत्पादन के साथ 60 प्रतिशत से अधिक तकनीक हस्तांतरण (टीओटी) की पेशकश भी कर रहा है। 

दो सीटों वाले विमान पर भी विचार
रूस ने Su-57 के पुराने प्रोटोटाइप को दो सीटों वाले संस्करण में बदलकर उसका परीक्षण शुरू किया है. भारतीय वायुसेना की जरूरतों को ध्यान में रखते हुए दो सीटों वाले विमान का विकल्प भी महत्वपूर्ण माना जा रहा है. Su-30MKI की तरह इसमें दूसरा चालक दल सदस्य हथियार संचालन के साथ ड्रोन नियंत्रण की जिम्मेदारी भी संभाल सकता है. प्रस्ताव में इंजन तकनीक हस्तांतरण का विकल्प भी शामिल है, जिसका इस्तेमाल भविष्य में Su-30MKI के अपग्रेडेशन और उसके AL-31F इंजन को बदलने की संभावनाओं के लिए किया जा सकता है। 

सॉफ्टवेयर और रडार पर अधिकार की पेशकश
रिपोर्ट के अनुसार, रूस ने विमान के मिशन कंप्यूटर और रडार का सोर्स कोड उपलब्ध कराने की पेशकश की है. इससे भारत को अपने हथियार प्रणालियों को विमान में एकीकृत करने में अधिक स्वतंत्रता मिल सकती है और इसके लिए रूसी कंपनियों पर निर्भरता घट सकती है. हालांकि, Su-57E के 140 विमानों और फ्रांस से 114 राफेल विमानों की संभावित खरीद पर एक साथ विचार करने की स्थिति में वायुसेना के बजट पर बड़ा दबाव पड़ सकता है. ऐसे में प्रस्तावित तकनीक हस्तांतरण, स्वदेशी उत्पादन की लागत और दीर्घकालीन परिचालन जरूरतें भारत के अंतिम फैसले में अहम भूमिका निभाएंगी। 

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