दीप्ति जीवांजी ने एशियन पैरा गेम्स 2026 में जीता गोल्ड, 400 मीटर में बनाया नया रिकॉर्ड
नागोया
भारत की पैरा एथलीट दीप्ति जीवांजी ने 2026 एशियन पैरा गेम्स में महिलाओं की 400 मीटर टी20 स्पर्धा में गोल्ड मेडल जीता है। दीप्ति ने यह रेस 56.36 सेकंड में पूरी की और एशियन पैरा गेम्स का नया रिकॉर्ड बनाया। जापान की नीना कानो ने 58.92 सेकंड के साथ सिल्वर और अकाने काटो ने 1 मिनट 0.26 सेकंड के साथ ब्रॉन्ज मेडल जीता। पेरिस पैरालंपिक में कांस्य पदक जीत चुकीं दीप्ति की इस उपलब्धि ने एक बार फिर उन्हें सुर्खियों में ला दिया है।
दीप्ति जीवांजी का जन्म 27 सितंबर 2003 को तेलंगाना के वारंगल जिले के कलेड़ा गांव में हुआ था। उनका परिवार आर्थिक रूप से कमजोर था। उनके माता-पिता खेती और खेतों में मजदूरी करके परिवार का गुजारा करते थे। दीप्ति बचपन से ही दौड़ने में तेज थीं। गांव के स्कूल में खेल गतिविधियों के दौरान उनकी प्रतिभा पर सबसे पहले शारीरिक शिक्षा के शिक्षक बियानी वेंकटेश्वरालु की नजर पड़ी। उन्होंने दीप्ति की दौड़ने की क्षमता को पहचाना और उन्हें 100 मीटर तथा 200 मीटर दौड़ का अभ्यास कराना शुरू किया।
2019 में चमकी किस्मत
2019 में एक राज्य स्तरीय एथलेटिक्स प्रतियोगिता के दौरान भारतीय खेल प्राधिकरण के कोच एन रमेश ने दीप्ति को देखा। उन्हें लगा कि इस खिलाड़ी में अंतरराष्ट्रीय स्तर पर प्रदर्शन करने की क्षमता है। रमेश ने उनके परिवार को हैदराबाद में प्रशिक्षण के लिए भेजने के लिए प्रोत्साहित किया। यहीं से दीप्ति के करियर को नई दिशा मिली। दीप्ति जीवांजी को बौद्धिक दिव्यांगता है। यह कोई ऐसी दिव्यांगता नहीं है, जो किसी दुर्घटना या खेल के दौरान लगी चोट की वजह से हुई हो। प्रकाशित रिपोर्टों के अनुसार, वह जन्म से ही इस स्थिति के साथ थीं और बाद में उनकी बौद्धिक दिव्यांगता का आकलन किया गया।
बचपन में मजाक बनाते थे लोग
बौद्धिक दिव्यांगता किसी व्यक्ति के सीखने, जानकारी समझने, संवाद करने और रोजमर्रा के कामों को स्वतंत्र रूप से करने की क्षमता को प्रभावित कर सकती है। हालांकि, इसका असर हर व्यक्ति में अलग-अलग होता है। दीप्ति के बचपन में उनके चेहरे और व्यवहार को लेकर गांव के कुछ लोगों ने उनका मजाक भी उड़ाया था। उनके माता-पिता के लिए भी शुरुआती दौर आसान नहीं था। लेकिन परिवार और प्रशिक्षकों के सहयोग से दीप्ति ने खेल में अपनी प्रतिभा निखारी और अंतरराष्ट्रीय स्तर पर भारत का नाम रोशन किया।
क्या है 400 मीटर टी20 कैटेगरी?
दीप्ति जीवांजी महिलाओं की 400 मीटर टी20 स्पर्धा में हिस्सा लेती हैं। पैरा एथलेटिक्स में टी20 वर्ग बौद्धिक दिव्यांगता वाले खिलाड़ियों के लिए निर्धारित है। इस वर्ग में खिलाड़ियों की पात्रता तय करने के लिए निर्धारित मानकों के तहत आकलन किया जाता है। यह वर्गीकरण इसलिए जरूरी है, ताकि खिलाड़ी संबंधित स्पर्धा में निष्पक्ष और समान नियमों के तहत मुकाबला कर सकें। 400 मीटर दौड़ में खिलाड़ी को ट्रैक का एक पूरा चक्कर लगाना होता है। इसमें गति के साथ-साथ सही गति-वितरण, सहनशक्ति और रेस के दौरान अपनी एनर्जी मैनेज करना भी जरूरी होता है।
2023 में भी जीता था एशियन पैरा गेम्स का गोल्ड
दीप्ति जीवांजी के लिए एशियन पैरा गेम्स में गोल्ड जीतना कोई नई उपलब्धि नहीं है। उन्होंने 2023 में चीन के हांगझोऊ में आयोजित एशियन पैरा गेम्स में भी महिलाओं की 400 मीटर टी20 स्पर्धा में स्वर्ण पदक जीता था। उस दौरान उन्होंने 56.69 सेकंड का समय निकालकर गेम्स रिकॉर्ड और एशियाई रिकॉर्ड बनाया था। इसके बाद उन्होंने 2024 में जापान के कोबे में आयोजित विश्व पैरा एथलेटिक्स चैंपियनशिप में महिलाओं की 400 मीटर टी20 स्पर्धा में 55.07 सेकंड का समय निकालकर विश्व रिकॉर्ड बनाया और गोल्ड मेडल जीता। इस प्रदर्शन ने उन्हें विश्व स्तर पर पहचान दिलाई।
पेरिस पैरालंपिक में भी जीता कांस्य पदक
दीप्ति ने पेरिस पैरालंपिक 2024 में महिलाओं की 400 मीटर टी20 स्पर्धा में कांस्य पदक अपने नाम किया। उन्होंने फाइनल में 55.82 सेकंड का समय निकाला। इस उपलब्धि के साथ दीप्ति पैरालंपिक में एथलेटिक्स पदक जीतने वाली भारत की प्रमुख खिलाड़ियों में शामिल हो गईं। विश्व चैंपियन बनने के बाद पैरालंपिक मंच पर पदक जीतना उनके करियर का एक और बड़ा पड़ाव था। दीप्ति ने 2026 एशियन पैरा गेम्स में 56.36 सेकंड का समय निकालकर महिलाओं की 400 मीटर टी20 स्पर्धा का स्वर्ण पदक जीता। इस बार भी उन्होंने गेम्स रिकॉर्ड बनाया और जापान की दोनों प्रतिद्वंद्वियों को पीछे छोड़ दिया। 2023 के एशियन पैरा गेम्स में गोल्ड, 2024 की विश्व चैंपियनशिप में विश्व रिकॉर्ड के साथ गोल्ड और पेरिस पैरालंपिक में कांस्य पदक के बाद अब 2026 में एशियन पैरा गेम्स का एक और स्वर्ण उनके खाते में जुड़ गया है।
