रोहतक की 6 औद्योगिक इकाइयों पर बंदी-सीलिंग का खतरा, प्रदूषण निगरानी डेटा 85% से कम
रोहतक
औद्योगिक प्रदूषण की निगरानी में तय मानकों के अनुसार डेटा उपलब्ध नहीं कराने पर रोहतक जिले की छह औद्योगिक इकाइयों पर बंदी-सीलिंग की तलवार लटक गई है।
केंद्रीय प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड (सीपीसीबी) के आकलन में इन इकाइयों की ऑनलाइन सतत उत्सर्जन निगरानी प्रणाली (ओसीईएमएस) से मिलने वाले आंकड़ों की उपलब्धता 85 प्रतिशत से कम पाई गई। इनमें एक इकाई का सात दिन का डेटा शून्य रहा, जबकि दूसरी इकाई में यह महज 18.15 प्रतिशत दर्ज हुआ। सीपीसीबी ने ऐसे उद्योगों को बंद करने और सील करने के लिए संबंधित प्रदूषण नियंत्रण बोर्डों को तत्काल कार्रवाई के निर्देश दिए हैं।
सीपीसीबी की सूची के अनुसार, यह आकलन 17 से 23 सितंबर के बीच सात दिनों के डेटा पर आधारित है। रोहतक की छह इकाइयों में डेटा उपलब्धता शून्य से लेकर 81.85 प्रतिशत तक दर्ज की गई।
इनमें दो इकाइयों की स्थिति विशेष रूप से चिंताजनक रही, जहां निगरानी प्रणाली से डेटा उपलब्धता 20 प्रतिशत से भी कम मिली। इसका उद्देश्य औद्योगिक उत्सर्जन की लगातार निगरानी करना और प्रदूषण नियंत्रण नियमों का पालन सुनिश्चित करना है। जिलेे की छह इकाइयों के मामले में अब संबंधित बोर्ड की कार्रवाई और निगरानी व्यवस्था में सुधार पर नजर रहेगी।
छह इकाइयों में किसी का डेटा मानक तक नहीं पहुंचा
सीपीसीबी के आकलन में रोहतक की छह औद्योगिक इकाइयों में से किसी की भी डेटा उपलब्धता निर्धारित 85 प्रतिशत के स्तर तक नहीं पहुंची। चार इकाइयों में यह 60 से 81.85 प्रतिशत के बीच रही।
हालांकि, कम डेटा उपलब्धता को सीधे तौर पर अधिक प्रदूषण फैलाने का प्रमाण नहीं माना जा सकता, लेकिन इससे उत्सर्जन की लगातार निगरानी और नियमों के अनुपालन पर सवाल खड़े होते हैं।
सीपीसीबी के मुताबिक, दिल्ली-एनसीआर में कुल 648 औद्योगिक इकाइयों की डेटा उपलब्धता 85 प्रतिशत से कम पाई गई। इनमें हरियाणा की 298, उत्तर प्रदेश की 260, राजस्थान की 80 और दिल्ली की 10 इकाइयां शामिल हैं।
ये आंकड़े 25 सितंबर 2026 तक नए ओसीईएमएस पोर्टल पर डेटा भेजना शुरू कर चुकी इकाइयों के विश्लेषण से सामने आए। सूची में अत्यधिक प्रदूषण फैलाने वाली 17 श्रेणियों के उद्योग, साझा अपशिष्ट उपचार एवं प्रबंधन सुविधाएं, लाल श्रेणी के मध्यम और बड़े उद्योग और खाद्य प्रसंस्करण, कपड़ा और धातु प्रसंस्करण क्षेत्र की इकाइयां शामिल हैं।
सुधार के बाद ही हटेगी सील
सीपीसीबी ने वायु (प्रदूषण निवारण एवं नियंत्रण) अधिनियम, 1981 की धारा 18(1)(बी) के तहत संबंधित राज्य प्रदूषण नियंत्रण बोर्डों को तत्काल कार्रवाई के निर्देश दिए हैं।
आदेश में स्पष्ट किया गया है कि बंदी का आदेश वापस लेने और सील हटाने की प्रक्रिया तभी होगी, जब संबंधित उद्योग आवश्यक सुधार कर लेगा और प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड उसकी अनुपालना से संतुष्ट होगा। सीपीसीबी के दिशा-निर्देशों के अनुसार, उद्योगों को ओसीईएमएस के माध्यम से कम से कम 85 प्रतिशत डेटा उपलब्ध कराना जरूरी है।
