October 24, 2026

अयोध्या दीपोत्सव 2026: सरयू तट पर जलेंगे 30 लाख दीप, 35 हजार स्वयंसेवक संभालेंगे जिम्मेदारी

0
23A_185.jpg

अयोध्या 

कल्पना कीजिए. सरयू का किनारा हो, राम की पैड़ी हो और दूर-दूर तक सिर्फ दीपों की रोशनी दिखाई दे. एक-दो हजार नहीं, लाखों दीप. इन्हें सजाने और जलाने के लिए हजारों हाथ एक साथ जुटें. अयोध्या इस बार कुछ ऐसी ही तस्वीर तैयार करने की कोशिश में है. रामनगरी में दसवें दीपोत्सव की तैयारियों का विधिवत शंखनाद हो गया है. सरयू तट पर भूमि पूजन के साथ आयोजन की शुरुआत हो गई. इस बार लक्ष्य है 30 लाख दीप जलाने का. इसके लिए डॉ. राममनोहर लोहिया अवध विश्वविद्यालय के करीब 35 हजार स्वयंसेवक जुटेंगे। 

इस बार चुनौती सिर्फ लाखों दीप जलाने की नहीं है. चुनौती अपने ही पुराने रिकॉर्ड को पीछे छोड़ने की भी है. पिछले दीपोत्सव में 26 लाख 17 हजार 215 से अधिक दीप प्रज्ज्वलित करने का रिकॉर्ड बनाया गया था. अब दसवें दीपोत्सव में इससे आगे निकलने की तैयारी है। 

दीपोत्सव की तैयारियों की शुरुआत धार्मिक परंपरा के साथ की गई. अवध विश्वविद्यालय के कुलपति प्रो. विजेंद्र सिंह ने विश्वविद्यालय के प्रोफेसरों और स्वयंसेवकों के साथ भूमि पूजन किया. इसके बाद मां सरयू की पूजा-अर्चना की गई. इसके बाद काम शुरू होता है- लाखों दीपों को तय जगहों पर रखना, उनकी व्यवस्था करना और फिर निर्धारित समय पर उन्हें प्रज्ज्वलित करना। 

जब लक्ष्य 30 लाख दीपों का हो, तो जरा सोचिए कि इस पूरे इंतजाम में कितनी मेहनत और तालमेल की जरूरत होगी. सरयू तट और राम की पैड़ी इस आयोजन के प्रमुख केंद्र होंगे. यहां दीपों की कतारें सजाने के लिए विश्वविद्यालय के स्वयंसेवक बड़ी संख्या में जुटेंगे। 

30 लाख का लक्ष्य, लेकिन पिछला रिकॉर्ड भी कम नहीं
अब जरा पिछले रिकॉर्ड पर नजर डालिए. नौवें दीपोत्सव में 26 लाख 17 हजार 215 से अधिक दीप प्रज्ज्वलित किए गए थे. यह अपने आप में बड़ा आंकड़ा है. इस बार लक्ष्य 30 लाख दीपों का रखा गया है. यानी पिछले रिकॉर्ड के मुकाबले करीब 3 लाख 82 हजार 785 दीप अधिक जलाने होंगे. इस आयोजन में अवध विश्वविद्यालय की भूमिका अहम है. विश्वविद्यालय के करीब 35 हजार स्वयंसेवक दीपों को निर्धारित स्थानों पर सजाने और उन्हें प्रज्ज्वलित करने की तैयारियों में हिस्सा लेंगे। 

दीपोत्सव की तस्वीरों में अक्सर लाखों दीपों की चमक दिखाई देती है. उस चमक के पीछे काम करने वाले हजारों लोगों की मेहनत भी होती है. जब लाखों दीपों को एक साथ सजाना हो, तो हर दीप के लिए जगह तय करनी पड़ती है. फिर उन्हें व्यवस्थित तरीके से रखना होता है, ताकि पूरा परिसर खूबसूरत भी दिखे और आयोजन भी तय योजना के मुताबिक आगे बढ़े. इस बार करीब 35 हजार स्वयंसेवकों की टीम इसी काम में जुटेगी. इतने बड़े स्तर पर लोगों को एक साथ काम में लगाना अपने आप में एक बड़ी व्यवस्था है। 

भूमि पूजन के साथ तैयारियों का शंखनाद हो चुका है. अवध विश्वविद्यालय के करीब 35 हजार स्वयंसेवकों को इस भव्य आयोजन में भूमिका निभानी है. लक्ष्य 30 लाख दीप प्रज्ज्वलित करने का है और पिछली बार के रिकॉर्ड को पीछे छोड़ने की कोशिश की जाएगी. सरयू तट और राम की पैड़ी पर लाखों दीप सजाने की तैयारी है. अब सबकी निगाहें उस शाम पर टिकी हैं, जब अयोध्या की रोशनी इस मेहनत और तैयारी की असली तस्वीर सामने लाएगी। 

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *