सीएम योगी ने सुनाया भू-माफिया का किस्सा, बोले- पुलिस भी थी बेबस
लखनऊ
उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने लखनऊ में हो रहे 'टेकसंगम 2026' कार्यक्रम में आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) के इस्तेमाल को लेकर बड़ी बात कही. उन्होंने कहा कि AI हमारे लिए मददगार हो सकता है, लेकिन इसे निर्णायक नहीं बनने देना चाहिए. मुख्यमंत्री ने तकनीक के जरिए अपराधियों पर शिकंजा कसने और प्रदेश में फॉरेंसिक सुविधाओं के विस्तार का भी जिक्र किया. इस दौरान उन्होंने एक भू-माफिया का किस्सा सुनाते हुए बताया कि कैसे उसने सरकारी जमीन अपने नाम दर्ज करा ली थी और पुलिस भी उसके सामने लाचार थी।
लखनऊ स्थित उत्तर प्रदेश स्टेट इंस्टीट्यूट ऑफ फॉरेंसिक साइंस (UPSIFS) में आयोजित 'टेकसंगम 2026' कार्यक्रम में मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस, साइबर सुरक्षा और फॉरेंसिक साइंस की अहमियत पर बात की. उन्होंने कहा कि तकनीक का इस्तेमाल मानव जीवन को बेहतर बनाने के लिए होना चाहिए, लेकिन इंसान को पूरी तरह तकनीक पर निर्भर नहीं हो जाना चाहिए।
AI के विवेक पर नहीं, अपने विवेक पर चलें- CM योगी
मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने कहा, 'आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस हमारे लिए मददगार हो सकता है, लेकिन AI हमारे लिए निर्णायक न हो. वह हमारे विवेक पर निर्भर करे, हम उसके विवेक पर न चलें. अगर उस पर निर्भर होकर सब कुछ करने लगे, तो वही शक्ति हमारे लिए संकट भी बनने वाली है.' उन्होंने कहा कि आज लखनऊ में AI और आधुनिक तकनीक जैसे विषयों पर चर्चा हो रही है, लेकिन 10 साल पहले उत्तर प्रदेश में इस तरह के आयोजन की कल्पना करना भी सपने जैसा था।
भू-माफिया के सामने लाचार थी पुलिस, CM योगी ने सुनाया किस्सा
मुख्यमंत्री ने उस जमीन का भी जिक्र किया, जहां आज उत्तर प्रदेश स्टेट इंस्टीट्यूट ऑफ फॉरेंसिक साइंस स्थापित है. उन्होंने कहा कि पहले यह जमीन अराजकता का शिकार थी. एक भू-माफिया ने कागजों में हेरफेर करके इस जमीन को अपने नाम दर्ज करा लिया था. योगी आदित्यनाथ ने बताया कि इस मामले की जानकारी उन्हें तत्कालीन उत्तर प्रदेश के डीजीपी ने दी थी. उन्होंने कहा कि दुनिया की सबसे बड़ी सिविल पुलिस भू-माफिया के सामने लाचार थी।
मुख्यमंत्री के मुताबिक, उन्होंने डीजीपी से संबंधित फाइल मंगवाई और मामले की जांच बैठाई. इसके बाद एफआईआर दर्ज कराई गई. जब आरोपी हाई कोर्ट पहुंचा तो दूसरी एफआईआर भी दर्ज कराई गई. आखिरकार उस व्यक्ति ने सरेंडर कर दिया और माफी मांगने लगा।
CID सीरियल का उदाहरण देकर समझाई फॉरेंसिक साइंस की ताकत
मुख्यमंत्री ने चर्चित टीवी सीरियल CID का जिक्र करते हुए कहा कि पहले परिवार के पांच लोग एक साथ बैठकर यह सीरियल देखते थे. इसमें दिखाया जाता था कि किसी व्यक्ति की मौत होने पर डॉक्टर बाल या नाखून की जांच करके आरोपी तक पहुंच जाता था. उन्होंने कहा कि उस समय इस तरह की जांच संभव नहीं होती थी, लेकिन आज आधुनिक फॉरेंसिक तकनीक के जरिए ऐसा किया जा रहा है. विज्ञान और तकनीक की मदद से अपराधियों का बच निकलना मुश्किल हो गया है।
42 साल बाद माफिया को हुई सजा, पंजाब से लाने में लगे तीन साल
मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने एक माफिया का उदाहरण देते हुए कहा कि उसने उत्तर प्रदेश में 1980 में पहला अपराध किया था. साल 2017 में जब उनकी सरकार ने उस पर शिकंजा कसा तो उसे पंजाब भेज दिया गया. उन्होंने बताया कि उस माफिया को पंजाब से उत्तर प्रदेश लाने में तीन साल लग गए. इसके लिए सरकार को सुप्रीम कोर्ट तक जाना पड़ा. मुख्यमंत्री के मुताबिक, आखिरकार 42 साल बाद उस माफिया को सजा हुई।
यूपी में 12 फॉरेंसिक लैब और 150 से ज्यादा फॉरेंसिक वैन
मुख्यमंत्री ने कहा कि पहले उत्तर प्रदेश में फॉरेंसिक जांच की पर्याप्त सुविधाएं नहीं थीं. डीएनए सैंपल 10-10 साल तक जांच के इंतजार में पड़े रहते थे. समय पर वैज्ञानिक साक्ष्य उपलब्ध नहीं होने के कारण आरोपी कानून से बच निकलते थे. उन्होंने बताया कि अब प्रदेश में 12 फॉरेंसिक लैब तैयार हैं और 150 से अधिक फॉरेंसिक वैन उपलब्ध हैं. आधुनिक संसाधनों की मदद से सैंपल की जांच कर रिपोर्ट न्यायालय के सामने पेश की जा सकती है।
मुख्यमंत्री ने बताया कि 2017 से पहले उत्तर प्रदेश में केवल दो साइबर थाने और चार फॉरेंसिक लैब थीं. उस समय दोषसिद्धि दर 30 प्रतिशत से भी कम थी. अब प्रदेश के सभी 75 जिलों में साइबर थाने हैं और प्रत्येक मंडल में फॉरेंसिक लैब स्थापित करने की दिशा में काम किया जा रहा है. उन्होंने कहा कि 'टेकसंगम 2026' में AI, साइबर फॉरेंसिक, क्वांटम तकनीक और डेटा प्रोटेक्शन जैसे विषयों पर चर्चा हो रही है. इस आयोजन का उद्देश्य तकनीकी नवाचार को नागरिक सुरक्षा, प्रभावी न्याय व्यवस्था और युवाओं के लिए शिक्षा, अनुसंधान तथा रोजगार के नए अवसरों से जोड़ना है।
