June 17, 2026

राहतः बिहार समेत 17 राज्यों के फास्ट ट्रैक कोर्ट में नो केस पेंडिंग

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 नई दिल्ली 

देश में रेप और पॉक्सो के तहत दर्ज मामलों के निपटारे के लिए गठित फास्ट ट्रैक कोर्ट का असर दिखने लगा है। केंद्रीय कानून मंत्रालय के अनुसार बिहार समेत देश के 17 राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों में रेप, पॉक्सो एक्ट समेत अन्य तरह का कोई भी मामला फास्ट ट्रैक कोर्ट (एफटीसी) में लंबित नहीं है। कानून मंत्रालय के अनुसार 31 अक्तूबर 2022 तक देशभर में अक्तूबर तक कुल 838 फास्ट ट्रैक कोर्ट का संचालन हो रहा था। इन अदालतों में कुल 14,19,994 मामले लंबित थे। मंत्रालय की रिपोर्ट के अनुसार दिसंबर के पहले सप्ताह तक संचालित एफटीसी की संख्या 733 हो गई है।

यहां की अदालत में एक भी केस नहीं
कानून मंत्रालय के अनुसार सात केंद्र शासित प्रदेशों अंडमान और निकोबार द्वीप, दमन और दीऊ, जम्मू-कश्मीर, लद्दाख, लक्षद्वीप, पुड्डुचेरी और चंडीगढ़ की फास्ट ट्रैक अदालतों में रेप या पॉक्सो समेत अन्य तरह का एक भी मामला लंबित नहीं है। इसी तरह दस राज्यों आंध्र प्रदेश, बिहार, कर्नाटक, केरल, मध्यप्रदेश, मेघालय, नागालैंड, ओडिशा, राजस्थान और तेलंगाना की भी फास्ट ट्रैक अदालत में विवाद लंबित नहीं है।

दिल्ली में दो साल बाद सबसे कम मामले
रिपोर्ट के अनुसार दिल्ली में वर्ष 2020 में कुल पांच एफटीसी का संचालन हो रहा था और 40,733 मामले लंबित थे। 2021 में एफटीसी की संख्या सात हुई तो लंबित मामले बढ़कर 48,520 हो गए। दो साल बाद 2022 में कुल 20 फास्ट ट्रैक कोर्ट का संचालन किया जा रहा है और लंबित मामलों की संख्या घटकर 7068 हो गई है। पंजाब में सबसे कम 245 मामले लंबित है।

मार्च 2023 तक एफटीसी का संचालन
केंद्रीय कानून मंत्री किरेन रिजिजू ने राज्यसभा को बताया है कि 31 मार्च 2023 तक फास्ट ट्रैक कोर्ट के संचालन के लिए अनुमति दी गई है। इसके लिए कुल 1572.86 करोड़ रुपये भी आवंटित किए गए हैं। इसमें से 971.70 करोड़ रुपये निर्भया फंड से राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों को सौंपे जाएंगे। 14वें वित्त आयोग ने 2015 से 2020 तक 1800 फास्ट ट्रैक कोर्ट खालेने का निर्देश दिया था।

क्या है एफटीसी और कैसे मामलों पर सुनवाई
कानून मंत्रालय के अनुसार देशभर में गठित फास्ट ट्रैक कोर्ट में महिलाओं, बच्चों, वरिष्ठ नागरिकों, दिव्यांगजनों और संपत्ति से जुड़े ऐसे मामले जो पांच साल से लंबित है उनपर सुनवाई होती है। गंभीर रूस से बीमार व्यक्ति से जुड़ी याचिका पर भी यहां तत्काल फैसला होता है। विशेष तरह के मामलों को जल्द से जल्द निपटाने के लिए केंद्र या राज्य सरकार उसे फास्ट ट्रैक कोर्ट में भेज सकती है। 

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