September 23, 2024

…डेवलपर मुफ्त बनाकर देंगे नए फ्लैट आश्रय शुल्क से भी मुक्ति की तैयारी

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भोपाल

प्रदेश में पुराने जर्जर बहुमंजिला आवासों को तोड़कर उनकी जगह उसमें रहने वालों को मुफ्त में नये सुविधाजनक, गुणवत्तापूर्ण ज्यादा बिल्टअप क्षेत्र वाले मकान मिल सकेंगे। इसके लिए राज्य सरकार नई रीडेंसिफिकेशन पॉलिसी में कई तरह की रियायतों का प्रावधान करने जा रही है। निजी डेवलपरों और गृह निर्माण मंडल, विकास प्राधिकरणों की मदद से यह निर्माण होंगे और इसमें न केवल रहवासियों को ज्यादा सुंदर सुविधाजनक आवास मिल सकेंगे बल्कि डेवलपर भी अच्छा खासा मुनाफा कमा सकेंगे। इसमें एलआईजी, ईडब्ल्यूएस मकानों के निर्माण और आश्रय शुल्क जमा कराने से भी छूट देने की तैयारी है।

राजधानी भोपाल और इंदौर, ग्वालियर, जबलपुर सहित सभी बड़े महानगरो में कई बहुमंजिला इमारते है जो तीस साल से अधिक पुरानी हो चुकी है और अब वे जर्जर हालात में आ चुकी है। नगरीय निकायों, हाउसिंग बोर्ड, विकास प्राधिकरणों के साथ ही निजी डेवलपरों और बिल्डरों द्वारा निर्मित इन इमारतों में से कई रहने योग्य नहीं रह गई है और नगरीय निकाय उन्हें जर्जर घोषित कर तोड़ने के निर्देश दे चुके है या देने की तैयारी में है। इन आवासों के स्थान पर अब सरकार नये मजबूत, अत्याधुनिक सुविधाओं से लैस फ्लैट, आवास बनाने के लिए नई रिडेंसिफिकेशन पॉलिसी लाने जा रही है। इस नई पॉलिसी में काम करने के लिए डेवलपर और रहवासी समितियां तैयार हो इसके लिए इस पॉलिसी को अब और आकर्षक बनाया जा रहा है

यह योजना उन आवास मालिकों के लिए वरदान साबित होगी जो अपनी जमापूंजी  निवेश कर बहुमुजिला आवासों में फ्लैट लेकर लंबे समय से रह रहे है लेकिन सेवानिवृत्ति के बाद अपनी पारिवारित जरुरतों के चलते वे इन जर्जर मकानों के बदले नये मकान बनाने या भवनों की मरम्मत के लिए राशि जुटाने में असमर्थ है।

रहवासियों को फायदा
बहुमंजिला भवनों में रहने वाले 51 फीसदी रहवासियों की सहमति से इस तरह के प्रोजेक्ट पर काम होगा। इसमें रहवासियों को मुफ्त में मौजूदा आकार या उससे अधिक आकार के ज्यादा सुविधाजनम आवास मुफ्त में बन कर मिल सकेंगे। जब तक निर्माण होगा डेवलपर दूसरे आवासों में रहने की सुविधा देगा या उस क्षेत्र में रहने के लिए वहां का मौजूदा दरों से किराया रहवासियों को उपलब्ध कराएगा।

डेवलपरों को इस तरह की रियायतें
महानगरों में बनी जर्जर बहुमंजिला इमारतों को गिराकर उनके पुर्ननिर्माण के लिए नई रिडेंसिफिकेशन पॉलिसी में सरकार निजी डेवलपरों और गृह निर्माण मंडल, विकास प्रािधकरणों को मौजूदा एफएआर को आधा प्रतिशत बढ़ाकर देगी। वर्तमान में बहुमंजिला इमारतों के लिए ग्राउंड कवरेज तीस प्रतिशत है उसे बढ़ाकर चालीस प्रतिशत किया जाएगा। नये निर्माण पर ईडब्ल्यूएस, एलआईजी बनाने और आश्रय शुल्क देने से भी छूट दी जाएगी। वर्तमान में आवासीय भवनों में कामर्शियल एरिया पांच प्रतिशत तक सीमित है इसे बढ़ाकर साढ़े सात प्रतिशत करने की तैयारी है। डेवपलर ज्यादा एफएआर पर जो मकान बनाकर मुनाफा कमाएगा उन भवनों की रजिस्ट्री पर स्टाम्प ड्यूटी आधा प्रतिशत से घटाकर  .25 प्रतिशत करने की तैयारी है। नये भवनों की रजिस्ट्री के लिए एग्रीमेंट करेक्शन डीड पर मात्र एक हजार रुपए ही लिए जाएंगे। सबसे बड़ा बदलाव इसमें लीज होल्ड जमीनों को सरकार बिना शुल्क फ्री होल्ड भी करने की तैयारी में है। डेवलपर को एफएआर से अधिक निर्माण और ज्यादा जमीन के उपयोग की अनुमति मिलने से जो अधिक आवास वहां तैयार होंगे उन्हें बेचकर डेवलपर निर्माण की लागत और मुनाफा निकालेगा।

ऐसे होगा काम शुरू
रहवासी समिति की सहमति से नगरीय प्रशासन विभाग प्रस्ताव तैयार कर मुख्य सचिव की अध्यक्षता वाली साधिकार समिति के पास प्रस्ताव तैयार कर देगी। उनकी सहमति के बाद सरकारी एजेंसी या निजी डेवलपरों को आमंत्रित कर उनके जरिए ये निर्माण कराए जाएंगे। यदि सरकारी एजेंसियां इस योजना में निर्माण करती है तो उन्हें सुपरवीजन चार्ज इस योजना में मिलेगा। ये संस्थाएं ठेकेदारों की मदद से ही निर्माण कराएंगी। निजी ठेकेदारों की मदद से ये निर्माण कराए जाएंगे।

नगरीय निकायों, पंचायतों के काम भी होंगे महंगे
लोक निर्माण विभाग के इस आदेश के बाद अब शहरी और ग्रामीण इलाकों में कराए जाने वाले सरकारी कामों की लागत भी बढ़ेगी। चूंकि सभी निर्माण एजेंसियां लोक निर्माण विभाग की एसओआर पालिसी को लागू करती हैं। इसलिए इसका असर अप्रत्यक्ष तौर पर जनता पर ही पड़ना तय है क्योंकि सभी काम पब्लिक से वसूले गए टैक्स से ही कराए जाते हैं।

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