‘तीर-कमान’ के बाद उद्धव ठाकरे ने गंवाया ‘नीला निशान’, YouTube से Twitter तक बदली पहचान
नई दिल्ली
भारत निर्वाचन आयोग (ECI) ने मुख्यमंत्री एकनाथ शिंदे के गुट को 'असली शिवसेना' बता दिया है। इसके साथ ही अब उद्धव ठाकरे से 'तीर-कमान' की पहचान भी छिन गई। इसका असर सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म्स पर भी देखा गया, जहां पार्टी का नाम बदलने के बाद ही ब्लू टिक यानी वेरिफिकेशन भी हट गया। चुनाव आयोग के फैसले के बाद उद्धव कैंप ने ट्विटर हैंडल बदलकर @ShivsenaUBT_ कर दिया था। इसी के चलते पार्टी का ब्लू टिक छिन गया। इसके अलावा YouTube पर भी ठाकरे गुट ने नाम बदल दिया। ट्विटर पर पार्टी के आधिकारिक मीडिया हैंडल @ShivsenaComms का ब्लू टिक भी @ShivsenaUBTComm होने के बाद हट गया।
रिपोर्ट के अनुसार, एक पदाधिकारी ने बताया, 'हमने नाम के चलते कैडर के साथ-साथ जनता के बीच कन्फ्यूजन से बचने के लिए यह कदम उठाया है। नॉर्म्स के आधार पर ट्विटर की तरफ से ब्लू टिक हटा लिया गया। हमने दोबारा सर्टिफिकेशन हासिल करने के लिए आवेदन कर दिया है और यह जल्द होगा।' भाषा के अनुसार, आयोग ने एकनाथ शिंदे नीत धड़े को असली शिवसेना के रूप में शुक्रवार को मान्यता दी और उसे 'तीर-कमान' चुनाव चिह्न आवंटित करने का आदेश दिया। पार्टी पर नियंत्रण के लिए चली लंबी लड़ाई के बाद 78 पृष्ठों के अपने आदेश में, आयोग ने उद्धव ठाकरे गुट को राज्य में विधानसभा उपचुनावों के पूरा होने तक 'मशाल' चुनाव चिह्न रखने की अनुमति दी।
आयोग ने कहा कि वर्ष 2019 के महाराष्ट्र विधानसभा चुनाव में शिवसेना के 55 विजयी उम्मीदवारों में से एकनाथ शिंदे का समर्थन करने वाले विधायकों के पक्ष में लगभग 76 फीसदी मत पड़े। महाराष्ट्र में 2019 के विधानसभा चुनाव में शिवसेना के विजयी उम्मीदवारों के पक्ष में मिले मतों से 23.5 प्रतिशत मत उद्धव ठाकरे धड़े के विधायकों को मिले थे।